475 से ज्यादा मौतें, मुर्दाघर फुल…नेपाल में अब शव रखने के लिए बनाए जा रहे अस्थायी केंद्र

Nepal Flood Horror: नेपाल में भोटेकोशी की विनाशकारी बाढ़ के बाद 475 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लगातार शव मिलने से कई जिलों के मुर्दाघरों में जगह खत्म हो गई है। चितवन और पोखरा में अस्थायी मुर्दाघर बनाए जा रहे हैं, जबकि त्रिशूली में फिर बाढ़ का अलर्ट जारी हुआ है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 28 Aug 2026 3:34 PM IST
Nepal Flood Horror | Morgues Run Out of Space as 475+ Bodies Recovered
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Image Source- Social Media

Nepal Flood Horror: नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ (Nepal Flood) के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के शव अब भी अलग-अलग इलाकों से बरामद हो रहे हैं। हालात यह हो गए हैं कि नेपाल के कई जिलों के मुर्दाघरों (Morgues) में शव रखने की जगह तक खत्म होने लगी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक बाढ़ में कम से कम 475 लोगों की मौत हो चुकी है। रसुवा और नुवाकोट से बाढ़ के पानी में बहकर नीचे पहुंचे शव चितवन, तनहुं, गोरखा और नवलपरासी तक बरामद हो रहे हैं। लगातार मिल रहे शवों को रखने के लिए प्रशासन को अब अस्थायी भंडारण केंद्र (Temporary Body Storage) तैयार करने पड़ रहे हैं।

कई जिलों के मुर्दाघरों में नहीं बची जगह

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां नुवाकोट, धादिंग और नवलपरासी के मुर्दाघरों में क्षमता खत्म होने के बाद प्रशासन ने शवों को आसपास के दूसरे जिलों में भेजना शुरू कर दिया है। इनमें पोखरा भी शामिल है।

पोखरा के अस्पतालों में भी अब शवों की संख्या बढ़ती जा रही है। बाढ़ प्रभावित कई इलाकों से शव यहां पहुंचने के बाद अस्पतालों के मुर्दाघर भी अपनी क्षमता के करीब पहुंच गए हैं।

चितवन में बनाया जा रहा अस्थायी मुर्दाघर

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चितवन में स्थानीय अस्पतालों के मुर्दाघरों में शव रखने की जगह कम पड़ने के बाद भारतपुर में एक खाली पड़ी इमारत को अस्थायी शव भंडारण केंद्र (Temporary Morgue) में बदला जा रहा है।

चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश आर्याल के मुताबिक, जिले के अस्पतालों के मुर्दाघरों में एक समय में कुल मिलाकर सिर्फ 30 से 50 शव रखे जा सकते हैं। इसके मुकाबले अब बरामद हो रहे शवों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

अस्थायी केंद्र में करीब 250 शव रखने की क्षमता होगी। अगर यह क्षमता भी पूरी हो जाती है तो प्रशासन ने देवघाट स्थित विद्युत शवदाह गृह (Electric Crematorium) को अतिरिक्त विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने का फैसला किया है।

भरतपुर महानगरपालिका इस सुविधा की मरम्मत और जरूरी व्यवस्था करेगी। इसमें एयर कंडीशनर लगाए जाएंगे और शवों के जल्दी खराब होने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए सूखी बर्फ यानी ड्राई आइस (Dry Ice) का इस्तेमाल किया जाएगा।

2 से 6 डिग्री तापमान में रखे जा रहे शव

पोखरा अकादमी ऑफ हेल्थ साइंसेज के सूचना अधिकारी सुशील आर्याल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि शवों को 2 से 6 डिग्री सेल्सियस के तापमान में रखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस तरह शवों को करीब 10 दिन से दो सप्ताह तक रखा जा सकता है। अगर इससे ज्यादा समय तक शवों को सुरक्षित रखना हो तो शून्य से नीचे तापमान बनाए रखने वाली व्यवस्था की जरूरत होगी। फिलहाल पोखरा में ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है।

सुशील आर्याल के मुताबिक अस्पताल के पास पर्याप्त बॉडी बैग (Body Bags), सुरक्षा उपकरण और पोस्टमार्टम (Post-Mortem) करने के लिए कर्मचारी मौजूद हैं। लेकिन लगातार ऐसे शव बरामद हो रहे हैं जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। ऐसे में आने वाले समय में स्थिति और मुश्किल हो सकती है।

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पोखरा में भी क्षमता से ज्यादा शव

जिन जिलों में पर्याप्त जगह नहीं है, वहां से शवों को पोखरा भेजे जाने के कारण यहां के मुर्दाघरों पर भी दबाव बढ़ गया है। अब तक तनहुं, गोरखा, पूर्वी नवलपरासी और धादिंग से कुल 93 शव पोखरा लाए जा चुके हैं।

कास्की के मुख्य जिला अधिकारी कुमान सिंह गुरंग के मुताबिक, जिले के अस्पतालों में कुल मिलाकर 88 शव रखने की क्षमता है। पोखरा अकादमी ऑफ हेल्थ साइंसेज में अकेले 72 शव रखने की क्षमता है।

