नेपाल में 600 के करीब पहुंचा मौतों का आंकड़ा, 2500 लोग लापता…अब मंडराने लगा एक और बाढ़ का खतरा!

Nepal Flood Death: नेपाल में भीषण बाढ़ से 587 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 2,500 लोग लापता हैं। 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में बनी अस्थायी झील से एक और बाढ़ का खतरा बना हुआ है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 29 Aug 2026 8:08 AM IST
Nepal Flood Death
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Nepal Flood Death: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने तबाही का आंकड़ा 600 के करीब पहुंचा दिया है। अब तक 587 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस कुदरती आफत की चपेट में बड़ी संख्या में भारतीय भी आए हैं। करीब 320 भारतीयों और भारतीय मूल के 100 लोगों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। हालांकि राहत की बात यह है कि तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित बताए गए हैं। पहाड़ी इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

इस बीच एक और चिंता ने नेपाल के प्रशासन और राहत एजेंसियों की मुश्किल बढ़ा दी है। भोटेकोशी नदी (भोटेकोशी रिवर) के ऊपरी हिस्से में पानी जमा होने से बनी अस्थायी झील पर लगातार नजर रखी जा रही है। आशंका है कि अगर इस झील की कुदरती रुकावट टूटी तो नीचे के इलाकों में एक बार फिर अचानक बाढ़ आ सकती है। हालांकि शनिवार सुबह 6:30 बजे तक भोटेकोशी और त्रिशूली नदी (त्रिशूली रिवर) में पानी का बहाव सामान्य बताया गया है।

ग्लेशियर टूटने के बाद शुरू हुई तबाही

इस भयावह बाढ़ की शुरुआत पहाड़ों के ऊंचाई वाले इलाके से हुई। शुरुआती जांच के मुताबिक, एक ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ, चट्टान और भारी मात्रा में मलबा नीचे की ओर आ गिरा। यह मलबा लेंडे नदी (लेंडे रिवर) में गिर गया, जिससे कुछ समय के लिए पानी का रास्ता रुक गया।

इसके बाद जब पानी के रास्ते में बनी यह कुदरती रुकावट टूटी तो तेज बहाव के साथ मिट्टी, पत्थर और मलबा नीचे की ओर आ गया। पानी के इस खतरनाक सैलाब की चपेट में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाके आ गए। कई बस्तियां तबाह हो गईं, सड़कें और पुल बह गए और बिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा।

90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

बाढ़ के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को ढूंढने की है। पहाड़ी इलाकों में कई सड़कें और पुल बह जाने के कारण राहत और बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी मुश्किल हो रही है।

नेपाल रेड क्रॉस (नेपाल रेड क्रॉस) के मुताबिक, इस आपदा से 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। कई गांवों का संपर्क टूट चुका है और ऐसे इलाकों तक राशन, दवाएं और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है।

हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर भी भारी असर

बाढ़ का असर जलविद्युत परियोजनाओं पर भी पड़ा है। 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स (हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स) से जुड़े करीब 933 कर्मचारी लापता बताए गए थे, जिनमें से 254 लोगों को बचा लिया गया है। हालांकि कई अन्य लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका बनी हुई है।

अकेले अपर त्रिशूली-1 परियोजना (अपर त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट) से 576 कर्मचारियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। ऐसे में राहत और बचाव टीमों के सामने मलबे के बीच लापता लोगों को तलाशने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

नदी के रास्ते में बनी झील ने बढ़ाई नई चिंता

पहली बाढ़ की तबाही के बाद अब नदी के ऊपरी हिस्से में बनी अस्थायी झील को लेकर चिंता बढ़ गई है। मलबे के कारण नदी का रास्ता रुक गया है, जिसकी वजह से वहां लगातार पानी जमा हो रहा है। इस झील की स्थिति पर सैटेलाइट तस्वीरों (सैटेलाइट इमेजेज) के जरिए भी नजर रखी जा रही है।

चीनी अधिकारियों के मुताबिक, इस अस्थायी झील में करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है। अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी आने का अनुमान है। अगर पानी का दबाव बढ़ा और मलबे से बनी यह कुदरती रुकावट टूट गई तो नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

सुबह 6:30 बजे तक क्या रही स्थिति?

