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खाली खजाना और महंगा तेल…पाकिस्तान में लॉकडाउन की नौबत! अब क्या करेगी शहबाज सरकार?
Pakistan Lockdown Situation: पश्चिम एशिया की जंग के बीच पाकिस्तान में तेल संकट गहरा गया है। हालात लॉकडाउन जैसे बन रहे हैं और शहबाज सरकार हफ्ते में सिर्फ 4 दिन कामकाज समेत कई बड़े फैसले ले सकती है।
Image Source- Social Media
Pakistan Lockdown Situation: पश्चिम एशिया में चल रही जंग (West Asia War) के बीच पाकिस्तान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। महीनों से इस जंग में चौधरी बनने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के हाथ कुछ नहीं लग पाया और अमेरिका (United States) और ईरान (Iran) के बीच युद्ध अब भी जारी है। बीते सप्ताह क्षेत्र में तनाव उस वक्त और बढ़ गया, जब सऊदी अरब (Saudi Arabia) और हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के बीच भी जंग शुरू हो गई।
रिपोर्ट्स के मुतबिक, इस बढ़ते तनाव का सीधा असर तेल बाजार (Oil Market) पर पड़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसका असर पाकिस्तान पर भी पड़ रहा है। वहां हालात इतने खराब बताए जा रहे हैं कि अब लॉकडाउन (Lockdown) जैसी स्थिति बनती दिखाई दे रही है।
खाली पड़ा है फॉरेन रिजर्व
गौरतलब हो कि, पाकिस्तान का फॉरेन रिजर्व (Foreign Reserves) पहले ही खाली पड़ा है। पाकिस्तान ने हाल ही में यह भी माना था कि वह जल्द ही अमेरिका के पास मदद के लिए गुहार लगाने जाएगा। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने उसकी परेशानी और बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब पाकिस्तान सरकार ईंधन बचाने के लिए 'पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन' (Petroleum Smart Lockdown) लगाने की योजना बना रही है। इसके तहत देश में कामकाज से लेकर बाजारों और सरकारी दफ्तरों तक के लिए कई बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।
हफ्ते में सिर्फ 4 दिन कामकाज
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि देश में सामान्य कामकाज तक प्रभावित हो सकता है। पेट्रोलियम लॉकडाउन (Petroleum Lockdown) के तहत सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में हफ्ते में केवल चार दिन काम करने का नियम लागू किया जा सकता है।
इसके साथ ही छुट्टियों को शुक्रवार से रविवार तक बढ़ाने का प्लान है। इसका मकसद सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही (Vehicle Movement) को कम करना और पेट्रोल-डीजल की खपत घटाना है।
घर से काम करेंगे कर्मचारी
ईंधन बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों (Government Offices) में कर्मचारियों को रोटेशन बेसिस पर बुलाने की योजना है। वहीं अधिकतर कर्मचारियों को घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) करने का निर्देश दिया जा सकता है।
सरकार का मकसद सरकारी दफ्तरों तक आने-जाने वाली गाड़ियों और कर्मचारियों की आवाजाही कम करके पेट्रोल और डीजल की खपत को नियंत्रित करना है।
मॉल और बाजार भी जल्दी होंगे बंद
पेट्रोल और डीजल के साथ बिजली की बचत (Energy Saving) के लिए भी कई कदम उठाए जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शॉपिंग मॉल्स (Shopping Malls), व्यावसायिक बाजारों (Commercial Markets) और मैरिज हॉल (Marriage Halls) को शाम के समय जल्दी बंद करने का फैसला लिया जा सकता है।
यानी ईंधन और बिजली बचाने के लिए पाकिस्तान में कामकाज के समय से लेकर बाजारों के खुलने और बंद होने तक में बदलाव किया जा सकता है।
सरकारी कर्मचारियों का भत्ता भी कटेगा
शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) की सरकार अपने कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में भी कटौती करने की तैयारी कर सकती है। सरकारी तंत्र में ईंधन की खपत कम करने के लिए करीब 50 फीसदी सरकारी गाड़ियों (Government Vehicles) के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा अधिकारियों के गैर-जरूरी दौरों (Non-Essential Travel) को कम करने और सरकारी पेट्रोल भत्तों (Fuel Allowances) में भी भारी कटौती करने की योजना है। सरकार का मकसद इन कदमों के जरिए पेट्रोलियम उत्पादों की खपत घटाना और विदेशी मुद्रा पर पड़ रहे दबाव को कम करना है।
पहले भी उठाए जा चुके हैं ऐसे कदम
आपको बताते चलें कि पाकिस्तान इससे पहले भी इस तरह के उपाय लागू कर चुका है। उस समय भी सरकार की ओर से ईंधन बचाने के लिए कई कदम उठाए गए थे और अधिकारियों के वेतन तक काटने के आदेश दिए गए थे।
हालांकि, इन उपायों के बावजूद पाकिस्तान की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं और अपेक्षित फायदा नहीं मिल पाया। अब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच पाकिस्तान एक बार फिर ईंधन बचाने के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी में है।
ऐसे में अगर 'पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन' लागू होता है, तो सरकारी और निजी क्षेत्र में हफ्ते में चार दिन कामकाज, तीन दिन की छुट्टी, वर्क फ्रॉम होम, बाजारों को जल्दी बंद करने और सरकारी वाहनों व ईंधन भत्तों में कटौती जैसे कदम पाकिस्तान में आम लोगों और सरकारी तंत्र की रोजमर्रा की व्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकते हैं।


