'पाकिस्तान से रिश्ते रखने ही होंगे', रुबियो ने क्यों बताया US-PAK दोस्ती को भारत के लिए अहम?

मार्को रुबियो ने कहा कि परमाणु हथियारों और रणनीतिक स्थिति के कारण अमेरिका को पाकिस्तान से संबंध बनाए रखने होंगे। जानिए भारत की सुरक्षा और आतंकवाद पर उन्होंने क्या कहा।

Alakha Singh
Published on: 21 Oct 2026 1:58 PM IST (Updated on: 21 Oct 2026 2:25 PM IST)
पाकिस्तान से रिश्ते रखने ही होंगे, रुबियो ने क्यों बताया US-PAK दोस्ती को भारत के लिए अहम?
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नई दिल्ली: पाकिस्तान के परमाणु हथियार और उसकी रणनीतिक लोकेशन अमेरिका को इस्लामाबाद के साथ रिश्ते बनाए रखने के लिए मजबूर करती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे के दौरान साफ किया कि वाशिंगटन पाकिस्तान से अपने संबंध खत्म नहीं कर सकता। हालांकि, उन्होंने भारत को भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान के साथ अमेरिकी दोस्ती नई दिल्ली के साथ रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं होगी। रुबियो के इस बयान ने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों और भारत की सुरक्षा चिंताओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

रुबियो ने कहा कि अमेरिकी विदेश नीति की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्हें उन देशों के साथ भी संवाद बनाए रखना पड़ता है, जिनके साथ वाशिंगटन के मतभेद हैं। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वह परमाणु हथियारों से लैस देश है और भौगोलिक लिहाज से भी अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में उसके साथ बातचीत के रास्ते खुले रखना जरूरी है।

पाकिस्तान से रिश्ते क्यों जरूरी मानता है अमेरिका?

नेटवर्क18 को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि विदेश मंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी केवल राजनीतिक मतभेद जाहिर करना नहीं, बल्कि अमेरिकी विदेश नीति का प्रबंधन करना भी है। इसके लिए विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और उसकी भौगोलिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका को इस देश के साथ संवाद करने में सक्षम होना चाहिए। रुबियो ने भारत और ईरान के संबंधों का उदाहरण भी दिया। उनके मुताबिक, जिस तरह भारत अपने हितों के लिए ईरान के साथ संबंध रखता है, उसी तरह अमेरिका को भी पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखनी होगी।

रुबियो की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब पाकिस्तान के साथ ट्रंप प्रशासन के संबंधों और भारत की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

भारत की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने में कैसे मदद करेगा पाकिस्तान से संपर्क?

रुबियो ने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को भारत के लिए नुकसानदेह मानने के बजाय इसे संभावित कूटनीतिक अवसर के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका के पाकिस्तान के साथ संबंध बने रहते हैं, तो वाशिंगटन इस्लामाबाद से सीधे बातचीत करके उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने की कोशिश कर सकता है, जिनसे भारत चिंतित रहता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक, यह संतुलन बनाना आसान नहीं है, लेकिन विदेश नीति के स्तर पर इसकी जरूरत है। पाकिस्तान के साथ संवाद अमेरिका को अपनी चिंताओं और अपेक्षाओं को सीधे रखने का मौका देता है।

हालांकि, रुबियो के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका कौन से ठोस कदम उठाएगा या भारत की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए क्या विशेष रणनीति अपनाई जाएगी।

आतंकवाद पर अमेरिका का रुख क्या है?

पाकिस्तान के साथ संबंधों की पैरवी करने के बावजूद रुबियो ने आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के खिलाफ अमेरिकी रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी होने वाले आतंकवाद और आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों के खिलाफ है।

यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि रुबियो ने 2025 में अमेरिकी सीनेटर रहते हुए कहा था कि यदि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को प्रायोजित करता है, तो वह पाकिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी सुरक्षा सहायता में कटौती के लिए विधेयक पेश करेंगे।

अब विदेश मंत्री के रूप में उनका तर्क है कि आतंकवाद का विरोध करने और पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंध बनाए रखने की नीति एक साथ चल सकती है।

भारत को रुबियो ने क्या भरोसा दिया?

द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक अलग इंटरव्यू में रुबियो ने भारत की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान समेत दुनिया के किसी भी देश के साथ अपने संबंधों को भारत के साथ रिश्तों की कीमत पर नहीं देखता।

उनका संदेश साफ था कि वाशिंगटन इस्लामाबाद के साथ संपर्क बनाए रखेगा, लेकिन इससे भारत के साथ उसकी साझेदारी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

रुबियो का यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली के लिए पाकिस्तान का आतंकवाद से जुड़ा रिकॉर्ड और सीमा पार सुरक्षा चुनौतियां लंबे समय से अहम मुद्दे रहे हैं। ऐसे में अमेरिका का पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने का फैसला भारत के लिए तभी भरोसेमंद होगा, जब यह जमीन पर उसकी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने में भी मदद करे।

कुल मिलाकर, रुबियो ने अमेरिका की पाकिस्तान नीति को रणनीतिक जरूरत और कूटनीतिक संवाद के नजरिये से समझाया है। उनका दावा है कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते भारत के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत का माध्यम भी बन सकते हैं। लेकिन इस नीति की असली परीक्षा इस बात से होगी कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल आतंकवाद पर लगाम लगाने और भारत की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए किस हद तक कर पाता है।

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Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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