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Nepal Flash Floods: मौतों का आंकड़ा 939 पहुंचा, 3,925 लोग अब भी लापता; चीन ने हाइड्रोपावर आरोपों को बताया ‘दुर्भावनापूर्ण’
नेपाल फ्लैश फ्लड में मौतों का आंकड़ा 939 पहुंच गया है और 3,925 लोग लापता हैं। 590 विदेशी नागरिकों का भी सुराग नहीं। चीन ने तिब्बत के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े आरोपों को खारिज किया।
Nepal Flash Floods: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद छठे दिन भी राहत और बचाव अभियान जारी है। नेपाल की आपदा प्राधिकरण के मुताबिक, देश में अब तक 939 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,925 लोग अभी भी लापता हैं। दूसरी ओर, चीन के तिब्बत क्षेत्र में 16 मौतों और 546 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है। इस तरह नेपाल और चीन को मिलाकर मृतकों की संख्या 955 और लापता लोगों की संख्या 4,471 हो गई है।
590 विदेशी नागरिक अब भी लापता
नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बाढ़ के बाद 39 देशों के करीब 590 विदेशी नागरिक लापता हैं। अब तक 323 विदेशी नागरिकों समेत 10 हजार से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है। मंत्रालय ने कहा है कि लापता लोगों के आंकड़े अलग-अलग एजेंसियों से मिलने वाली सत्यापित जानकारी के आधार पर लगातार अपडेट किए जा रहे हैं।
नेपाल की लापता लोगों की सूची में 592 विदेशी नागरिकों का उल्लेख भी किया गया है, हालांकि विदेश मंत्रालय की सोमवार की ब्रीफिंग में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर करीब 590 विदेशी नागरिकों के लापता होने की बात कही गई। आंकड़ों में यह अंतर इसलिए है क्योंकि विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं का सत्यापन लगातार चल रहा है।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे लोगों पर फोकस
बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना है। पहले करीब 933 श्रमिकों के सुरंगों में फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। सोमवार को ऐसे लापता हाइड्रोपावर कर्मचारियों की संख्या 639 बताई गई। बचाव दल मलबा हटाने, खुदाई और नियंत्रित विस्फोटों की मदद से सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल के रासुवा और नुवाकोट जिले इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। भारत, चीन और अन्य देशों की विशेषज्ञ टीमें भी बचाव अभियान में सहायता कर रही हैं।
चीन ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर लगे आरोप खारिज किए
इस बीच चीन ने नेपाल में आई बाढ़ को तिब्बत में उसके बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जोड़ने वाली रिपोर्टों और आरोपों को खारिज कर दिया है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को कहा कि इस तरह के दावे “दुर्भावनापूर्ण अटकलें” हैं। चीन के मुताबिक, विशेषज्ञों और नेपाल-चीन के आधिकारिक संस्थानों के आकलन में इस आपदा का कारण नेपाल में ऊंचाई वाले क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने से हुआ मलबा और भूस्खलन बताया गया है।
बाढ़ को लेकर सामने आए दावों में कहा गया था कि तिब्बत में बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स ने आपदा की भयावहता को प्रभावित किया हो सकता है। चीन ने इन आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है।
ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ ने भोटे कोशी और आसपास की नदियों में भारी तबाही मचाई। शुरुआती आकलनों के अनुसार, ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर या बर्फ-चट्टान के बड़े हिस्से के टूटने से अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर आया।
इसने रास्ते में आने वाले घरों, पुलों, सड़कों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। हिमालयी क्षेत्र में बदलती जलवायु, ग्लेशियरों के अस्थिर होने और पहाड़ी बुनियादी ढांचे की संवेदनशीलता ने इस आपदा को और गंभीर बना दिया है।
पहचान मुश्किल, कई शव सामूहिक कब्रों में दफन
आपदा के बाद शवों की पहचान करना बड़ी चुनौती बन गया है। नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय ने बताया कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी, जिनके शरीर लंबे समय तक पानी में रहने के कारण क्षत-विक्षत या पहचान से परे हो गए थे, उन्हें निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया है।
नेपाल के देवघाट में बाढ़ पीड़ितों के लिए सामूहिक दफन की प्रक्रिया भी शुरू हुई है।
भारत में भी मिले शव, पहचान का इंतजार
बाढ़ का असर नेपाल से निकलकर भारत के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचा है। उत्तर प्रदेश में नदियों से 17 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। भारतीय अधिकारी इन शवों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। ये शव नेपाल में मृतकों के आधिकारिक आंकड़े में शामिल नहीं हैं।
बलिया के तीन लोग लापता
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के तीन लोग भी नेपाल त्रासदी के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। इनमें एक महिला और उसका बेटा भी शामिल हैं।
बलिया के बांसडीह तहसील क्षेत्र के बिऊर गांव की प्रियंका ने सरकार से अपने पति गोविंद कुमार भारती को तलाशने में मदद की अपील की है। प्रियंका के मुताबिक, उनकी शादी सिर्फ चार महीने पहले हुई थी और उन्होंने 26 अगस्त को आखिरी बार गोविंद से बात की थी। गोविंद ने 15 सितंबर को घर लौटने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद संपर्क नहीं हो सका।
रेस्क्यू ऑपरेशन का छठा दिन, चुनौती बढ़ी
नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार छठे दिन जारी है। मलबे से ढकी सड़कें, ध्वस्त पुल, बंद सुरंगें और खराब मौसम बचाव टीमों के लिए बड़ी बाधा बने हुए हैं।
नेपाल सरकार ने ड्रोन, भारी ड्रिलिंग मशीन, शवों को सुरक्षित रखने के लिए रेफ्रिजरेटेड यूनिट और अन्य विशेष उपकरणों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है।
नेपाल की यह त्रासदी अब सिर्फ एक बाढ़ आपदा नहीं रह गई है। इसके साथ हिमालयी ग्लेशियरों, तेजी से बढ़ते हाइड्रोपावर निर्माण, सीमा-पार आपदा प्रबंधन और हजारों लापता लोगों की तलाश को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


