Hindu Mandir In Paris: पेरिस में फ्रांस का पहला पारंपरिक पाषाण हिंदू मंदिर बनकर तैयार हुआ

Hindu Mandir In Paris: पेरिस में ग्वालियर के बलुआ पत्थर और विदेशी संगमरमर से बने फ्रांस के पहले पाषाण हिंदू मंदिर में 6 सितंबर को महंत स्वामी महाराज मूर्ति प्रतिष्ठा करेंगे।

Newstrack Network
Published on: 26 Aug 2026 9:37 PM IST
Hindu Mandir In Paris: पेरिस में फ्रांस का पहला पारंपरिक पाषाण हिंदू मंदिर बनकर तैयार हुआ
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Hindu Mandir In Paris: पश्चिमी यूरोप की सांस्कृतिक राजधानी पेरिस के पूर्वी उपनगर बुसी-सैंट-जॉर्जेस (Bussy-Saint-Georges) में फ्रांस का पहला पारंपरिक, पाषाण-निर्मित हिंदू मंदिर बनकर तैयार हो गया है। लगभग 5,000 वर्ग मीटर के विशाल परिसर में फैला यह भव्य मंदिर प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला, आध्यात्मिक चेतना और भारत-फ्रांस के मजबूत सांस्कृतिक संबंधों का एक अद्वितीय प्रतीक बनकर उभरा है।

1970 का ऐतिहासिक संकल्प और मंदिर की पृष्ठभूमि

इस भव्य मंदिर के निर्माण की नींव पांच दशक पूर्व वर्ष 1970 में ही पड़ गई थी:

योगीजी महाराज का विजन: स्वामीनारायण परंपरा के महान संत योगीजी महाराज लंदन से मुंबई जा रहे थे, तभी उनका विमान पेरिस के ओरली एयरपोर्ट पर कुछ देर के लिए रुका।

पेरिस की धरती पर प्रार्थना: उन्होंने अपने प्रमुख शिष्यों—प्रमुख स्वामी महाराज और महंत स्वामी महाराज—को पेरिस की धरती पर उतरकर प्रार्थना करने का निर्देश दिया और संकल्प व्यक्त किया कि भविष्य में फ्रांस की राजधानी में एक भव्य हिंदू मंदिर का निर्माण होगा।

दशकों बाद साकार हुआ सपना: दशकों के लंबे इंतजार, कड़े प्रयासों और वैश्विक भक्तों के सहयोग के बाद अब वह दिव्य संकल्प साकार हुआ है।

प्राचीन मारू-गुर्जर स्थापत्य कला और वैश्विक पत्थरों का संगम

मंदिर का पूरा ढांचा प्राचीन भारतीय 'मारू-गुर्जर' (Maru-Gurjara) स्थापत्य शैली के सिद्धांतों और शिल्पशास्त्र के नियमों के अनुसार तैयार किया गया है:

शिल्प और संरचना: इस पाषाण मंदिर में 5 भव्य शिखर, 10 विशाल नक्काशीदार गुंबद, 20 कलात्मक स्तंभ, 120 नक्काशीदार गवाक्ष (झरोखे), 49 चरित्र शिल्प पैनल और 4 छतरियां बनाई गई हैं।

ग्वालियर का बलुआ पत्थर और वैश्विक संगमरमर: मंदिर के बाहरी और आंतरिक ढांचे के लिए भारत के ग्वालियर से विशेष बलुआ पत्थर (Sandstone) मंगाया गया है। इसके साथ ही मंदिर की चमक और दिव्यता को बढ़ाने के लिए भारत, इटली, ग्रीस और वियतनाम के उच्च कोटि के सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है।

शिल्पकारों की कला और फ्रेंच इंजीनियरिंग: भारत के कुशल मूर्तिकारों और शिल्पकारों द्वारा पत्थरों पर बारीक पारंपरिक नक्काशी की गई, जिसे पेरिस में आधुनिक फ्रांसीसी इंजीनियरिंग मानकों और भूकंपरोधी तकनीकों के साथ सफलतापूर्वक संयोजित किया गया।

2 से 14 सितंबर तक 'फेस्टिवल ऑफ कल्चर': सीन नदी में जल यात्रा और नगर यात्रा

मंदिर के भव्य उद्घाटन और लोकार्पण के उपलक्ष्य में पेरिस में 2 सितंबर से 14 सितंबर तक एक वृहद सांस्कृतिक महोत्सव—'फेस्टिवल ऑफ कल्चर' (Festival of Culture) का आयोजन किया जा रहा है:

वैदिक महायज्ञ और पालकी यात्रा: उत्सव के दौरान विश्व शांति और सद्भाव के लिए वैदिक महायज्ञ तथा पारंपरिक पालकी यात्राएं निकाली जाएंगी।

सीन (Seine) नदी में जल यात्रा: पेरिस की ऐतिहासिक सीन नदी में विशेष जल यात्रा का आयोजन होगा।

पेरिस की सड़कों पर नगर यात्रा: पेरिस के प्रसिद्ध ऐतिहासिक और प्रमुख स्थलों से होकर एक भव्य नगर यात्रा (शोभायात्रा) निकाली जाएगी, जिसमें भारतीय लोक कला, नृत्य और संगीत का प्रदर्शन होगा।

6 सितंबर को महंत स्वामी महाराज करेंगे मूर्ति प्रतिष्ठा

महोत्सव के मुख्य दिवस पर 6 सितंबर को वर्तमान गुरु महंत स्वामी महाराज द्वारा मंदिर के गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत मूर्ति प्रतिष्ठा और मंदिर का लोकार्पण संपन्न किया जाएगा।

स्वामीनारायण संस्था के अनुसार, यह मंदिर केवल उपासना का स्थल नहीं है, बल्कि यह यूरोप में शांति, विविधता, मानवीय मूल्यों और विभिन्न वैश्विक समुदायों को आपस में प्रेम और सौहार्द से जोड़ने का एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र साबित होगा।

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