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भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत! इंडोनेशिया से ब्रह्मोस, EVM सहयोग समेत 20 बड़े समझौते, चीन की बढ़ी चिंता
PM Modi Indonesia Visit: ब्रह्मोस मिसाइल, EVM और 20 ऐतिहासिक समझौते; हिंद-प्रशांत में भारत की रणनीतिक ताकत हुई और मजबूत
PM Modi Indonesia Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत रणनीति के लिहाज से ऐतिहासिक मानी जा रही है। इस दौरे में भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स), कृषि, चुनाव प्रबंधन, औद्योगिक विकास, सांस्कृतिक विरासत और प्रौद्योगिकी सहित लगभग 20 महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए।
इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में मिली, जहां भारत अपने स्वदेशी रक्षा उत्पाद ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली और अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल इंडोनेशिया को उपलब्ध कराएगा। विशेषज्ञ इसे भारत के रक्षा निर्यात, स्वदेशी सैन्य उद्योग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक प्रभाव की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में दोनों नेताओं ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, समुद्री सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने का रोडमैप तैयार किया गया।
यह प्रधानमंत्री मोदी की 2023 के बाद इंडोनेशिया की पहली द्विपक्षीय यात्रा है और 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के बाद दोनों देशों के संबंधों में अब तक की सबसे बड़ी प्रगति मानी जा रही है।
रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी सफलता, ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल की होगी आपूर्ति
भारत की रक्षा कूटनीति को इस यात्रा से सबसे बड़ी सफलता मिली। दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली पर महत्वपूर्ण समझौता किया है। इसके तहत इंडोनेशिया अपने रक्षा भंडार को मजबूत करने के लिए भारत से अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइल बैटरियां खरीदेगा। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार इस रक्षा सौदे के तहत इंडोनेशिया भारत से लगभग 630 मिलियन डॉलर (करीब 63 करोड़ डॉलर) के हथियार खरीदेगा।
इसके साथ ही इंडोनेशिया ने भारत की स्वदेशी अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल को भी अपनाने का निर्णय लिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय मिसाइल प्रणालियों की क्षमता और विश्वसनीयता ने वैश्विक बाजार में भारत की साख को मजबूत किया है। इससे 'मेक इन India फॉर द वर्ल्ड' अभियान को भी नई गति मिलेगी।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ेगी
इंडोनेशिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण समुद्री राष्ट्र है और मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) के कारण इसकी रणनीतिक भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।
दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके तहत तटरक्षक बलों के बीच सहयोग मजबूत होगा। समुद्री निगरानी बढ़ाई जाएगी। खोज एवं बचाव (Search and Rescue) अभियान संयुक्त रूप से संचालित किए जाएंगे। समुद्री कानून प्रवर्तन में सहयोग बढ़ेगा। सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त अभ्यास किए जाएंगे। साबांग पोर्ट पर भारत का रणनीतिक प्रभाव बढ़ेगा।
भारत और इंडोनेशिया ने साबांग बंदरगाह के विकास में सहयोग बढ़ाने का भी फैसला किया है। साबांग पोर्ट मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है और भारत की ग्रेट निकोबार परियोजना के रणनीतिक क्षेत्र के निकट होने के कारण इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सहयोग से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री उपस्थिति और रणनीतिक क्षमता मजबूत होगी।
चुनाव प्रबंधन में भारत की तकनीक पर भरोसा, EVM विकसित करने में करेगा सहयोग
भारत की चुनावी प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी मान्यता मिली है। भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) और इंडोनेशिया के आम चुनाव आयोग (KPU) के बीच हुए समझौते के तहत दोनों देश चुनाव प्रबंधन, चुनावी तकनीक, अधिकारियों के प्रशिक्षण, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं और चुनावी अनुसंधान में सहयोग करेंगे। भारत इंडोनेशिया की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) विकसित करने में भी तकनीकी सहायता देगा।
क्रिटिकल मिनरल्स में मजबूत होगी साझेदारी
इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक उद्योगों के भविष्य को देखते हुए दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स पर विशेष समझौता किया है। भारत इंडोनेशिया में निकेल, रेयर अर्थ मिनरल्स, स्टील और परमानेंट मैग्नेट्स के उत्पादन और प्रसंस्करण में निवेश करेगा। इस सहयोग से दोनों देशों के बीच आधुनिक खनन तकनीक, संयुक्त अनुसंधान और नई परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को भी मजबूती मिलेगी।
स्टील सेक्टर में संयुक्त उद्यम
भारत की स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) और इंडोनेशिया की पीटी क्राकाताउ स्टील के बीच संयुक्त उद्यम (Joint Venture) स्थापित करने पर सहमति बनी है। इस परियोजना के तहत इंडोनेशिया में स्टेनलेस स्टील स्लैब निर्माण संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इससे औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा। तकनीक का आदान-प्रदान होगा। दोनों देशों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस्पात क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा।
रेयर अर्थ मैग्नेट्स पर भी महत्वपूर्ण समझौता
रणनीतिक खनिजों की वैश्विक मांग को देखते हुए भारत और इंडोनेशिया ने रेयर अर्थ मैग्नेट्स के क्षेत्र में भी साझेदारी मजबूत करने का फैसला किया। इस दिशा में NFTDC, मिडवेस्ट लिमिटेड और पीटी पर्मिनास के बीच समझौता हुआ है। इसका उद्देश्य वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन का विविधीकरण करना तथा रणनीतिक खनिजों की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ेगा वैज्ञानिक सहयोग
दोनों देशों ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष सहयोग समझौते का विस्तार किया। इससे सैटेलाइट तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, अंतरिक्ष विज्ञान, क्षमता निर्माण और संयुक्त परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।
कृषि सहयोग से मजबूत होगी खाद्य सुरक्षा
भारत ने इंडोनेशिया को कृषि क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सहयोग देने का फैसला किया है। भारत इंडोनेशिया को DWR-162 किस्म के 100 टन उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के बीज उपलब्ध कराएगा। इस पहल का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा मजबूत करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है।
सांस्कृतिक विरासत संरक्षण में भी साथ आए दोनों देश
भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल रणनीतिक और आर्थिक नहीं बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़े हैं। इसी कड़ी में भारत इंडोनेशिया के योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनरुद्धार में सहयोग करेगा।
इसे प्रधानमंत्री मोदी की 'विकास भी, विरासत भी' नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इससे दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
भारत-इंडोनेशिया संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह यात्रा?
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल समझौतों तक सीमित नहीं है बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत भी देती है। रक्षा निर्यात से लेकर समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, डिजिटल सहयोग, चुनावी तकनीक, कृषि, अंतरिक्ष और सांस्कृतिक विरासत तक फैली यह व्यापक साझेदारी दोनों देशों को दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग के नए दौर में ले जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से न केवल भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि 'मेक इन इंडिया', रक्षा निर्यात, आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण और हिंद-प्रशांत में संतुलित शक्ति व्यवस्था के लक्ष्य को भी महत्वपूर्ण बल मिलेगा।


