किम जोंग उन के बाद कौन? बहन किम यो जोंग या बेटी किम जू ए, उत्तर कोरिया की सत्ता का सवाल

Kim Jong Un News in Hindi: किम जोंग उन के बाद उत्तर कोरिया की सत्ता किसे मिल सकती है? जानिए किम यो जोंग और किम जू ए की भूमिका, परमाणु हथियारों पर नियंत्रण और चीन की रणनीतिक चिंता।

Yogesh Mishra
Published on: 21 Oct 2026 2:20 PM IST
Kim Jong Un News in Hindi | Kim Jong Un Successor Explained in Hindi | Newstrack Hindi News
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Kim Jong Un News in Hindi | Kim Jong Un Successor Explained in Hindi | Newstrack Hindi News

Kim Jong Un News in Hindi: उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन की ‘मौत’ और उनकी बहन किम यो जोंग के सत्ता संभालने की खबरों ने दुनिया का ध्यान खींचा है। हालांकि, इन खबरों की पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी इस पूरे घटनाक्रम ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर किम जोंग उन अचानक सत्ता संभालने की स्थिति में नहीं रहे, तो उत्तर कोरिया की कमान किसके हाथ में जाएगी? क्या उनकी छोटी बहन किम यो जोंग देश की पहली महिला शासक बन सकती हैं? और अगर ऐसा हुआ, तो उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों और अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान तथा चीन के साथ उसके रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?

फिलहाल, किम जोंग उन की मौत या किम यो जोंग के सत्ता संभालने की पुष्टि नहीं हुई है। चीन के करीब नौ हजार सैनिकों को उत्तर कोरिया भेजे जाने का दावा भी सामने आया है, लेकिन इसकी भी कोई विश्वसनीय पुष्टि नहीं हुई है।

कौन हैं किम यो जोंग?

किम यो जोंग उत्तर कोरिया के शासक परिवार की सदस्य और किम जोंग उन की छोटी बहन हैं। वह उत्तर कोरिया के पूर्व शासक किम जोंग इल की बेटी और देश के संस्थापक किम इल सुंग की पोती हैं। उनका जन्म आमतौर पर 1987 में बताया जाता है, हालांकि उनके परिवार से जुड़ी कई निजी जानकारियां सार्वजनिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। किम यो जोंग ने अपने भाई की तरह स्विट्जरलैंड में पढ़ाई की। किम जोंग उन के सत्ता में आने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका धीरे-धीरे बढ़ती गई। आज उन्हें उत्तर कोरिया के सबसे ताकतवर नेताओं में गिना जाता है। फरवरी 2018 में दक्षिण कोरिया में हुए शीतकालीन ओलंपिक के दौरान वह दुनिया की नजरों में आईं। वह उत्तर कोरिया के शासक परिवार की पहली प्रमुख सदस्य थीं, जिन्होंने कोरियाई युद्ध के बाद दक्षिण कोरिया का दौरा किया। वहां उन्होंने दक्षिण कोरिया के तत्कालीन राष्ट्रपति मून जे इन से मुलाकात की और अपने भाई का संदेश पहुंचाया।


हालांकि, उनकी पहचान केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं रही। दक्षिण कोरिया और अमेरिका के खिलाफ उनके सख्त बयानों ने उन्हें उत्तर कोरिया की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बना दिया। उत्तर कोरिया में सत्ता का केंद्र किम परिवार है। ऐसे में किम जोंग उन की बहन होने के साथ-साथ उनका भरोसेमंद होना भी किम यो जोंग की बड़ी ताकत माना जाता है।

2026 में मिली बड़ी जिम्मेदारी

किम यो जोंग की बढ़ती ताकत का एक बड़ा संकेत फरवरी 2026 में मिला। सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के नौवें अधिवेशन के दौरान उन्हें पार्टी की केंद्रीय समिति के जनरल अफेयर्स विभाग का निदेशक बनाया गया। इससे पहले वह पार्टी में उपनिदेशक की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। नई जिम्मेदारी मिलने से पार्टी में उनकी स्थिति और मजबूत हुई। उत्तर कोरिया में असली राजनीतिक ताकत केवल सरकारी पदों से तय नहीं होती। सत्तारूढ़ पार्टी और सर्वोच्च नेता के करीबी लोगों की भूमिका भी बहुत अहम होती है। इस लिहाज से किम यो जोंग को मिली जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्हें उत्तर कोरिया का अगला शासक घोषित नहीं किया गया है। उनकी बढ़ती ताकत को उत्तराधिकार का पक्का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।

भाई के बाद बहन या बेटी संभालेगी सत्ता?

