New Coronavirus Variant: वैज्ञानिकों ने खोजा कोरोना का नया वैरिएंट, हंटा वायरस के कहर बीच बढ़ी टेंशन, जानिए कितना खतरनाक

New Coronavirus Variant: कोरोना के नए वैरिएंट ‘क्लेड B’ की खोज ने दुनियाभर की टेंशन बढ़ा दी है। जापान-थाईलैंड के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह वायरस इंसानों को सीधे संक्रमित कर सकता है। उधर हंटा वायरस का खतरा भी बढ़ रहा है। जानिए कितना खतरनाक है यह नया संकट।

Harsh Srivastava
Published on: 11 May 2026 9:04 PM IST (Updated on: 11 May 2026 9:04 PM IST)
New Coronavirus Variant: वैज्ञानिकों ने खोजा कोरोना का नया वैरिएंट, हंटा वायरस के कहर बीच बढ़ी टेंशन, जानिए कितना खतरनाक
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New Coronavirus Variant: पूरी दुनिया अभी कोरोना महामारी के जख्मों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि वैज्ञानिकों की एक नई खोज ने फिर से चिंता की लकीरें खींच दी हैं। एक तरफ जहां दुनिया के कुछ हिस्सों में 'हंटा वायरस' अपना पैर पसार रहा है, वहीं दूसरी तरफ जापान और थाईलैंड के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के एक बिल्कुल नए और खतरनाक समूह की पहचान की है। टोक्यो यूनिवर्सिटी और थाईलैंड की चुलालोंकॉर्न यूनिवर्सिटी के इस संयुक्त शोध ने यह चेतावनी दी है कि यह नया वायरस सीधे तौर पर इंसानों को संक्रमित करने की क्षमता रखता है। इस खोज के बाद वैश्विक स्वास्थ्य संगठन सतर्क हो गए हैं।

चमगादड़ों में छिपा है कोरोना का नया 'क्लेड बी' ग्रुप

जापान और थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने अपनी रिसर्च में पाया कि यह नया वायरस घोड़े के नुकीले चेहरे वाले चमगादड़ों (Horseshoe Bats) में पाया गया है। वैज्ञानिकों ने इस नए समूह को 'क्लेड बी' (Clade B) नाम दिया है। 6 मई 2026 को प्रतिष्ठित जर्नल 'सेल' में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, यह वायरस थाईलैंड के चाचोएंगसाओ प्रांत की एक कृत्रिम गुफा में रहने वाले चमगादड़ों में मिला है। सबसे डरावनी बात यह है कि एक ही चमगादड़ के शरीर में कोरोना के दो अलग-अलग समूह (क्लेड ए और क्लेड बी) एक साथ पाए गए हैं, जो भविष्य में किसी बड़े म्यूटेशन की ओर इशारा कर रहे हैं।

इंसानों को कैसे संक्रमित कर सकता है यह नया वायरस?

वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि 'क्लेड बी' वायरस में एक ऐसी खासियत है जो इसे पिछले वायरसों से ज्यादा खतरनाक बनाती है। यह वायरस इंसानी शरीर में प्रवेश करने के लिए उसी 'रिसेप्टर' का इस्तेमाल करता है, जिसका उपयोग सार्स-कोव-2 (कोविड-19) ने तबाही मचाने के लिए किया था। इसे विज्ञान की भाषा में 'एंजियोटेंसिन-कन्वर्टिंग एंजाइम 2' (ACE2) कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि इस नए वायरस को इंसानी कोशिकाओं में सेंध लगाने के लिए किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं है, यह सीधे तौर पर मनुष्य के फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों पर हमला कर सकता है।

हंटा वायरस का कहर: चूहों से फैल रही है मौत

एक ओर जहां कोरोना के नए रूप डरा रहे हैं, वहीं 'हंटा वायरस' का प्रकोप भी सुर्खियों में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हंटा वायरस मुख्य रूप से चूहों और कृंतक जीवों (Rodents) से इंसानों में फैलता है। यह वायरस संक्रमित चूहे के पेशाब, लार या मल के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। जब चूहों का मल-मूत्र सूख जाता है, तो उसके सूक्ष्म कण हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए इंसान के शरीर में पहुंचकर फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। हंटा वायरस इतना जानलेवा है कि इसमें मृत्यु दर काफी अधिक होती है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है।

सतर्कता ही है सबसे बड़ा बचाव

दुनिया भर के विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना का नया समूह और हंटा वायरस का बढ़ता प्रभाव मानव जाति के लिए एक बड़ी चेतावनी है। वन्यजीवों के साथ बढ़ते संपर्क और पर्यावरण से छेड़छाड़ ऐसे वायरसों को जंगलों से निकालकर शहरों तक ला रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना अनिवार्य है। साफ-सफाई का ध्यान रखना, चूहों से दूरी बनाना और जंगली इलाकों में जाते समय मास्क का प्रयोग करना ही फिलहाल इन अदृश्य दुश्मनों से बचने का एकमात्र रास्ता है।

Harsh Srivastava

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Mail ID - harshsri764@gmail.com

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