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Petrol Diesel Crisis: क्यों कम नहीं होंगे पेट्रोल डीजल के दाम, तीन से चार साल का है ये ग्रहण
Petrol Diesel Crisis: विशेषज्ञों का मानना है अमेरिका ईरान डील के बाद तेल इंडस्ट्री की क्राइसिस अभी खत्म नहीं होने जा रही है। इससे उबरने में महीनों से लेकर सालों तक लग सकते हैं
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Petrol Diesel Crisis: अमेरिका ईरान के बीच समझौते का एलान हो गया है लेकिन इस पर अमल का रास्ता आसान नहीं है।अभी इस समझौते के पूरी तरह लागू होने की कसरत में दिनों से लेकर हफ्तों तक लग सकते हैं अगर समझौता टूट न गया तो, ऐसे में समझौते से जल्दबाजी में बहुत अधिक उम्मीद लगाना बेमानी है। दूसरे इस समझौते के बाद जो लोग ये उम्मीद लगा रहे हैं कि पेट्रोल डीजल की कीमतें कम हो जाएंगी। कच्चे पेट्रोल के आने के रास्ता खुल जाएगा तो ऐसा कुछ फिलहाल होता नहीं दिख रहा है। न ही संभव है। ऐसा विशेषज्ञों का मानना है।
आपूर्ति थमी, रेट चढ़े
विशेषज्ञों के मुताबिक खाड़ी में युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने जब जलपोतों पर हमले की धमकी दी तो हड़कम्प मच गया। और इसके बाद सारे जलपोत जो जहां था वहीं ठहर गया। और स्ट्रेट आफ हार्मुज से होकर सप्लाई होने वाली लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति ठहर गई।
इसके बाद वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में हाल के महीनों में तेज उछाल आया। जिसमें अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते कीमतों में काफी तेजी से उतार चढ़ाव आया।
ब्रेंट क्रूड जो कि संघर्ष शुरू होने से पहले 70 डालर के आसपास था संघर्ष शुरू होने के बाद युद्ध के दौरान 120 डालर तक पहुंच गया।
आज जब समझौते का एलान हुआ तो निवेशकों ने स्वागत किया नतीजतन जापान की निक्की का शेयर इंडेक्स 5 बढ़कर बंद हुआ जबकि साउथ कोरिया में कोस्पी 5.2 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ।
क्या अब सब नार्मल हो जाएगा?
हालांकि विशेषज्ञों ने तेल के मूवमेंट को युद्ध के पहले के स्तर पर तत्काल लौटने को लेकर चेतावनी दी है।
बीबीसी के हवाले से एक रिपोर्ट में लिपोव आयल एसोसिएट के एंड्रू लिपोव ने कहा है कि पहली जरूरत पानी के रास्ते में बिछाई गई माइन्स को साफ करने की होगी जिसमें हफ्तों से लेकर छह महीने तक लग सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में टैंकर समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करने के लिए इंतजार कर रहे हैं। इन जहाजों को लोड करके सामान्य स्थिति में लाने में हफ्तों लग सकते हैं।
यूएस नैवी के रिटायर्ड रीयर एडमिरल मार्क मान्टोगोमरी ने कहा है कि ये एक रात में सब कुछ बदल जाने जैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि सामान्य स्थिति बहाल होने में एक महीने से लेकर 45 दिन तक लग सकते हैं।
तकनीकी मुद्दे और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां
विशेषज्ञों की इन चेतावनियों के संदर्भ में अगर गहराई से देखें तो बात साफ है कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े ऐसे मुद्दे है जो निर्बाध आपूर्ति शुरू होने में बड़ी बाधा है।
एक मीडिया ने तो बड़ी आशंका जताते हुए लिखा है कि पेट्रोल डीजल से ज्यादा चिंताजनक स्थिति रसोई गैस की है। वैश्विक स्तर पर बाधित हो चुकी इसकी आपूर्ति सामान्य होने में या दुरुस्त होने में तीन से चार साल का वक्त लग सकता है। रिपोर्ट में भारत के लिए हालात ज्यादा ही चिंताजनक बताये गए हैं क्योंकि भारत अपनी जरूरतों का 60 फीसदी हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों से मंगाता है। इसे ठीक होने में वक्त लगेगा।
बारुदी सुरंगें हैं बड़ा अवरोध, तेल के कुओं की रिपेयरिंग भी जरूरी
सबसे बड़ा अवरोध है ईरान की बिछाई बारूदी सुरंगों को हटाना। जोकि आसान नहीं है क्योंकि जंग के दौरान जिस तरह से ईरान ने अपने सुरक्षा घेरे को मजबूत करने के लिए लैंड माइंस बिछायी थीं उन्हें हटाना उतना आसान नही है। यह काफी जोखिम भरा काम है। इसलिए इंतजार करना होगा।
युद्ध के दौरान अमेरिका और इस्राइल ने जिस तरह तेल के कुओं को निशाना बनाकर बमबारी की है उन कुओं को चालू करना दूसरी बड़ी चुनौती है। क्योंकि वैसे भी तेल कुओं को एक बार बंद करके दोबारा चालू करना काफी जटिल प्रक्रिया होती है। वहां से पेट्रोल डीजल तैयार होने की समय सीमा को घटाया बढ़ाया नहीं जा सकता है यह काम अपनी रफ्तार से होगा।
जब सबकुछ ठीक हो जाएगा तब भारत तक तेल पहुंचने में 30 से 40 दिन का समय लग सकता है। लेकिन उससे पहले बाकी चीजें दुरुस्त होने जरूरी है। इस लिए पेट्रोल डीजल की दरों में कमी आने की जल्दबाजी में उम्मीद करना बेकार है। बहुत ही सीमित और धीमी गिरावट होगी जो धीरे धीरे महसूस हो सकती है।


