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G7 Summit: हाथ तो मिल गए, लेकिन क्या रिश्तों की पकड़ ढीली? G7 में मोदी-ट्रंप की ‘केमिस्ट्री’ फेल
France G7 Summit 2026: G7 शिखर सम्मेलन में मोदी और ट्रंप की मुलाकात ने कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। हाथ मिलाने से लेकर सीटिंग अरेंजमेंट तक, जानिए रिश्तों के बदलते संकेत।
France G7 Summit 2026: फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात जितनी छोटी थी, उसके राजनीतिक मायने उतने ही बड़े नजर आए। करीब डेढ़ साल बाद दोनों नेता आमने-सामने आए लेकिन तस्वीरों और हाव-भाव ने यह संकेत जरूर दिया कि पहले जैसी सहजता अब दिखाई नहीं दे रही है।
तस्वीरों से गायब दिखी पुरानी गर्मजोशी
फोटो सेशन के दौरान दोनों नेताओं के बीच वह गर्मजोशी नहीं दिखी, जिसकी कभी मोदी-ट्रंप संबंधों की पहचान हुआ करती थी। ऐसा लगा मानो दोनों ही यह देखना चाह रहे हों कि पहल कौन करता है। राजनीतिक गलियारों में इसे ऑपरेशन सिंदूर के बाद आई कूटनीतिक ठंडक से जोड़कर देखा जा रहा है। दिलचस्प दृश्य तब देखने को मिला जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रंप की बजाय सीधे मोदी की ओर बढ़कर उनका अभिवादन किया और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से मुलाकात की। इस दृश्य ने सम्मेलन में मौजूद कई नेताओं और पर्यवेक्षकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
तस्वीरों से गायब दिखी पुरानी गर्मजोशी
आखिरकार औपचारिक कार्यक्रम के दौरान मोदी ने ट्रंप से हाथ मिलाने की पहल की। हालांकि हाथ मिले, लेकिन पुराने दिनों की तरह गले मिलने वाली तस्वीर इस बार कैमरों को नहीं मिली। दोनों नेताओं के बीच कुछ मिनट की बातचीत भी हुई, जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। यही वजह है कि कूटनीतिक हलकों में अटकलों का दौर जारी है।
तस्वीरों से गायब दिखी पुरानी गर्मजोशी
मुलाकात के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान की खाड़ी में जहाज पर हुए हमले और नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया। इससे यह संकेत भी मिला कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों को लेकर अपनी चिंता प्रमुखता से रख रहा है।
रूस वाली 'खास सीट' पर मोदी
सम्मेलन में एक और दिलचस्प संदेश सीटिंग अरेंजमेंट से मिला। फ्रांस ने प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति के ठीक बगल में स्थान दिया। भारत अभी G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन यह स्थान वही माना जाता है जिसे कभी रूस के राष्ट्रपति के लिए अहम माना जाता था। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक यह चर्चा करने लगे हैं कि क्या वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत की बढ़ती भूमिका भविष्य में इस समूह के स्वरूप को बदल सकती है।
PM मोदी का ट्रंप पर सधा हुआ तंज
सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने कहा कि "आज की दुनिया में सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति न तो खनिज हैं, न तकनीक और न ही बाजार, बल्कि आपसी भरोसा है।" कूटनीतिक भाषा के जानकार इसे वैश्विक राजनीति में बढ़ते अविश्वास और विशेष रूप से ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीतियों पर एक सधा हुआ तंज मान रहे हैं।
कुल मिलाकर, G7 में मोदी और ट्रंप की यह मुलाकात भले ही कुछ मिनटों की रही हो, लेकिन तस्वीरों, सीटों और शब्दों ने इतना जरूर बता दिया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कभी-कभी खामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है।


