10 दिनों तक मलबे में दबी बुजुर्ग महिला निकली जिंदा...नेपाल त्रासदी के बीच बड़ा करिश्मा! परिजनों ने कर दिया था अंतिम संस्कार

Nepal Flood Survivor Chandika Shrestha: नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में 10 दिनों तक मलबे में दबी 64 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठा जिंदा मिलीं। परिजनों ने मृत समझकर अंतिम संस्कार तक कर दिया था, तभी मलबे से आई आवाज ने बचाव दल को चौंका दिया।

Harsh Srivastava
Published on: 6 Sept 2026 2:26 PM IST (Updated on: 6 Sept 2026 2:26 PM IST)
10 दिनों तक मलबे में दबी बुजुर्ग महिला निकली जिंदा...नेपाल त्रासदी के बीच बड़ा करिश्मा! परिजनों ने कर दिया था अंतिम संस्कार
X

Nepal Flood Survivor Chandika Shrestha: पड़ोसी देश नेपाल में कुदरत के ढाए भीषण प्रकोप और विनाशकारी जलप्रलय के बीच एक ऐसी हैरतअंगेज घटना सामने आई है, जिसने तबाही के इस खौफनाक मंजर में भी उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में जहां बारह सौ से ज्यादा मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा चुकी हैं और हजारों बेबस लोग अब भी लापता हैं, वहीं नुवाकोट क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है। यहां पिछले 10 दिनों से मलबे के भारी ढेर में दबी 64 वर्षीय बुजुर्ग महिला चंडिका श्रेष्ठा को सुरक्षित और जिंदा बाहर निकाल लिया गया है।

परिजनों ने मृत समझकर कर दी थी अंतिम रस्में

काठमांडू पोस्ट के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक 26 अगस्त को जब भोटेकोशी नदी में आए भयंकर उफान और सैलाब ने बेत्रावती इलाके को अपनी चपेट में लिया, तो चंडिका अपने परिवार के साथ लापता हो गई थीं। 10 दिनों तक कोई सुराग न मिलने पर उनके रिश्तेदारों ने उनके जीवित होने की आस पूरी तरह छोड़ दी थी।

घरवालों को पूरा यकीन हो चला था कि वे अब इस दुनिया में नहीं रहीं। यही वजह थी कि सनातन परंपरा के अनुसार परिवारजनों ने आठवें दिन कुश की घास से उनका सांकेतिक पुतला बनाकर उनका अंतिम संस्कार तक संपन्न करा दिया था। लेकिन किसी को क्या मालूम था कि मौत को मात देकर चंडिका अब भी सांसें ले रही हैं।

मलबे से आई हल्की रोने की आवाज

तबाही के 11वें दिन इस हैरतअंगेज रेस्क्यू का मंजर तब सामने आया जब नेपाल पुलिस की एक टुकड़ी प्रभावित इलाके में मार्ग बहाल करने के काम में जुटी हुई थी। इसी दौरान मलबे में तब्दील हो चुके एक मकान के अवशेषों के पास से जवानों को किसी के सिसकने और रोने की हल्की भनक पड़ी।

संदेह होते ही बचाव दल ने तुरंत अपने हाथों से कीचड़ और मलबा हटाना शुरू कर दिया। जवानों ने सूझबूझ दिखाते हुए खिड़की के शीशे तोड़े और अंदर दाखिल हुए, जहां चंडिका बेहद कमजोर हालत में मौजूद थीं। सैलाब के प्रचंड वेग ने चार मंजिला इमारत को 100 मीटर दूर खिसका दिया था, जिसका अधिकांश हिस्सा दलदल में धंस चुका था।

सुरंग में फंसे दो मजदूर भी निकले सुरक्षित

रेस्क्यू के तुरंत बाद पीड़ित बुजुर्ग महिला को काठमांडू के बीरेंद्र अस्पताल में प्राथमिक उपचार और देखभाल के लिए भर्ती कराया गया है। परिजनों के अनुसार जब उन्हें अस्पताल से चंडिका के जिंदा होने का फोन आया तो उन्हें अपनी कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ।

इस घटना से ठीक एक दिन पहले अपर त्रिशूली 3ए परियोजना की 170 मीटर गहरी जलमग्न सुरंग से भी दो श्रमिकों, संजय शाह और कबीर महारजन को सकुशल निकाला गया था। लगातार हो रहे इन चमत्कारी बचाव अभियानों ने उन हजारों परिवारों के दिलों में एक बार फिर उम्मीद का चिराग रोशन कर दिया है, जिनके अपने इस जलप्रलय के बाद से लापता हैं।

Harsh Srivastava
ABOUT THE AUTHOR

Harsh Srivastava

Content Writer Mail ID - harshsri764@gmail.comharshsri764@gmail.com

Harsh Srivastava is a journalist currently working as Desk In-Charge at NewsTrack, Lucknow. He began his journalism career in 2023 and has previously worked with Hindustan, Times Internet and India News. He holds a Master’s degree in Journalism and Mass Communication (MJMC). His key areas of interest include politics, elections and crime, with a wider focus on governance, public policy and current affairs. He writes research-driven and SEO-focused digital stories, combining journalistic depth with an understanding of digital audiences. Harsh has covered the 2026 West Bengal Assembly Election, several state elections and bypolls, and extensively followed the Delhi CJP protest and its developments. His work includes news reports, explainers, features and analytical stories. Originally from Varanasi, Harsh has worked across Varanasi, Delhi and Lucknow, with experience spanning reporting, digital journalism, content writing and editorial operations.

Next Story