क्या ईरान के दोस्त पर बम बरसाएगा पाकिस्तान? सऊदी अरब के साथ मक्का समझौते के क्या हैं मायने

Pakistan Saudi Defense Pact: सऊदी अरब पर हमला होने पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने समझौते की शर्तें निभाने की बात कही है। जानिए मक्का रक्षा समझौते के मायने।

Alakha Singh
Published on: 9 Sept 2026 10:11 PM IST
क्या ईरान के दोस्त पर बम बरसाएगा पाकिस्तान? सऊदी अरब के साथ मक्का समझौते के क्या हैं मायने
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Pakistan-Saudi Arabia Defense Pact: सऊदी अरब पर हमला हुआ तो क्या पाकिस्तान सीधे सैन्य कार्रवाई करेगा? पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के ताजा बयान ने इस सवाल को हवा दे दी है। उन्होंने साफ कहा है कि सऊदी अरब पर किसी भी आक्रमण की स्थिति में पाकिस्तान अपने रक्षा समझौते की शर्तों का सम्मान करेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर यमन के हूती विद्रोही सऊदी अरब को निशाना बनाते हैं, तो क्या पाकिस्तान इस संघर्ष में उतर सकता है?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने Geo News को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनका देश सऊदी अरब के साथ हुए समझौते की शर्तों से बंधा हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर किसी सदस्य के खिलाफ आक्रामकता होती है तो समझौते के तहत सामूहिक प्रतिक्रिया दी जा सकती है।

आसिफ ने कहा, "हम इस समझौते की शर्तों से बंधे हैं और अगर आक्रमण होता है तो, ईश्वर ने चाहा तो, हम इस समझौते का सम्मान करेंगे। इसमें कोई अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए।"

क्या है मक्का रक्षा समझौता?

तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पिछले महीने मक्का में त्रिपक्षीय रक्षा समझौता हुआ था। पाकिस्तान का कहना है कि यह समझौता रक्षात्मक प्रकृति का है, आक्रामक नहीं।

इसका मूल उद्देश्य यह है कि अगर समझौते में शामिल किसी देश पर हमला होता है तो दूसरे सदस्य देश सामूहिक रूप से उसकी मदद के लिए आगे आ सकते हैं।

यही वजह है कि ख्वाजा आसिफ ने हूती विद्रोहियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी गतिविधियां इस समझौते को सक्रिय करने की स्थिति पैदा कर सकती हैं।

ईरान के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल?

हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में अगर हूती हमले सऊदी अरब के खिलाफ जारी रहते हैं और रियाद इसे बड़े सैन्य हमले के तौर पर देखता है, तो पाकिस्तान पर अपने समझौते के तहत प्रतिक्रिया देने का दबाव बढ़ सकता है।

यह स्थिति पाकिस्तान के लिए बेहद संवेदनशील होगी, क्योंकि उसके ईरान के साथ भी महत्वपूर्ण पड़ोसी और क्षेत्रीय संबंध हैं। यानी इस समझौते के सक्रिय होने की स्थिति में इस्लामाबाद को सऊदी अरब के साथ अपनी रक्षा प्रतिबद्धता और ईरान के साथ अपने संबंधों के बीच संतुलन साधना पड़ सकता है।

सऊदी अरब पर हूतियों के हमले से बढ़ा तनाव

ख्वाजा आसिफ का बयान ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब ने देश के दक्षिणी हिस्से में कई ऊर्जा सुविधाओं को रोक दिया है और ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के खिलाफ नए हमलों का दावा किया है।

हूतियों और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से तनाव चला आ रहा है। यमन के गृहयुद्ध में सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल रहा है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि वह उम्मीद कर रहे हैं कि स्थिति आगे नहीं बढ़ेगी। उन्होंने हूतियों से सऊदी अरब को यमन संघर्ष में और गहराई तक खींचने से बचने की अपील की।

पाकिस्तान क्या सीधे युद्ध में उतरेगा?

फिलहाल ख्वाजा आसिफ के बयान को सीधे पाकिस्तान के युद्ध में उतरने की घोषणा के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। उन्होंने समझौते को रक्षात्मक बताया है और सामूहिक प्रतिक्रिया की बात कही है।

हालांकि, उनका यह कहना कि पाकिस्तान समझौते की शर्तों का सम्मान करने के लिए बाध्य है, इस बात का संकेत जरूर देता है कि सऊदी अरब पर बड़े पैमाने का हमला होने की स्थिति में इस्लामाबाद पर कार्रवाई का दबाव हो सकता है।

ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि सऊदी अरब ने इस मामले में पाकिस्तान से औपचारिक मदद मांगी है या नहीं। लेकिन उन्होंने दोहराया कि समझौते के मुताबिक पाकिस्तान को प्रतिक्रिया देनी होगी।

अमेरिका-ईरान तनाव पर भी बोले आसिफ

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वह अभी भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं।

आसिफ ने बातचीत की स्थिति को बेहद मुश्किल बताते हुए इसे "टाइट-रोप वॉक" यानी बेहद सावधानी से आगे बढ़ने जैसा बताया। उनके मुताबिक हालात पूरी तरह गतिरोध में होने के बजाय कुछ बेहतर नजर आ रहे हैं।

बड़ा सवाल: किस तरफ जाएगा पाकिस्तान?

अगर सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव बढ़ता है, तो पाकिस्तान के सामने बड़ी रणनीतिक चुनौती होगी। एक तरफ सऊदी अरब के साथ उसका पुराना रक्षा संबंध है, वहीं दूसरी तरफ ईरान उसका पड़ोसी देश है।

इसलिए मक्का रक्षा समझौता सिर्फ एक सैन्य समझौता नहीं, बल्कि मध्य पूर्व में बदलते शक्ति संतुलन के बीच पाकिस्तान की विदेश नीति की बड़ी परीक्षा भी बन सकता है।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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