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इंसान नहीं, अब रोबोट लेगा जान! 30 देशों में हड़कंप, आखिर क्या है ये 'किलर' एआई टेक्नोलॉजी?
Autonomous Weapons LAWS: लेथल ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम (LAWS) यानी 'किलर रोबोट्स' पर दुनिया भर में बहस छिड़ गई है। जानिए कैसे एआई आधारित ये हथियार बिना इंसानी आदेश के हमला करते हैं और क्यों 30 देश इन पर बैन चाहते हैं।
Autonomous Weapons LAWS: क्या आपने कभी सोचा है कि युद्ध के मैदान में एक ऐसी मशीन उतरेगी जिसे न दया आएगी, न डर लगेगा और न ही वह हमला करने से पहले अपने आका का आदेश मांगेगी? यह किसी हॉलीवुड फिल्म की कहानी नहीं बल्कि आज की कड़वी हकीकत है। विज्ञान की दुनिया में जिसे 'लेथल ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम्स' यानी LAWS कहा जाता है, वह अब दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। ये वो हथियार हैं जो खुद तय करते हैं कि किसे मारना है और कब। आज पूरी दुनिया इस तकनीक को लेकर दो गुटों में बंट गई है क्योंकि यह सवाल अब सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि इंसानियत के वजूद का है।
कैसे काम करता है मौत का यह 'डिजिटल दिमाग'
इन किलर ड्रोन्स और रोबोट्स की सबसे बड़ी ताकत इनका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई है। इन मशीनों के अंदर अत्याधुनिक सेंसर और थर्मल कैमरे लगे होते हैं जो अंधेरे में भी इंसानी शरीर की गर्मी को पहचान लेते हैं। इसमें लगी लिडार तकनीक लेजर की मदद से पूरे इलाके का थ्री-डी नक्शा तैयार कर लेती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि इसका 'डीप लर्निंग सिस्टम' लाखों तस्वीरों के डेटा से लैस होता है, जो पलक झपकते ही तय कर लेता है कि सामने खड़ा शख्स एक सैनिक है या बेकसूर नागरिक। जब यह मशीन फैसला लेती है, तो इसमें मानवीय संवेदना या नैतिकता के लिए कोई जगह नहीं होती।
हवा में मंडराती तबाही और दुनिया के घातक हथियार
दुनिया के कई देशों ने पहले ही ऐसे हथियार तैयार कर लिए हैं जो दुश्मन की रूह कंपा रहे हैं। इजराइल का 'हारोप' ड्रोन घंटों आसमान में मंडराता रहता है और जैसे ही इसे दुश्मन के रडार का सिग्नल मिलता है, यह खुद जाकर उससे टकरा जाता है। वहीं रूस का 'जाला' और अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया का 'घोस्ट बैट' इस रेस को और खतरनाक बना रहे हैं। तुर्की का 'कार्गु-2' ड्रोन तो पहले ही बदनाम हो चुका है क्योंकि रिपोर्टों के अनुसार इसने लीबिया में बिना किसी इंसानी आदेश के हमला कर दिया था। ये ड्रोन 'लॉइटरिंग म्यूनिशन' तकनीक पर चलते हैं, यानी ये तब तक आसमान में शिकारी की तरह घूमते रहते हैं जब तक इन्हें अपना शिकार नहीं मिल जाता।
आखिर क्यों खौफ में हैं दुनिया के 30 से ज्यादा देश
इतनी ताकतवर तकनीक होने के बावजूद ऑस्ट्रिया और न्यूजीलैंड जैसे 30 से ज्यादा देश इन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। सबसे बड़ा डर यह है कि अगर एआई के एल्गोरिद्म में कोई छोटी सी भी चूक हुई, तो वह किसी स्कूल या अस्पताल को सैन्य ठिकाना समझकर तबाह कर सकता है। अगर ये मशीनें हैक हो गईं, तो ये अपने ही देश के खिलाफ तबाही मचा सकती हैं। सबसे बड़ा नैतिक सवाल यह है कि क्या हम जान लेने का हक एक सॉफ्टवेयर को दे सकते हैं? अगर कोई रोबोट निर्दोष की जान लेता है, तो सजा किसे मिलेगी—उस प्रोग्रामर को जिसने कोड लिखा या उस कंपनी को जिसने उसे बनाया? इन्हीं सवालों ने आज पूरी दुनिया में एक नई जंग छेड़ दी है।


