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New York के बाद अब UK में RSS का विरोध, मोहन भागवत ने दिया जवाब, जानिए क्या कहा
Mohan Bhagwat UK Visit: मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे के विरोध के बीच RSS ने कहा कि संगठन संवाद के लिए तैयार है। सुनील आंबेकर ने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग आवाजें होना सामान्य है।
Mohan Bhagwat UK Visit Protest: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे को लेकर विरोध के बीच संगठन ने कहा है कि वह हर तरह के संवाद के लिए तैयार है। RSS ने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार और आवाजें होना सामान्य बात है और सभी को अपनी राय रखने की आजादी होनी चाहिए।
RSS के मीडिया प्रभारी सुनील आंबेकर ने शुक्रवार को लंदन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि संगठन शांति, एकता और समरसता के लिए काम करता है और उन सभी लोगों से बातचीत करने को तैयार है, जो संवाद करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में अलग-अलग आवाजें हो सकती हैं। अलग-अलग विचार रखना बिल्कुल सामान्य है। हम संवाद के लिए यहां हैं और जो लोग बातचीत करना चाहते हैं, उनसे बातचीत कर रहे हैं।”
मोहन भागवत के UK दौरे का विरोध
मोहन भागवत 2 सितंबर से 7 सितंबर 2026 तक ब्रिटेन के दौरे पर हैं। यह उनके तीन देशों के शताब्दी आउटरीच दौरे का अंतिम चरण है। इससे पहले अमेरिका में भी उनके कार्यक्रमों को लेकर विरोध प्रदर्शन और आलोचना देखने को मिली थी।
ब्रिटेन में करीब 20 नागरिक समाज संगठनों ने लंदन के मेयर सादिक खान को पत्र लिखकर RSS से जुड़े कार्यक्रमों का समर्थन नहीं करने और प्रस्तावित कार्यक्रम की निंदा करने की अपील की है।
इन संगठनों ने मेयर से वही रुख अपनाने का आग्रह किया है, जो न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अपनाया था।
RSS बोला- ‘कुछ छिपाने को नहीं’
विरोध और आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील आंबेकर ने कहा कि RSS खुले तौर पर अपने विचार और अपनी विचारधारा लोगों के सामने रखने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, “हम यह बताने के लिए यहां हैं कि हम कौन हैं, क्या सोचते हैं और किस तरह सोचते हैं। हम पूरी तरह खुले हैं। छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।”
आंबेकर ने आगे कहा कि RSS विचारों के आदान-प्रदान और बहस की उम्मीद करता है। उन्होंने कहा, “हम बहस और विचारों के आदान-प्रदान की उम्मीद करते हैं। हम संवाद के लिए तैयार हैं। उन्हें अपनी बात कहने दीजिए।”
UK संगठनों ने RSS पर लगाए गंभीर आरोप
लंदन में RSS से जुड़े कार्यक्रम को लेकर विरोध कर रहे संगठनों ने ब्रिटेन के विदेश कार्यालय को संबोधित पत्र में मोहन भागवत की यात्रा को RSS की सार्वजनिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश बताया है।
पत्र में संगठनों ने RSS पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे एक “सत्तावादी और सैन्यवादी संगठन” बताया तथा दावा किया कि संगठन यूरोपीय फासीवाद से प्रेरित रहा है। संगठनों ने मेयर से प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए किसी सरकारी स्थल की सुविधा उपलब्ध नहीं कराने और कार्यक्रम की निंदा करने की अपील की।
इस पत्र पर हिंदूज़ फ़ॉर ह्यूमन राइट्स, यूके-इंडियन मुस्लिम काउंसिल, इंडिया लेबर सॉलिडैरिटी और साउथ एशिया सॉलिडैरिटी ग्रुप समेत कई संगठनों के हस्ताक्षर हैं।
न्यूयॉर्क में 5 हजार से ज्यादा लोगों को संबोधित कर चुके हैं भागवत
ब्रिटेन दौरे से पहले मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘Universal Oneness Celebration’ कार्यक्रम को संबोधित किया था। कार्यक्रम में 5,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की बात कही गई।
अपने संबोधन में भागवत ने एकता, विविधता और धर्म की अवधारणा पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत के संदर्भ में धर्म केवल पूजा या किसी विशेष मजहब तक सीमित नहीं है।
भागवत ने कहा था कि “धर्म वह आधार है जो सबको बनाए रखता है। धर्म, धर्म (Religion) नहीं है और न ही यह केवल पूजा है।”
उन्होंने भारत की एकता और विविधता का उल्लेख करते हुए कहा था कि “भारत के DNA में एकता और विविधता दोनों हैं।”
RSS का संदेश- विरोध के बीच संवाद का रास्ता
ब्रिटेन में विरोध के बीच RSS का यह रुख संगठन की ओर से संवाद और सार्वजनिक चर्चा पर जोर देने का संकेत माना जा रहा है। संगठन ने कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और अलग-अलग विचारों के लिए जगह होनी चाहिए और वह अपने विचारों को खुले तौर पर रखने के लिए तैयार है।


