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नेपाल में सैलाब से 108 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा क्यों जाती है इतनी खतरनाक?
Nepal Flash Flood: नेपाल फ्लैश फ्लड में 108 भारतीयों के लापता होने की खबर है। जानिए कैलाश मानसरोवर यात्रा, इसके धार्मिक महत्व, रास्तों और कठिनाइयों के बारे में।
Nepal Flash Flood: नेपाल में बुधवार सुबह आई भीषण फ्लैश फ्लड ने हिमालयी सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के तेज बहाव ने गांवों और निर्माण परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में कम से कम 22 लोगों की मौत हुई है, जबकि 400 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। Nepal Tourism Board की प्रारंभिक सूची में 384 यात्री लापता बताए गए, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली हैं; इनमें 105 भारतीय और 37 NRI शामिल हैं। कुछ रेपोर्ट्स में 108 भारतीयों के लापता होने की बात भी कही गई है।
बताया जा रहा है कि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ गया। नदी में आया तेज बहाव कथित तौर पर तिब्बत की दिशा से आया और नेपाल के रसुवा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही मचा गया।
इस साल 1,000 भारतीय तीर्थयात्रियों का हुआ था चयन
इस साल विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 1,000 भारतीय तीर्थयात्रियों का चयन किया था। इन्हें 50-50 तीर्थयात्रियों के 20 समूहों में बांटा गया था।
सरकार की ओर से आयोजित यह यात्रा दो मार्गों से हुई थी:
- लिपुलेख पास, उत्तराखंड
- नाथू ला, सिक्किम
आधिकारिक यात्रा के तहत कुल 941 तीर्थयात्रियों ने यात्रा पूरी की। इनमें 464 श्रद्धालु नाथू ला मार्ग से और 477 लिपुलेख मार्ग से कैलाश मानसरोवर पहुंचे।
लेकिन नेपाल के रास्ते भी जाते हैं हजारों श्रद्धालु
कैलाश मानसरोवर जाने वाले भारतीयों की संख्या सिर्फ विदेश मंत्रालय की आधिकारिक यात्रा तक सीमित नहीं है। कई निजी टूर ऑपरेटर भी नेपाल के रास्ते भारतीय श्रद्धालुओं को कैलाश मानसरोवर ले जाते हैं। ऐसे में काठमांडू इस धार्मिक यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन जाता है।
जून में विदेश मंत्रालय ने एक एडवाइजरी भी जारी की थी। उस समय 52 भारतीय तीर्थयात्री काठमांडू में फंस गए थे, क्योंकि उनके पास चीन में प्रवेश के लिए जरूरी वीजा और परमिट नहीं थे।
आखिर कैलाश मानसरोवर के लिए क्यों उमड़ते हैं भारतीय?
तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत हिंदू धर्म में भगवान शिव का निवास माना जाता है। इसके पास स्थित मानसरोवर झील भी हिंदुओं के लिए अत्यंत पवित्र है। भारत सरकार के आधिकारिक कैलाश मानसरोवर यात्रा पोर्टल के अनुसार, इस यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद गहरा है।
मान्यता है कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी करने और मानसरोवर में पवित्र स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सिर्फ हिंदू धर्म ही नहीं, कई परंपराओं में पवित्र है कैलाश
कैलाश पर्वत का महत्व केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है। बौद्ध धर्म में इसे मेरु पर्वत से जोड़ा जाता है। जैन धर्म में भी इसका विशेष धार्मिक महत्व है और माना जाता है कि प्रथम तीर्थंकर ने यहीं मोक्ष प्राप्त किया था। वहीं बोन धर्म के अनुयायी कैलाश को ब्रह्मांड का आध्यात्मिक केंद्र मानते हैं।
यही वजह है कि कैलाश पर्वत और मानसरोवर कई धार्मिक परंपराओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र हैं।
6,638 मीटर ऊंचा कैलाश, आसान नहीं है यात्रा
कैलाश मानसरोवर की यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ शारीरिक क्षमता की भी बड़ी परीक्षा है। माउंट कैलाश की ऊंचाई करीब 6,638 मीटर है, जबकि मानसरोवर झील लगभग 4,590 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
अत्यधिक ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी, खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। यही कारण है कि तीर्थयात्रियों के लिए अक्लाइमेटाइजेशन और मेडिकल स्क्रीनिंग बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कई श्रद्धालुओं के लिए यात्रा की यही कठिनाइयां इसकी आध्यात्मिकता का हिस्सा हैं। कठिन पहाड़ी रास्तों और विपरीत मौसम के बीच कैलाश-मानसरोवर तक पहुंचना उनके लिए केवल एक सफर नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या और आध्यात्मिक मुक्ति की तलाश माना जाता है।


