Nuclear Waste Storage Finland: 433 मीटर नीचे बन रहा 'न्यूक्लियर कब्रिस्तान', जहां दफन होगा दुनिया का सबसे खतरनाक कचरा

Nuclear Waste Storage Finland: फिनलैंड का Onkalo Project 433 मीटर नीचे रेडियोधर्मी परमाणु कचरे को 1 लाख वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया जा रहा है।

Jyotsana Singh
Published on: 6 Jun 2026 1:37 PM IST (Updated on: 6 Jun 2026 1:38 PM IST)
Onkalo nuclear waste repository Finland 433 meter underground storage World first permanent nuclear waste
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Nuclear Waste Underground Storage Finland 2026

Nuclear Waste Storage Finland: आज पूरी दुनिया विद्युत ऊर्जा से संचालित होकर तेजी से रफ्तार भर रही है। तारों से होकर हमारे घरों तक आने वाली बिजली ने हमारे जीवन को कितना सहज और सुविधासंपन्न बना दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस बिजली के उत्पादन में निकलने वाला कचरा हमारे जीवन के लिए कितना खतरनाक है। बिजली के बढ़ते उत्पादन के साथ ये कचरा अब एक समस्या बनता जा रहा था। आखिरकार उस समस्या का समाधान खोजने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया गया है, जिससे वैज्ञानिक पिछले 70 सालों से जूझ रहे थे। फिनलैंड में धरती से 433 मीटर नीचे एक ऐसा विशाल भूमिगत भंडार लगभग तैयार हो चुका है। जहां परमाणु संयंत्रों से निकलने वाले बेहद खतरनाक रेडियोधर्मी कचरे को अगले 1 लाख वर्षों तक सुरक्षित रखने की योजना है। इस परियोजना का नाम 'ओन्कालो' है और इसे दुनिया का पहला स्थायी परमाणु कचरा भंडार माना जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर परमाणु कचरा इतना खतरनाक क्यों होता है कि उसे इंसानी सभ्यता की कल्पना से भी लंबे समय तक जमीन के भीतर बंद रखना पड़ता है?

आखिर परमाणु कचरा क्या होता है?

परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में बिजली बनाने के लिए यूरेनियम जैसे रेडियोधर्मी तत्वों का उपयोग किया जाता है। जब यह ईंधन अपनी उपयोगी क्षमता खो देता है तो वह स्पेंट न्यूक्लियर फ्यूल या परमाणु कचरे में बदल जाता है। हालांकि इसे कचरा कहा जाता है, लेकिन इसमें मौजूद रेडियोधर्मी पदार्थ हजारों वर्षों तक खतरनाक विकिरण छोड़ते रहते हैं। यही विकिरण इंसानों, जानवरों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। वहीं परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में यूरेनियम के परमाणुओं के टूटने से पैदा होने वाली गर्मी का इस्तेमाल टर्बाइन घुमाने के लिए किया जाता है। इससे वही बिजली बनती है, जिसका उपयोग घरों, दफ्तरों और उद्योगों में किया जाता है।

परमाणु कचरा इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?

परमाणु कचरे से निकलने वाली रेडिएशन कोशिकाओं और डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से कैंसर, आनुवंशिक विकार और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कुछ रेडियोधर्मी तत्वों को सुरक्षित स्तर तक पहुंचने में हजारों नहीं बल्कि लाखों साल लग सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रयुक्त परमाणु ईंधन को प्राकृतिक यूरेनियम अयस्क के बराबर सुरक्षित स्तर तक पहुंचने में लगभग 1 लाख वर्ष का समय लग सकता है।

फिनलैंड ने खोजा स्थायी समाधान

फिनलैंड के दक्षिण-पश्चिमी शहर यूराजोकी के पास स्थित ओन्कालो परियोजना को 1.9 अरब साल पुरानी ठोस चट्टानों के भीतर बनाया गया है। यहां तक पहुंचने के लिए जमीन के नीचे सुरंगों का विशाल नेटवर्क तैयार किया गया है।

फिनलैंड का परमाणु सुरक्षा प्राधिकरण जल्द ही अंतिम मंजूरी देने की तैयारी में है। मंजूरी मिलने के बाद इस सुविधा का संचालन वर्ष 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में शुरू हो सकता है। यह दुनिया का पहला ऐसा भंडार होगा जिसे परमाणु कचरे के स्थायी निपटान के लिए डिजाइन किया गया है।

जमीन के नीचे कैसे रखा जाएगा परमाणु कचरा?

सबसे पहले इस्तेमाल किए गए परमाणु ईंधन को मोटे और जंग-प्रतिरोधी तांबे के विशेष कनस्तरों में बंद किया जाएगा। इसके बाद इन कनस्तरों को 433 मीटर गहरे भूमिगत सुरंगों में बने विशेष गड्ढों में उतारा जाएगा। इन गड्ढों को बेंटोनाइट मिट्टी से भरा जाएगा। यह मिट्टी पानी मिलने पर फूल जाती है और एक मजबूत प्राकृतिक सील का काम करती है।

इसके ऊपर अरबों साल पुरानी मजबूत चट्टानों की परत अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली रेडियोधर्मी पदार्थों को पर्यावरण तक पहुंचने से रोकेगी।

कितनी बड़ी है यह परियोजना?

ओन्कालो भंडार में लगभग 6,500 टन यूरेनियम आधारित परमाणु कचरा रखने की क्षमता होगी। यह फिनलैंड के सभी पांच परमाणु रिएक्टरों से निकलने वाले कचरे को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।

योजना के अनुसार अगले लगभग 100 वर्षों तक यहां कचरा जमा किया जाएगा और उसके बाद पूरे भंडार को स्थायी रूप से सील कर दिया जाएगा।

क्या पूरी तरह सुरक्षित है यह व्यवस्था?

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अब तक का सबसे सुरक्षित समाधान है, लेकिन कुछ जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। विशेषज्ञों ने भविष्य में तांबे के कनस्तरों के क्षरण और संभावित हिमयुगों के दौरान आने वाले भूकंपों को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है। हालांकि कई दशकों से किए जा रहे अध्ययन और जोखिम मूल्यांकन बताते हैं कि इन खतरों के बावजूद भंडार की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी रह सकती है।

दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ओन्कालो?

1950 के दशक में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के शुरू होने के बाद से दुनिया के कई देशों के पास लाखों टन रेडियोधर्मी कचरा जमा हो चुका है। अधिकांश देशों में यह कचरा अभी भी अस्थायी जलाशयों या स्टोरेज सुविधाओं में रखा गया है। ऐसे में फिनलैंड की ओन्कालो परियोजना केवल एक राष्ट्रीय योजना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर परमाणु कचरे के स्थायी समाधान की दिशा में ऐतिहासिक प्रयोग मानी जा रही है। यदि यह मॉडल सफल साबित होता है तो भविष्य में कई अन्य देश भी इसी तरह के भूमिगत भंडार विकसित कर सकते हैं।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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