किम जोंग उन के बाद उत्तर कोरिया की सत्ता किसके हाथ में जाएगी, इस सवाल के दो प्रमुख जवाब माने जा रहे हैं। एक नाम उनकी बहन किम यो जोंग का है और दूसरा उनकी बेटी किम जू ए का। पिछले कुछ वर्षों में किम जोंग उन अपनी बेटी को कई महत्वपूर्ण सरकारी और सैन्य कार्यक्रमों में साथ लेकर दिखाई दिए हैं। मिसाइल परीक्षणों और सैन्य समारोहों में उनकी मौजूदगी ने उनके संभावित उत्तराधिकारी होने की चर्चा को बढ़ाया है। फरवरी 2026 में दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने वहां के सांसदों को बताया था कि किम जू ए को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किए जाने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, उत्तर कोरिया ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ऐसे में दोनों की भूमिकाओं को अलग-अलग समझना जरूरी है।


किम जू ए को भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार किया जा सकता है, जबकि अचानक सत्ता संकट आने पर किम यो जोंग को अपने राजनीतिक अनुभव और पार्टी में मजबूत स्थिति का फायदा मिल सकता है। यह भी संभव है कि ऐसी स्थिति में पार्टी और सेना के वरिष्ठ अधिकारी मिलकर सत्ता चलाने में बड़ी भूमिका निभाएं। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि किम जोंग उन के बाद उनकी बहन या बेटी में से कोई एक निश्चित रूप से शासक बनेगी।

क्या किम यो जोंग अपने भाई से भी ज्यादा सख्त होंगी?

किम यो जोंग अपने सख्त बयानों और दक्षिण कोरिया के प्रति कड़े रुख के लिए जानी जाती हैं। वह कई बार दक्षिण कोरिया को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दे चुकी हैं। 19 अक्टूबर 2026 को भी उन्होंने दक्षिण कोरिया को लेकर सख्त रुख अपनाया। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के मुताबिक, उन्होंने सीमा पर अतिरिक्त हथियार तैनात करने और प्रचार करने वाले लाउडस्पीकर दोबारा शुरू करने की संभावना जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण कोरियाई सेना की गतिविधियों से उत्तर कोरियाई सैनिकों की सुरक्षा को खतरा है। दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया ने भी उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों पर चिंता जताई है। इन बयानों से साफ है कि किम यो जोंग उत्तर कोरिया की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बोलती हैं। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि अगर वह सत्ता संभालती हैं, तो उनकी नीतियां अपने भाई से भी ज्यादा सख्त होंगी। किसी भी नए शासक का रुख उस समय के हालात और देश की सैन्य रणनीति पर भी निर्भर करेगा।

परमाणु हथियारों पर किसका होगा नियंत्रण?

किम जोंग उन के बाद सत्ता बदलने की स्थिति में सबसे बड़ा सवाल उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों को लेकर होगा। उत्तर कोरिया ने पिछले कई दशकों में परमाणु हथियार और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें विकसित की हैं। वह इन्हें अपनी सुरक्षा का अहम हिस्सा मानता है। यही वजह है कि उसकी सैन्य ताकत से दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका चिंतित रहते हैं। अगर किम जोंग उन अचानक सत्ता से हटते हैं, तो नए नेतृत्व को सेना और सुरक्षा तंत्र का भरोसा हासिल करना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि परमाणु हथियारों से जुड़े फैसले लेने वाली व्यवस्था सुचारु रूप से काम करती रहे।

हालांकि, उत्तर कोरिया की परमाणु कमान कैसे काम करती है, इसकी पूरी जानकारी बाहरी दुनिया के पास नहीं है। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि किम यो जोंग के सत्ता संभालते ही परमाणु हथियारों का पूरा नियंत्रण अपने आप उनके हाथ में आ जाएगा। सत्ता परिवर्तन के दौरान दो तरह के खतरे पैदा हो सकते हैं। पहला, नया नेता अपनी ताकत दिखाने के लिए मिसाइल परीक्षण या सैन्य गतिविधियां बढ़ा सकता है। दूसरा, उत्तर कोरिया के इरादों को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच गलतफहमी पैदा हो सकती है। हालांकि, इसका उलटा भी संभव है। नया नेतृत्व अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तनाव कम करने और दूसरे देशों के साथ बातचीत का रास्ता चुन सकता है। इसलिए किम यो जोंग के सत्ता में आने का मतलब अपने आप युद्ध का खतरा बढ़ना नहीं होगा। असली चिंता सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण और परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की होगी।

चीन क्यों रखता है उत्तर कोरिया पर नजर?

