अस्पताल पर गिरा बम…मलबे से तीसरी बार जिंदा निकले ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई!

Mojtaba Khamenei Hospital Attack: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर वरिष्ठ धर्मगुरु मोहसिन हैदरी ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल पर हमले के बाद मोजतबा को तीसरी बार मलबे से जिंदा निकाला गया था।

Aditya Kumar Verma
Published on: 27 Sept 2026 2:26 PM IST
Mojtaba Khamenei Hospital Attack
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Image Source- Social Media

Mojtaba Khamenei Hospital Attack: ईरान पर हुए भीषण अमेरिकी और इजरायली हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की कमान संभालने वाले नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को लेकर एक और सनसनीखेज दावा सामने आया है। ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य और वरिष्ठ धर्मगुरु मोहसिन हैदरी ने एक कतरी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में मोजतबा की सेहत और उनके ठिकाने को लेकर बड़ा खुलासा किया है।

मोहसिन हैदरी के मुताबिक, शुरुआती हमले में घायल होने के बाद मोजतबा को इलाज के लिए तेहरान के एक अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद उन पर हमला करने वालों को जब पता चला कि मोजतबा अस्पताल में भर्ती हैं, तो तीन अलग-अलग अस्पतालों को निशाना बनाया गया। हैदरी का दावा है कि मोजतबा तीसरे अस्पताल में मौजूद थे और वहां हुई बमबारी के बाद उन्हें मलबे के नीचे से जिंदा निकाला गया।

अस्पताल में भर्ती होने की खबर के बाद फिर हमला

मोहसिन हैदरी के अनुसार, 28 फरवरी को तेहरान में अली खामेनेई के परिसर पर हुए हमले में मोजतबा गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

हैदरी ने बताया कि जब दुश्मनों को यह जानकारी मिली कि घायल मोजतबा अस्पताल में भर्ती हैं, तो तेहरान के तीन अलग-अलग अस्पतालों पर बमबारी की गई। उनका दावा है कि मोजतबा तीसरे अस्पताल में मौजूद थे और हमले के बाद अस्पताल के मलबे से उन्हें बाहर निकाला गया।

यानी हैदरी के दावे के मुताबिक मोजतबा को शुरुआती हमले के बाद अस्पताल पहुंचाया गया और इसके बाद अस्पतालों को निशाना बनाए जाने के दौरान उन्हें दोबारा खतरे का सामना करना पड़ा। तीसरे अस्पताल पर हमले के बाद उन्हें मलबे से जिंदा निकाले जाने की बात कही गई है।

इसके बाद से कहां हैं मोजतबा?

मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर चर्चा सिर्फ इसलिए नहीं बढ़ी है कि वे हमले में घायल हुए थे, बल्कि इसलिए भी कि इसके बाद से उनकी सार्वजनिक मौजूदगी बेहद सीमित रही है।

मोहसिन हैदरी के मुताबिक, अस्पताल पर हमले के बाद मोजतबा किसी अज्ञात स्थान पर चले गए। इसके बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। इतना ही नहीं, उनकी तरफ से कोई ऑडियो या वीडियो संदेश भी जारी नहीं हुआ है।

यही वजह है कि 56 साल के नए सुप्रीम लीडर की सेहत और उनके गुप्त ठिकाने को लेकर सवाल फिर से चर्चा में आ गए हैं।

गुप्त कमरे में हुई थी वोटिंग

मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर चुने जाने की कहानी भी बेहद गोपनीय तरीके से सामने आई थी। अमेरिकी और इजरायली हमलों में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का सचिवालय भी प्रभावित हुआ था। बताया गया कि इस हमले में 8 लोगों की मौत हुई और नए सुप्रीम लीडर से जुड़ी कई गोपनीय रिपोर्टें जलकर नष्ट हो गईं।

हमले के बाद असेंबली के सदस्यों को एक गुप्त कमरे में बुलाया गया। उन्हें इस जगह के बारे में पहले से जानकारी नहीं दी गई थी। इसी कमरे में सुप्रीम लीडर के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ी। सदस्यों ने कागज की पर्चियों पर अपने वोट लिखे। मोहसिन हैदरी के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई के नाम का प्रस्ताव सबसे पहले उन्होंने ही रखा था।

