क्या डर रहे हैं ईरान के सुप्रीम लीडर? पिता Ayatollah Ali Khamenei के Funeral में भी नहीं आएंगे नजर, जानें वजह

Ayatollah Ali Khamenei Funeral: अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में लाखों लोगों के जुटने की तैयारी है, लेकिन सुरक्षा कारणों से नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आएंगे। भारत में उनके प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने इसका बड़ा खुलासा किया है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 2 July 2026 8:38 PM IST (Updated on: 2 July 2026 8:38 PM IST)
Ayatollah Ali Khamenei Funeral
X

Image Source- Ai

Ayatollah Ali Khamenei Funeral: तेहरान (Tehran) की व्यस्त सड़कों से लेकर मशहद (Mashhad) और क़ोम (Qom) के पवित्र दरगाहों तक, तबरेज (Tabriz) के बाजारों से लेकर इस्फ़हान (Isfahan) की ऐतिहासिक गलियों और शिराज (Shiraz) के खूबसूरत बागों तक पूरे ईरान (Iran) में शोक का माहौल है। पूरा देश उस शख्स को अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहा है, जिसे करोड़ों लोग केवल एक राजनीतिक नेता नहीं बल्कि अपनी पीढ़ी की आध्यात्मिक पहचान मानते थे।

अमेरिका (America) और इजरायल (Israel) के हमले में जान गंवाने वाले ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) का अंतिम संस्कार (Funeral Ceremony) 4 जुलाई से शुरू होगा। उनका अंतिम संस्कार 9 जुलाई को मशहद में किया जाएगा।

नहीं दिखेंगे मोजतबा खामेनेई

अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में लाखों-करोड़ों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी चर्चा यह है कि ईरान के मौजूदा सर्वोच्च धार्मिक नेता और अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आएंगे।

बताया जा रहा है कि ऐसा सुरक्षा चिंताओं (Security Concerns) की वजह से किया जा रहा है। इस मामले में भारत में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि (Representative) अयातुल्ला हकीम इलाही (Ayatollah Hakim Elahi) ने आजतक से बातचीत में इसकी पुष्टि की है।

उन्होंने कहा कि नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने आना चाहते हैं और जनाजे के दौरान सबसे आगे रहकर लोगों का नेतृत्व करना चाहते हैं, लेकिन ईरान की सुरक्षा एजेंसियों (Security Agencies) ने उन्हें बाहर आने की अनुमति नहीं दी है।

सुरक्षा एजेंसियों ने क्या बताया?

अयातुल्ला हकीम इलाही ने कहा कि ईरानी सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मौजूदा हालात में मोजतबा खामेनेई का सार्वजनिक रूप से सामने आना काफी खतरनाक हो सकता है। ऐसे माहौल में उन्हें पर्याप्त सुरक्षा देना संभव नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता के जनाजे में सार्वजनिक रूप से शामिल नहीं होंगे।

हकीम इलाही के मुताबिक अयातुल्ला अली खामेनेई ने किसी विशेष व्यक्ति को अपने जनाजे की नमाज (Funeral Prayer) पढ़ाने के लिए नामित नहीं किया था। उन्होंने कहा कि यदि हालात सामान्य होते तो नए सुप्रीम लीडर ही पूरे कार्यक्रम की अगुवाई करते।

उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा समय में तकनीक (Technology) काफी उन्नत हो चुकी है और किसी भी व्यक्ति की गतिविधियों को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। ऐसे में मोजतबा खामेनेई के लिए सार्वजनिक रूप से सामने आना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। इसी कारण वे जनाजे के दौरान बाहर नहीं आएंगे।

इजरायल के दावे ने बढ़ाई सुरक्षा चिंताएं

इस बीच इजरायल ने दावा किया है कि मोजतबा खामेनेई अभी भी उसकी हिटलिस्ट (Hit List) में शामिल हैं। ऐसे दावों के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है।

तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे से पहले शहर के कई हिस्सों में उनकी तस्वीरें लगाई गई हैं और अंतिम विदाई की तैयारियां तेजी से जारी हैं।

हकीम इलाही भी होंगे कार्यक्रम में शामिल

भारत में मोजतबा खामेनेई के प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने कहा कि इस संघर्ष में ईरान विजयी होकर निकला है। उन्होंने कहा कि जो लोग सत्य और ईमान (Faith) के साथ खड़े हैं, वे इस कार्यक्रम का समर्थन कर रहे हैं।

हकीम इलाही स्वयं भी इस राजकीय कार्यक्रम (State Ceremony) में शामिल होने के लिए तेहरान रवाना हो रहे हैं। उनके अनुसार, खामेनेई की अंतिम विदाई केवल एक धार्मिक रस्म नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा ऐतिहासिक अवसर है।

Aditya Kumar Verma
ABOUT THE AUTHOR

Aditya Kumar Verma

Content Writer Mail ID - adityakumarverma993@gmail.comadityakumarverma993@gmail.com

आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

Next Story