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नेपाल ने इस 'महा शक्तिशाली' देश के राजदूत से नहीं की मुलाकात... भारत दौरे पर भी लगाया ब्रेक! पीछे छिपा है बालेन शाह का ये 'प्लान'
Balen Shah: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अगले एक साल तक विदेश दौरे न करने का फैसला किया है जिसमें भारत का एक प्रस्तावित दौरा भी शामिल है।
Balen Shah (photo: social media)
Balen Shah: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अगले एक साल तक विदेश दौरे न करने का फैसला किया है जिसमें भारत का एक प्रस्तावित दौरा भी शामिल है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि उनकी सरकार अब देश के अंदर के शासन और विकास पर ज्यादा ध्यान देना चाहती है।
नेपाल की राजनीति और कूटनीति में एक नया मोड़ सामने आ गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने हाल ही में अमेरिका के एक खास दूत सर्गियो गोर से मुलाकात ना कर के एक बड़ा संकेत दिया है। इस निर्णय ने न केवल नेपाल के अंदर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि यह कूटनीतिक प्रोटोकॉल है या फिर कोई सोची-समझी नई रणनीति?
बालेन शाह से इस कारण नहीं हो सकी मुलाकात
दरअसल, सर्गियो गोर तीन दिवसीय दौरे पर काठमांडू पहुंचे थे। उनके साथ छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी था। अमेरिकी पक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाकात करने के कई प्रयास किये गए, लेकिन आखिरकार यह बैठक नहीं हो सकी। इससे पहले भी अमेरिका के सहायक विदेश सचिव समीर पॉल कपूर के दौरे के दौरान भी बालेन शाह ने उनसे दूरी बनाए रखी थी।
प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, बालेन शाह इस वक़्त देश के आंतरिक प्रशासन और सुशासन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उनके प्रेस और अनुसंधान विशेषज्ञ दीपल दहल ने कहा कि प्रधानमंत्री का कार्यक्रम बहुत व्यस्त है और इसी कारण से वे अमेरिकी दूत से मुलाकात नहीं कर पाए।
बालेन शाह का स्पष्ट रुख
हालांकि, इस घटनाक्रम को सिर्फ व्यस्तता के नजरिए से नहीं देखा जा रहा है। नेपाली मीडिया और कई थिंक टैंक का मानना है कि बालेन शाह एक साफ़ कूटनीतिक प्रोटोकॉल स्थापित करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। इसे लेकर माना जा रहा है कि वह सिर्फ राष्ट्राध्यक्ष या विदेश मंत्री स्तर के अधिकारियों से ही मुलाकात करना चाहते हैं, जिससे नेपाल की कूटनीतिक स्थिति को एक नया स्वरूप मिल सके।
डिप्लोमेटिक विशेषज्ञों की राय
डिप्लोमेटिक विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर तरह-तरह की सामने आ रही हैं। कुछ का कहना है कि यह एक असाधरण कदम है, क्योंकि आमतौर पर किसी भी देश के प्रधानमंत्री विभिन्न स्तर के राजनयिकों से मुलाकात करते हैं। उदाहरण के तौर पर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कई बार अलग-अलग देशों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करते रहते हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी विभिन्न देशों के राजनयिकों के साथ नियमित संवाद करते हैं।
भारत, अमेरिका और चीन के बीच संतुलन आवश्यक
वहीं, कुछ विशेषज्ञ इसे बालेन शाह की रणनीतिक सोच का अहम भाग मान रहे हैं। उनका कहना है कि नेपाल जैसे देश के लिए भारत, अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। ऐसे में बालेन शाह किसी भी तरह के जियो-पॉलिटिकल दबाव में आने से बचना चाहते हैं। इससे पहले नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्रियों जैसे केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल प्रचंड पर हमेशा से आरोप लगते रहे हैं कि वे वैश्विक ताकतों के बीच संतुलन बनाने में उलझ गए थे।
नेपाल और अमेरिका के बीच आर्थिक रिश्तों पर ज़ोर
इस बीच, काठमांडू में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले और विदेश मंत्री शिशिर खनाल से मुलाकात की। इस बैठक में नेपाल और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग, निवेश और विकास सहायता जैसे मबे मुद्दों पर चर्चा हुई। नेपाली विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाने पर विशेषतौर जोर दिया गया।
इन सब के बीच सबसे दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अगले एक साल तक किसी भी विदेश दौरे पर न जाने का निर्णय लिया है। इसमें भारत का प्रस्तावित दौरा भी शामिल है, जिसे फिलहाल टाल दिया गया है। यह निर्णय नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
RSP की जानकारी
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के मुताबिक, सरकार अब अंतरराष्ट्रीय मामलों की बजाय देश के अंदर बुनियादी ढांचे, आर्थिक सुधार और स्थानीय प्रशासन पर फोकस करना चाहती है। बालेन शाह खुद को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, जो जमीन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देता है।
अब ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति बालेन शाह की छवि को मजबूत कर सकती है, लेकिन इसके साथ ही यह भी आवश्यक होगा कि नेपाल अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सक्रियता बनाए रखे। आगामी वक़्त में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि बालेन शाह की यह "इनवर्ड फोकस" नीति नेपाल के लिए कितना फायदेमंद साबित होती है और क्या इससे उसके वैश्विक रिसेहतों पर कोई प्रभाव पड़ता है।