उत्तर कोरिया के किसी भी बड़े राजनीतिक बदलाव का असर चीन पर भी पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य संबंध रहे हैं। चीन के लिए उत्तर कोरिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके दक्षिण में दक्षिण कोरिया है, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ऐसे में उत्तर कोरिया में अचानक राजनीतिक संकट पैदा होना चीन की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकता है। बीजिंग नहीं चाहेगा कि उत्तर कोरिया में अस्थिरता बढ़ने से उसकी सीमा पर बड़ी संख्या में शरणार्थी पहुंचें या परमाणु ठिकानों की सुरक्षा को लेकर संकट पैदा हो।


इसी बीच किम जोंग उन की कथित मौत के बाद चीन के करीब नौ हजार सैनिक उत्तर कोरिया भेजे जाने का दावा भी सामने आया है। लेकिन इस दावे की कोई विश्वसनीय स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे सच मानकर पेश करना उचित नहीं होगा। अगर उत्तर कोरिया में कभी सत्ता परिवर्तन होता है, तो चीन की कोशिश सीमा पर स्थिरता बनाए रखने और अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा करने की होगी।

तीन पीढ़ियों से किम परिवार का शासन

उत्तर कोरिया में सत्ता पर किम परिवार का नियंत्रण करीब आठ दशकों से बना हुआ है। 1948 में देश की स्थापना के बाद किम इल सुंग सर्वोच्च नेता बने। 1994 में उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे किम जोंग इल ने सत्ता संभाली। दिसंबर 2011 में किम जोंग इल की मृत्यु के बाद उनके बेटे किम जोंग उन देश के शासक बने। इस तरह उत्तर कोरिया में तीन पीढ़ियों से एक ही परिवार का शासन चला आ रहा है। यहां सत्ता का हस्तांतरण आम लोकतांत्रिक व्यवस्था की तरह नहीं होता। देश में सर्वोच्च नेता का चुनाव स्वतंत्र और प्रतिस्पर्धी चुनावों के जरिए नहीं किया जाता। किम परिवार की राजनीतिक पकड़, सत्तारूढ़ पार्टी का समर्थन और सेना की भूमिका सत्ता के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर किम यो जोंग भविष्य में देश की सर्वोच्च नेता बनती हैं, तो वह उत्तर कोरिया की पहली महिला शासक होंगी। हालांकि, इसके लिए उन्हें केवल अपने परिवार की विरासत का सहारा ही नहीं, बल्कि पार्टी और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का समर्थन भी हासिल करना होगा।

दुनिया के लिए असली चिंता क्या है?

किम जोंग उन की मौत और उनकी बहन के सत्ता संभालने की खबरों ने एक बार फिर उत्तर कोरिया की राजनीतिक व्यवस्था की गोपनीयता को चर्चा में ला दिया है। अप्रैल 2020 में भी किम जोंग उन कई दिनों तक सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए थे। उस समय उनकी गंभीर बीमारी और मौत तक की खबरें फैल गई थीं। लेकिन 1 मई 2020 को वह एक कारखाने के उद्घाटन समारोह में नजर आए और उनकी मौत की अफवाहें गलत साबित हुईं। इस बार भी उनकी मौत की खबरों की पुष्टि नहीं हुई है। 20 अक्टूबर को जारी तस्वीरों में वह अपनी बेटी के साथ दिखाई दिए। उत्तर कोरिया में भविष्य में सत्ता परिवर्तन होता है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन अगर ऐसा होता है, तो उसका असर केवल देश की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा।

दक्षिण कोरिया और जापान अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहेंगे। अमेरिका उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और अपने सहयोगियों की सुरक्षा पर नजर रखेगा। वहीं, चीन अपनी सीमा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंतित रहेगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि भविष्य में उत्तर कोरिया में नेतृत्व बदलता है तो परमाणु हथियारों से लैस इस देश में सत्ता का हस्तांतरण कितना शांतिपूर्ण और स्थिर रहेगा।

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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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