ताजा जानकारी के मुताबिक, शनिवार सुबह 6:30 बजे तक रसुवा की भोटेकोशी और नुवाकोट से होकर बहने वाली त्रिशूली नदी में पानी का बहाव सामान्य रहा। बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा (फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन) के मुताबिक, दोनों नदियों के जलस्तर में फिलहाल कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है।

बाढ़ पूर्वानुमान शाखा के जल वैज्ञानिक प्रभाकर यादव के अनुसार, पानी का स्तर तेजी से बढ़ता हुआ नहीं दिखा है। हालांकि तिब्बत में उस जगह की मौजूदा स्थिति को लेकर अभी कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मिली है, जहां से पिछली बाढ़ का संकट शुरू हुआ था।

पानी सामान्य, फिर भी क्यों बना हुआ है खतरा?

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी) के मुताबिक, नदी के रास्ते में बनी अस्थायी झील के कारण खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इस समय भोटेकोशी और त्रिशूली नदी का पानी सामान्य जरूर है, लेकिन ऊपरी हिस्से में जमा पानी और मलबे की स्थिति लगातार चिंता का कारण बनी हुई है।

यही वजह है कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों, वहां से गुजरने वाले मुसाफिरों और राहत-बचाव दलों को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा गया है। सबसे ज्यादा नजर उस अस्थायी झील पर बनी हुई है, जिसके टूटने की स्थिति में नीचे के इलाकों में अचानक एक और बाढ़ आ सकती है।

नेपाल ही नहीं, तिब्बत में भी मची तबाही

इस कुदरती आफत की मार सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रही। सीमा पार चीन के तिब्बत इलाके में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। ग्यिरोंग काउंटी (ग्यिरोंग काउंटी) में आई बाढ़ में 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 558 लोग लापता बताए गए हैं।

लापता लोगों में 260 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। तेज पानी ने गांवों, बिजलीघरों, सड़कों, पुलों और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। इस आपदा का असर काठमांडू और ल्हासा के बीच आने-जाने वाले रास्ते पर भी पड़ा है।

320 भारतीयों से अब तक नहीं हो पाया संपर्क

संकट के बीच भारत के विदेश मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स) की तरफ से भी अहम जानकारी सामने आई है। ताजा अपडेट के मुताबिक, करीब 320 भारतीयों और भारतीय मूल के 100 लोगों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है।

इनमें करीब 100 लोग त्रिशूली जलविद्युत परियोजना (त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट) में फंसे हुए हैं। हालांकि राहत की खबर यह है कि तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं। वहीं सीमा के पास फंसे 96 भारतीय नेपाल पहुंच चुके हैं। भारत ने नेपाल की मदद के लिए राहत सामग्री की दो खेप भी भेजी हैं।

36 से ज्यादा पुल बहने से कई गांवों का संपर्क टूटा

इस बाढ़ में 36 से ज्यादा पुल बह जाने से कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। इसकी वजह से प्रभावित लोगों तक राशन, दवाएं और दूसरी जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।

रास्तों को जल्द से जल्द फिर से जोड़ने के लिए नेपाल ने भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज (बेली ब्रिज) बनाने में मदद मांगी है। राहत और बचाव अभियान में सेना के 2,391 जवानों समेत कुल 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं। टीमें लगातार मलबे में दबे और लापता लोगों की तलाश कर रही हैं।

इसी बीच भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में बनी अस्थायी झील की भी लगातार निगरानी की जा रही है। क्योंकि अगर यह झील टूटी तो नीचे की ओर बहने वाला पानी एक बार फिर बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकता है।

587 मौतें, 2,500 लापता और एक नई बाढ़ का डर

नेपाल बाढ़ (नेपाल फ्लड) में अब तक 587 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 2,500 लोग अभी भी लापता हैं। 90 हजार से ज्यादा लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। कई सड़कें, पुल, बस्तियां और बिजली परियोजनाएं तबाह हो चुकी हैं।

फिलहाल भोटेकोशी और त्रिशूली नदी का बहाव सामान्य बताया गया है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। सबसे बड़ी चिंता नदी के ऊपरी हिस्से में बनी उस अस्थायी झील को लेकर है, जिसमें लगातार पानी जमा हो रहा है। अगर पानी का दबाव बढ़ने के बाद मलबे की कुदरती दीवार टूटती है तो नीचे के इलाकों में अचानक फिर से बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

इस भयावह आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं हैं। साथ ही हजारों लापता लोगों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद बनी हुई है। कठिन हालात के बीच राहत और बचाव अभियान में जुटी सभी टीमों की सुरक्षा और सफलता की कामना की जा रही है।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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