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भारत में पुतिन की एंट्री से Pakistan में खौफ! अगले 30 घंटे में होने वाला है 'सबसे बड़ा गेम चेंज', मुनीर-शहबाज बेचैन
Pakistan Tension: रूस के राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे से पाकिस्तान में बढ़ी चिंता, मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और ऊर्जा समझौतों पर पाक की नजर, अगले 30 घंटे बन सकते हैं रणनीतिक परीक्षा।
Pakistan Tension: भारत और रूस के बीच होने वाला शिखर सम्मेलन हमेशा से क्षेत्रीय राजनीति का केंद्र रहा है। अब जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले 30 घंटे दिल्ली में रहेंगे, तो न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें इस दौरे पर टिकी हैं। खासकर पाकिस्तान के लिए यह दौरा चिंता का विषय बन गया है। पाकिस्तान की सरकार, सेना और खुफिया एजेंसियां हर पल यह देख रही हैं कि मोदी-पुतिन की बैठक में कौन-कौन से समझौते होंगे और इसका उनकी सुरक्षा और रणनीति पर क्या असर होगा।
रक्षा क्षेत्र में पाकिस्तान की चिंता
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता भारत-रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में होने वाली डील है। S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम और भारतीय सैन्य उपकरणों के आधुनिकीकरण की चर्चा पाकिस्तान के लिए सीधे खतरे की घंटी है। पूरी तरह से चालू होने पर यह प्रणाली भारतीय वायुसेना को निर्णायक हवाई श्रेष्ठता देगी। यही नहीं, रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी और हथियार आपूर्ति के इतिहास को देखते हुए, पाकिस्तान को डर है कि भारत की सैन्य ताकत और अधिक बढ़ जाएगी।
ऊर्जा समझौतों से बढ़ी पाक की बेचैनी
रक्षा के अलावा ऊर्जा क्षेत्र में भारत-रूस समझौते भी पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बन सकते हैं। रियायती दरों पर कच्चा तेल मिलने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, जबकि पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। यही वजह है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां इस दौरे पर हर पल नजर बनाए हुए हैं।
शहबाज और आसिम मुनीर की चिंता
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के लिए यह दौरा रणनीतिक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से अहम है। कोई भी डील या समझौता, जो भारत की ताकत बढ़ाए और पाकिस्तान की सुरक्षा को कमजोर करे, उनकी चिंता का मुख्य कारण बन जाएगा।
अगले 30 घंटे, एक अग्निपरीक्षा
दोस्ताना रिश्तों के 77 साल और रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने के मौके पर यह दौरा सिर्फ दिल्ली का कूटनीतिक उत्सव नहीं है। यह इस्लामाबाद के लिए अग्निपरीक्षा की तरह है। अगले 30 घंटे में होने वाले समझौते, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।


