दोस्त या जासूस! स्क्रीन से लेकर फोन कॉल्स पर ChatGPT की नजर, OpenAI के CEO के दावों से टेंशन में यूजर्स

सैम ऑल्टमैन ने बताया कि आने वाले समय में ChatGPT यूजर की स्क्रीन, मीटिंग्स और कॉल्स लेकर काम में मदद कर सकता है।

Sachin Singh
Published on: 19 Aug 2026 3:03 PM IST (Updated on: 19 Aug 2026 3:03 PM IST)
दोस्त या जासूस! स्क्रीन से लेकर फोन कॉल्स पर ChatGPT की नजर,  OpenAI के CEO के दावों से टेंशन में यूजर्स
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ChatGPT: OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने AI के भविष्य को लेकर एक ऐसा दावा किया है, जो आने वाले समय में लोगों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। उनके मुताबिक, ChatGPT का अगला विकसित रूप ऐसा AI असिस्टेंट हो सकता है, जो यूजर की कंप्यूटर स्क्रीन, मीटिंग्स और फोन कॉल्स पर लगातार नजर रख सकेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यूजर खुद तय करेगा कि AI को कौन-सी जानकारी और सेवाओं तक पहुंच दी जाए।

सैम ऑल्टमैन ने Z Fellows के संस्थापक कोरी लेवी के साथ बातचीत में AI असिस्टेंट के भविष्य की तस्वीर सामने रखी। जब उनसे पूछा गया कि ऐसा सिस्टम कब वास्तव में उपयोगी साबित हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों के भीतर ऐसा बदलाव देखने को मिल सकता है।

कंप्यूटर स्क्रीन से लेकर ईमेल तक समझेगा AI

ऑल्टमैन के मुताबिक, भविष्य का AI असिस्टेंट यूजर की स्क्रीन पर चल रही गतिविधियों को समझ सकेगा। वह मीटिंग्स में मौजूद रहकर बातचीत का संदर्भ हासिल कर सकता है और कॉल्स से भी जरूरी जानकारी समझ सकता है।

यूजर चाहे तो इसे ईमेल, टेक्स्ट मैसेज, डॉक्यूमेंट्स और Slack जैसी सेवाओं से भी जोड़ सकता है। इसका मकसद सिर्फ जानकारी जमा करना नहीं होगा, बल्कि अलग-अलग जगह मौजूद सूचनाओं को जोड़कर यूजर को काम के दौरान बेहतर सुझाव देना होगा।

बॉस की तरह आदेश नहीं, साथी की तरह मदद

ऑल्टमैन ने जिस AI सिस्टम की कल्पना बताई है, वह यूजर की जगह खुद फैसले लेने वाला सिस्टम नहीं होगा। इसके बजाय वह एक डिजिटल सहयोगी की तरह काम करेगा।

उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति किसी ग्राहक के लिए बिक्री प्रस्ताव तैयार कर रहा है या किसी रणनीति पर काम कर रहा है, तो AI उसके पुराने ईमेल, दस्तावेज और उपलब्ध जानकारी के आधार पर सुझाव दे सकता है। अगर उसे लगे कि किसी महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान नहीं दिया गया है, तो वह यूजर को आगाह कर सकता है।

निजी जानकारी की सुरक्षा पर उठे सवाल

ऐसी तकनीक जितनी उपयोगी दिखाई देती है, उतने ही बड़े सवाल प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर भी खड़े होते हैं। अगर AI लगातार स्क्रीन देख रहा है, मीटिंग्स सुन रहा है और ईमेल या डॉक्यूमेंट्स तक पहुंच रखता है, तो उसके पास यूजर की बेहद निजी और संवेदनशील जानकारी जमा हो सकती है।

इसलिए इस तरह के सिस्टम की सफलता इस बात पर काफी निर्भर करेगी कि यूजर के पास अपने डेटा पर कितना नियंत्रण होगा। कौन-सी जानकारी AI देख सकता है, किन ऐप्स तक उसकी पहुंच होगी और किस डेटा को वह सेव कर सकता है, इन सभी चीजों के लिए मजबूत नियंत्रण जरूरी होंगे।

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