उन्होंने कहा कि संख्या के हिसाब से क्षमता पहले ही पार हो चुकी है। फिलहाल शवों को किसी तरह रखा गया है। अगर और शव पहुंचते हैं तो आसपास के जिलों के साथ समन्वय करना पड़ेगा।

कावासोती में एक सामुदायिक वन भवन को भी अस्थायी मुर्दाघर (Temporary Morgue) में बदल दिया गया है। शवों को सुरक्षित रखने के लिए वहां एक अतिरिक्त एयर कंडीशनर भी लगाया गया है।

शवों की पहचान के लिए QR कोड और टैग नंबर

बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव ऐसे हैं जिनकी अभी पहचान नहीं हो पाई है। ऐसे में प्रशासन ने शवों की पहचान और उन्हें बाद में उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए नई व्यवस्था शुरू की है।

पुलिस शवों की तस्वीरें ले रही है। इसके अलावा फिंगरप्रिंट (Fingerprints) और डीएनए सैंपल (DNA Samples) भी लिए जा रहे हैं। शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है।

जिन शवों की पहचान चेहरे से हो सकती है, उनकी तस्वीरें भी जारी की जा रही हैं ताकि परिवार अपने लापता परिजनों की पहचान कर सकें।

कास्की पुलिस के प्रमुख पुलिस अधीक्षक नवीन कार्की ने कहा कि अगर परिजनों का पता नहीं चलता या शव की पहचान नहीं हो पाती तो उसे हमेशा के लिए सुरक्षित रख पाना संभव नहीं है। इसी वजह से पहले ही फिंगरप्रिंट और डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं।

लावारिस शवों के लिए तय होंगे सुरक्षित दफन स्थल

प्रशासन स्थानीय सरकारों के साथ मिलकर ऐसे शवों के लिए सुरक्षित दफन स्थलों (Burial Sites) की पहचान कर रहा है, जिन पर किसी का दावा नहीं होगा।

हर शव को एक अलग टैग नंबर (Body Tag Number) दिया जाएगा। इसके बाद शव को कहां दफनाया गया, इसकी पूरी जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज की जाएगी। डीएनए सैंपल जांच के लिए काठमांडू भेजे जाएंगे।

इसके साथ ही परिवारों के लिए शवों की पहचान आसान बनाने के लिए क्यूआर कोड सिस्टम (QR Code System) भी शुरू किया गया है।

फिर जारी हुआ बाढ़ का अलर्ट

वहीं यहां नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को एक बार फिर बाढ़ की चेतावनी (Flood Warning) जारी की। पानी का स्तर बढ़ने की आशंका के बाद त्रिशूली इलाके से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव अभियान के साथ सड़क निर्माण का काम भी रोक दिया गया। ऑपरेशन में इस्तेमाल हो रहे वाहनों और कर्मचारियों को सुरक्षित जगहों पर भेजा गया।

नेपाल पुलिस के अधिकारी पी चौधरी ने बताया कि पानी का स्तर बढ़ने वाला है, इसलिए सभी को रोका जा रहा है। अभियान में लगे वाहन वापस लौट रहे हैं और सभी लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी काम रोक दिए गए हैं और इससे भी ज्यादा बाढ़ आने की आशंका है, इसलिए सभी को अलर्ट किया गया है।

चीन में 5.1 तीव्रता के भूकंप के बाद बढ़ी चिंता

बाढ़ के इस नए अलर्ट के बीच दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन में 5.1 तीव्रता का भूकंप (Earthquake) भी आया। इसके बाद नेपाल पुलिस ने बताया कि उसे तिब्बत की तरफ एक बांध के दोबारा टूटने की जानकारी मिली है।

इसके बाद सुरक्षा बलों, बचाव कर्मियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। संवेदनशील इलाकों में मौजूद लोगों को तत्काल सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

हाइड्रोपावर टनल में फंसे मजदूरों का रेस्क्यू

नेपाल में बाढ़ के बाद रसुवा स्थित एक हाइड्रोपावर परियोजना (Hydropower Project) में भी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बाढ़ के बाद कई मजदूर परियोजना की टनल के अंदर फंस गए थे।

नेपाली सेना ने अब तक दो मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला है। टनल में फंसे बाकी लोगों को बाहर निकालने के लिए भी सेना का अभियान जारी है।

इसी बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने शुक्रवार को सिंह दरबार में कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) की अध्यक्षता की। बैठक में सरकार ने बाढ़ और आपदा के बाद राहत एवं बचाव अभियान की स्थिति की समीक्षा की।

नेपाल में बाढ़ की तबाही के तीन दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान के सामने बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। एक तरफ लगातार शव बरामद होने से मुर्दाघरों में जगह की कमी हो रही है, तो दूसरी तरफ फिर से बाढ़ का खतरा सामने आने के कारण प्रशासन को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ बचाव अभियान भी रोकना पड़ रहा है।

Aditya Kumar Verma
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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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