59 में से 50 वोट मोजतबा के खाते में

वोटिंग के दौरान मोजतबा खामेनेई को 59 में से 50 वोट मिले। अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को 8 वोट मिले, जबकि एक सदस्य ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

इस तरह मोजतबा खामेनेई ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने। खास बात यह है कि हैदरी के मुताबिक मोजतबा को खुद भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनका नाम चुना जा रहा है।

हैदरी का दावा है कि मोजतबा को अपने सुप्रीम लीडर चुने जाने की जानकारी टीवी पर आधिकारिक ऐलान देखने के बाद हुई।

ट्रंप की चेतावनी के बीच चुने गए मोजतबा

मोजतबा खामेनेई के चुनाव के समय अमेरिका की तरफ से भी कड़ा संदेश सामने आया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अली खामेनेई के बेटे को सुप्रीम लीडर चुनने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी थी।

इसके बावजूद असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने गुप्त मतदान के जरिए मोजतबा के नाम पर मुहर लगा दी। इसके बाद से ईरान की सत्ता के सबसे ऊंचे पद पर बैठे मोजतबा की सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

मोजतबा जिंदा हैं, लेकिन सेहत कैसी है?

मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अमेरिका और ईरान की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। यही विरोधाभासी दावे अब इस पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में ला रहे हैं।

अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उनका मानना है कि मोजतबा की मौत नहीं हुई है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी दावा किया कि वे बेहद गंभीर रूप से घायल हैं और उनकी हालत बहुत खराब है।

ट्रंप के मुताबिक, मोजतबा के शरीर का बायां हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। उन्होंने खास तौर पर उनके बाएं हाथ और पैर के गंभीर रूप से प्रभावित होने की बात कही।

ईरानी राष्ट्रपति ने ट्रंप के दावे को खारिज किया

दूसरी तरफ ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने मोजतबा की गंभीर हालत से जुड़े इन दावों को खारिज किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान न्यूयॉर्क पहुंचे मसूद पेजेशकियान ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि उनकी हाल ही में मोजतबा खामेनेई के साथ करीब 7 घंटे लंबी बैठक हुई है।

पेजेशकियान के मुताबिक, मोजतबा पूरी तरह स्वस्थ हैं और शासन चलाने में सक्षम हैं। इस दावे ने अमेरिकी दावों के बिल्कुल उलट तस्वीर पेश की है।

एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति खुफिया रिपोर्टों का हवाला देकर मोजतबा के बेहद गंभीर रूप से घायल होने की बात कर रहे हैं, वहीं ईरानी राष्ट्रपति उनके पूरी तरह स्वस्थ होने और शासन चलाने में सक्षम होने का दावा कर रहे हैं।

'शैडो मैन' से सुप्रीम लीडर तक

मोजतबा खामेनेई को लंबे समय तक सार्वजनिक तौर पर कम दिखाई देने वाले नेता के तौर पर देखा जाता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सत्ता संभालने से पहले उनके पास कोई औपचारिक पद नहीं था और उन्हें अक्सर ‘शैडो मैन’ कहा जाता था।

अब वही मोजतबा ईरान के सुप्रीम लीडर हैं, लेकिन उनके सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने की वजह से उनकी सेहत और ठिकाने को लेकर सवाल बने हुए हैं।

मोहसिन हैदरी के अस्पताल और मलबे से बचाए जाने वाले दावे ने इन सवालों को एक बार फिर हवा दे दी है। उनके मुताबिक, मोजतबा शुरुआती हमले में घायल हुए, फिर अस्पताल ले जाए गए और अस्पतालों पर हमलों के बीच तीसरी बार मलबे से जिंदा निकाले गए।

हालांकि, मोजतबा की मौजूदा सेहत और उनके वास्तविक ठिकाने को लेकर सामने आए दावों में स्पष्ट अंतर है। यही वजह है कि नए सुप्रीम लीडर की लंबे समय से चली आ रही सार्वजनिक अनुपस्थिति अब ईरान के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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