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Nepal Gen-Z प्रोटेस्ट पर 'केपी शर्मा ओली' ने तोड़ी चुप्पी, बताया आंदोलन का पूरा सच
नेपाल में Gen-Z प्रोटेस्ट पर पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली ने पहली बार बयान दिया। उन्होंने गोलीबारी का आदेश देने से इनकार करते हुए घुसपैठियों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।
KP Sharma Oli on Gen-Z protest: नेपाल में Gen Z आंदोलन के कारण सत्ता से बेदखल हुए पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने शुक्रवार को पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आकर इस बात से इनकार किया कि उनकी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। ओली ने दावा किया कि शांतिपूर्ण आंदोलन में 'घुसपैठिए' शामिल थे, जिन्होंने हिंसा भड़काई, जिसके कारण 19 लोगों की जान गई। ओली का यह बयान नेपाल के राजनीतिक संकट को और गहरा कर सकता है, खासकर तब जब वे खुद हिंसा के बाद से सुरक्षा कारणों से सैन्य बैरक में रह रहे थे।
'गोलीबारी' पर 'ओली' का 'चौंकाने' वाला दावा
अपने पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार सार्वजनिक हुए ओली ने संविधान दिवस पर एक संदेश में कहा, "सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया था।" उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों पर 'ऑटोमेटिक बंदूकों से गोलियां चलाई गईं', जो पुलिसकर्मियों के पास नहीं थीं। उन्होंने इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जानमाल के नुकसान पर उन्हें दुख है।
ओली ने आरोप लगाया कि आंदोलन को हिंसक बनाने के पीछे 'घुसपैठ करने वाले साजिशकर्ताओं' का हाथ था। उन्होंने कहा, "मेरे पद से इस्तीफा देने के बाद सिंह दरबार सचिवालय और सुप्रीम कोर्ट को आग लगा दी गई, नेपाल का नक्शा जला दिया गया और कई अहम सरकारी इमारतों को आग लगा दी गई।" उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के पीछे की साजिशों के बारे में वह अभी विस्तार से नहीं बताएंगे, लेकिन 'समय खुद ही सब बता देगा'।
'हिंसा' के बाद 'ओली' का 'अस्तित्व'
9 सितंबर को Gen-Z प्रोटेस्ट के बाद ओली को सेना के हेलिकॉप्टर से अपना आधिकारिक प्रधानमंत्री आवास छोड़ना पड़ा था। हिंसा के दौरान काठमांडू स्थित उनका निजी आवास, झापा में पैतृक निवास और दमक स्थित घर में आगजनी हुई थी। अब वे एक किराए के मकान में शिफ्ट हो गए हैं। ओली ने कहा कि 8 और 9 सितंबर को भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान तीन पुलिसकर्मियों समेत 70 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। उन्होंने संविधान लागू करते समय देश के सामने आई चुनौतियों को भी याद किया और कहा कि संविधान को 'सीमा की नाकाबंदी' और 'राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ चुनौतियों' के बीच लागू किया गया था। ओली का यह बयान न सिर्फ उनके ऊपर लगे आरोपों का जवाब है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वह अभी भी नेपाली राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना चाहते हैं। अब यह देखना होगा कि इस मामले की जांच होती है या नहीं, और क्या नेपाल में एक बार फिर शांति बहाल हो पाती है।


