भारत से पंगा लेकर भूखा मर रहा पाकिस्तान! ₹380000000000 के नुकसान के बाद दया की मांग रहा भीख

पाकिस्तान-इंडिया बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष नूर मुहम्मद कसूरी का दावा है कि 2019 से भारत के साथ व्यापार बंद होने के कारण पाकिस्तान को करीब 3.80 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।

Sachin Singh
Published on: 2 Nov 2026 10:23 PM IST
भारत से पंगा लेकर भूखा मर रहा पाकिस्तान! ₹380000000000 के नुकसान के बाद दया की मांग रहा भीख
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Pakistan India Trade: भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार बंद हुए कई साल बीत चुके हैं, लेकिन इसका आर्थिक असर अब भी चर्चा में है। पाकिस्तान-इंडिया बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष नूर मुहम्मद कसूरी का दावा है कि साल 2019 में दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते रुकने के बाद से पाकिस्तान को करीब 40 अरब डॉलर यानी लगभग 3.80 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक, भारत से व्यापार बंद होने के कारण पाकिस्तान के कारोबारियों को जरूरी कच्चा माल और दूसरे सामान दूर-दराज के देशों से मंगाने पड़ रहे हैं। इससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ा है और सामान पहुंचने में भी ज्यादा समय लग रहा है।

कसूरी ने भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार दोबारा शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर दोनों देशों के बीच कारोबार बहाल होता है, तो पाकिस्तान के उद्योगों को कम कीमत पर जरूरी सामान मिल सकता है। इससे परिवहन का खर्च घटाने, सप्लाई चेन बेहतर बनाने और निवेश के नए रास्ते खोलने में मदद मिल सकती है। उन्होंने पर्यटन और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ने की संभावनाओं का भी जिक्र किया।

2019 से क्यों बंद है भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार?

साल 2019 में पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बाद भारत-पाकिस्तान के कारोबारी रिश्तों पर रोक लग गई थी। इसके बाद पाकिस्तान के कारोबारियों को कई ऐसे सामान दूसरे देशों से खरीदने पड़े, जिन्हें भारत से अपेक्षाकृत कम दूरी तय करके मंगाया जा सकता था।

नूर मुहम्मद कसूरी के मुताबिक, इसका असर केवल एक उद्योग तक सीमित नहीं रहा। दवा बनाने वाली कंपनियों, कपड़ा उद्योग और कृषि से जुड़े कारोबार को भी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है। उनका कहना है कि पाकिस्तान को चीनी, खाद, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, लोहा, स्टील, सब्जियां और भारी मशीनरी जैसी चीजें भी दूसरे देशों से खरीदनी पड़ रही हैं।

कसूरी का तर्क है कि भारत में इन उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू होने से पाकिस्तानी कारोबारियों को कुछ सामान कम दूरी से और कम लागत पर मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत कितनी होगी, यह उत्पादों की कीमत, व्यापार की शर्तों और अन्य खर्चों पर भी निर्भर करेगा।

दवा उद्योग को हर साल करीब 19 हजार से 28 हजार करोड़ रुपये की बचत का दावा

भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार बहाल करने की मांग के पीछे पाकिस्तान के दवा उद्योग की लागत भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है। कसूरी का कहना है कि पाकिस्तान की दवा कंपनियां कई ऐसे कच्चे माल पर निर्भर हैं, जो भारत में उपलब्ध हैं। लेकिन दोनों देशों के बीच कारोबार बंद होने के कारण कंपनियों को दूसरे बाजारों का रुख करना पड़ रहा है।

उनके अनुमान के मुताबिक, अगर भारत से दवाओं के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला जरूरी कच्चा माल आयात करने की अनुमति मिलती है, तो पाकिस्तान के दवा उद्योग को हर साल 2 अरब से 3 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। भारतीय रुपये में यह रकम करीब 18,975 करोड़ से 28,463 करोड़ रुपये बैठती है।

कसूरी के मुताबिक, दूसरे देशों से सामान मंगाने के कारण माल ढुलाई और परिवहन पर ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। इसके अलावा, सामान की डिलीवरी में भी ज्यादा समय लगता है। इससे कंपनियों के कामकाज और उत्पादन की योजना पर असर पड़ सकता है।

