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Pakistan Human Rights: ईसाई अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता, पाकिस्तान को ईयू लाभ देने की आलोचना तेज
Pakistan Human Rights: मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों के बावजूद पाकिस्तान को यूरोपीय संघ द्वारा जीएसपी-प्लस व्यापारिक लाभ दिए जाने पर विवाद गहरा गया है। मानवाधिकार संगठनों ने ईयू की नीति और पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए हैं।
Pakistan Human Rights (Image Credit-Social Media)
Pakistan Human Rights: मानवाधिकार उल्लंघनों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के आरोपों के बीच पाकिस्तान को यूरोपीय संघ द्वारा जीएसपी-प्लस व्यापारिक लाभ दिए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रगति न करने के बावजूद पाकिस्तान को आर्थिक रियायतें मिलती रही हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने ईयू की नीति पर उठाए सवाल
मानवाधिकारों के कथित गंभीर उल्लंघनों के बावजूद पाकिस्तान को व्यापारिक रियायतें जारी रखने को लेकर यूरोपीय संघ (ईयू) की आलोचना तेज हो गई है। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों और विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि 2014 से लागू विशेष व्यापारिक व्यवस्था के बावजूद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों पर अपेक्षित प्रगति करने में विफल रहा है।
ईसाई अल्पसंख्यकों की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय चिंता
ब्रुसेल्स स्थित मानवाधिकार संगठन सीमाओं के बिना मानवाधिकार (एचआरडब्ल्यूएफ) ने पाकिस्तान को दिए गए जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस (जीएसपी-प्लस) दर्जे को "ईयू और पाकिस्तान के बीच खराब सौदा" बताया है। संगठन का कहना है कि जब तक मानवाधिकारों के क्षेत्र में ठोस सुधार नहीं दिखता, तब तक इस सुविधा को निलंबित किया जाना चाहिए।
तुर्की मूल की पत्रकार उज़े बुलुत ने अमेरिकी मीडिया मंच पीजे मीडिया में प्रकाशित लेख में लिखा है कि 2014 में समझौता लागू होने के बाद से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों को लागू करने में सार्थक प्रगति दिखाने में नाकाम रहा है। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव देश के ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय पर पड़ा है। लेख के अनुसार, पाकिस्तान की आबादी में ईसाइयों की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से भी कम है, लेकिन उन्हें सामाजिक और संस्थागत स्तर पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। भीड़ हिंसा, ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग, आर्थिक भेदभाव, अपहरण, यौन हिंसा और जबरन धर्मांतरण जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।
मानवाधिकार सुधारों में पाकिस्तान की प्रगति पर सवाल
बुलुत ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद ईयू पाकिस्तान को बड़ी आर्थिक राहत प्रदान करता रहा है। पाकिस्तान को जीएसपी-प्लस योजना के तहत यूरोपीय बाजार में 66 प्रतिशत से अधिक टैरिफ श्रेणियों पर शुल्क-मुक्त या रियायती पहुंच प्राप्त है। धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति का उल्लेख करते हुए लेख में लाहौर की 14 वर्षीय ईसाई किशोरी निशा बीबी के मामले का भी जिक्र किया गया है। परिवार और कानूनी प्रतिनिधियों के अनुसार, उसका कथित रूप से अपहरण कर जबरन इस्लाम धर्म स्वीकार कराया गया और विवाह कराया गया। पीड़िता के पिता अब्बास मसीह ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी एक मुस्लिम परिवार में घरेलू सहायक के रूप में काम करते समय लापता हो गई थी।
लेख में कहा गया है कि पाकिस्तान में कानूनी, धार्मिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां लैंगिक असमानता को बढ़ावा देती हैं, जिसके कारण ईसाई लड़कियां अपहरण, जबरन धर्मांतरण और जबरन विवाह जैसी घटनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील रहती हैं। बुलुत ने यह भी कहा कि मानवाधिकार, श्रमिक अधिकारों और सुशासन के क्षेत्रों में सुधार के वादों के बावजूद पाकिस्तान अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाया है, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा के मामले में। हालांकि, पाकिस्तान अब भी जीएसपी-प्लस योजना के तहत मिलने वाले व्यापारिक लाभों का बड़ा लाभार्थी बना हुआ है, जिसे लेकर यूरोपीय संघ की नीतियों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।


