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PM मोदी का कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक! New Zealand के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते, बढ़ेगी चीन की टेंशन
PM Modi-New Zealand Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे में भारत और न्यूजीलैंड ने रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। 28 अहम समझौतों पर सहमति बनी, 2030 तक व्यापार दोगुना करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी बड़ा फैसला हुआ।
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PM Modi-New Zealand Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के न्यूजीलैंड (New Zealand) दौरे के दौरान भारत (India) और न्यूजीलैंड के बीच कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों (Bilateral Relations) को नई ऊंचाई देते हुए उन्हें रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) में बदलने की घोषणा की है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन (Christopher Luxon) के बीच हुई वार्ता के बाद इस बड़े फैसले का ऐलान किया गया। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच 28 अहम समझौतों (Agreements) पर भी सहमति बनी है।
बैठक में सामने आए 18 बड़े नतीजे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई बैठक में कुल 18 ठोस परिणाम सामने आए। इनमें से 10 समझौतों पर दोनों देशों ने औपचारिक रूप से हस्ताक्षर भी किए। इन समझौतों में अगले चार वर्षों के दौरान दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने, हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में सहयोग बढ़ाने और भारतीय नौसेना (Indian Navy) तथा न्यूजीलैंड रक्षा बल (New Zealand Defence Force) के बीच सहयोग को विस्तार देने पर सहमति बनी।
इसके अलावा दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) को दोगुना करते हुए 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति
भारत और न्यूजीलैंड की ओर से जारी संयुक्त बयान (Joint Statement) में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
दोनों देशों ने नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था (Rules-Based International Order) की रक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से समुद्री सुरक्षा संवाद (Maritime Security Dialogue) शुरू करने पर भी सहमति बनी।
एफटीए के बाद हुआ प्रधानमंत्री मोदी का दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया (Australia) की यात्रा पूरी करने के बाद अपनी तीन देशों की यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन (China) के बढ़ते प्रभाव और आक्रामक रुख को देखते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है।
यह दौरा करीब 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा हाल ही में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) पर बनी सहमति के बाद हो रहा है। इस समझौते को लेकर प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भी खुशी जताई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
बैठक की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दो समुद्री देशों के रूप में भारत और न्यूजीलैंड का घनिष्ठ सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र को नई ताकत प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध शांति के साझा लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों में नई ऊर्जा भर सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक सामान और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने की दिशा में मिलकर काम करने पर सहमति जताई है।
व्यापार और निवेश को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
वर्तमान में भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 2.25 अरब अमेरिकी डॉलर का है। मुक्त व्यापार समझौते और लगभग टैक्स फ्री कारोबारी माहौल बनने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में तेज बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं एफटीए के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश (Investment) की भी बात कही गई है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।
भारतीय समुदाय निभा रहा अहम भूमिका
न्यूजीलैंड में तीन लाख से अधिक भारतीय मूल (Indian Origin) के लोग रहते हैं। वे वहां की राजनीति, अर्थव्यवस्था और व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों से आर्थिक, सामरिक और सामाजिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