उनका कहना है कि भारत के साथ व्यापार बहाल होने पर कच्चे माल की आपूर्ति आसान हो सकती है और उद्योगों की लागत घट सकती है। हालांकि, यह बचत अभी उनका अनुमान है। इसे किसी स्वतंत्र रूप से सत्यापित आर्थिक आकलन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

कपड़ा उद्योग पर 47 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ

पाकिस्तान का कपड़ा उद्योग भी बढ़ती लागत की समस्या से जूझ रहा है। कसूरी के मुताबिक, देश में कपास का उत्पादन घटने के कारण कपड़ा मिलों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए दूसरे देशों पर अधिक निर्भर होना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की कपड़ा कंपनियां अब कपास की जरूरत पूरी करने के लिए ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका जैसे देशों से खरीदारी कर रही हैं। कसूरी के दावे के अनुसार, इस बदलाव के कारण कपड़ा उद्योग पर करीब 5 अरब डॉलर यानी लगभग 47,438 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आया है।

कपास कपड़ा उद्योग के लिए अहम कच्चा माल है। जब देश में इसका उत्पादन जरूरत के मुताबिक नहीं होता, तो कंपनियों को दूसरे देशों से कपास खरीदनी पड़ती है। इसमें खरीद मूल्य के साथ परिवहन और दूसरे खर्च भी शामिल हो सकते हैं। कसूरी का कहना है कि भारत से कारोबार बंद होने और घरेलू कपास उत्पादन में गिरावट ने पाकिस्तानी कपड़ा उद्योग की मुश्किलें बढ़ाई हैं।

हालांकि, उनके बयान में बताए गए 5 अरब डॉलर के अतिरिक्त खर्च का पूरा हिसाब या स्वतंत्र आकलन उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसलिए इस आंकड़े को पाकिस्तान-इंडिया बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष के दावे के रूप में ही समझना चाहिए।

किसान कपास छोड़कर गन्ने की कर रहे खेती

कसूरी ने पाकिस्तान में कपास की खेती घटने पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि कपास उगाने वाले पारंपरिक इलाकों में कुछ किसान अब गन्ने की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इससे कपड़ा उद्योग को घरेलू स्तर पर मिलने वाली कपास की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

उनके मुताबिक, यह बदलाव केवल कपड़ा कंपनियों के लिए चिंता का विषय नहीं है, बल्कि इसका असर देश की व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। अगर घरेलू उत्पादन कम होता है, तो उद्योगों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए आयात पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है।

कसूरी ने कृषि नीतियों में सुधार की जरूरत बताई। उनका कहना है कि ऐसी नीतियां बनाई जानी चाहिए, जिनसे किसानों को कपास की खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिले और घरेलू उत्पादन को दोबारा बढ़ाया जा सके।

पेट्रोलियम और दूसरे सामान की खरीद भी हो सकती है सस्ती

कसूरी ने पेट्रोलियम उत्पादों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की तेल रिफाइनरियां पाकिस्तान के मुकाबले भौगोलिक रूप से नजदीक हैं। ऐसे में व्यापार बहाल होने पर पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद और आपूर्ति में लगने वाला खर्च कम हो सकता है।

उन्होंने कहा कि चीनी, खाद, सीमेंट, लोहा, स्टील, सब्जियों और भारी मशीनरी जैसे सामान के मामले में भी भारत के साथ कारोबार से पाकिस्तान को फायदा मिल सकता है। फिलहाल इन वस्तुओं की खरीद के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता होने से कारोबारियों को अतिरिक्त परिवहन लागत उठानी पड़ती है।

हालांकि, केवल दूरी कम होने से किसी उत्पाद की कीमत अपने आप कम नहीं हो जाती। वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देशों के बीच व्यापार की अनुमति, कीमतें, भुगतान की व्यवस्था, परिवहन और अन्य कारोबारी शर्तें कैसी रहती हैं।

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Sachin Singh is a media professional with 4 years of experience in the field of journalism and digital media. After completing his education at Jamia Millia Islamia Central University, he has worked with reputed media organizations such as Editor ji, ABP News and Doordarshan. Currently, Sachin Singh is working as a Content Writer with News Track, where he contributes to fast-paced digital news coverage and content creation. His areas of interest include politics, national and international affairs, and food. With experience across different formats of journalism, he focuses on producing informative, accurate, and engaging content for digital audiences.

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