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शेख हसीना को भारत से पकड़कर लाएगा बांग्लादेश? फांसी की सजा पर जाहेद उर रहमान का बड़ा बयान
Sheikh Hasina Extradition: बांग्लादेश ने शेख हसीना को भारत से वापस लाने की मांग फिर तेज कर दी है। जाहेद उर रहमान ने कहा कि ढाका हसीना की वापसी का इंतजार नहीं करेगा।
Sheikh Hasina Extradition: पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। बांग्लादेश सरकार ने साफ कर दिया है कि वह शेख हसीना के अपनी मर्जी से देश लौटने का इंतजार नहीं करना चाहती, बल्कि उन्हें भारत से वापस लाने की कोशिश करेगी। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सूचना सलाहकार जाहेद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि ढाका का उद्देश्य केवल भारत पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि हसीना को वापस लाकर कानूनी प्रक्रिया के तहत न्याय दिलाना है।
'हसीना को वापस लाना चाहते हैं, सिर्फ दबाव बनाना मकसद नहीं'
ढाका स्थित सचिवालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जाहेद उर रहमान से पूछा गया कि क्या हसीना के प्रत्यर्पण की मांग भारत पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने इससे इनकार करते हुए कहा कि सरकार के पास प्रत्यर्पण की मांग को लेकर कोई ऐसा 'टैक्टिक' नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार हसीना को वापस लाने के लिए गंभीर है और इस मुद्दे को भारत सरकार के सामने एक शर्त के तौर पर रखा गया है। बांग्लादेश ने नई दिल्ली से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील भी की है।
'भारत चाहे तो रिश्ते बेहतर हो सकते हैं'
जाहेद उर रहमान ने यह भी संकेत दिया कि शेख हसीना का प्रत्यर्पण भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए अहम मुद्दा बन चुका है। उनका कहना है कि अगर भारत हसीना को वापस भेजने की दिशा में कदम उठाता है तो दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने का रास्ता खुल सकता है।
बांग्लादेश पहले ही भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग कर चुका है। भारत ने जुलाई में पुष्टि की थी कि उसे ढाका की प्रत्यर्पण याचिका मिल चुकी है और मामले की समीक्षा लागू कानूनी प्रावधानों तथा न्यायिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
हसीना को फांसी की सजा, वापसी पर गिरफ्तारी तय
बांग्लादेश में शेख हसीना को पहले ही मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। जाहेद उर रहमान ने उन्हें मौत की सजा का सामना कर रही दोषी बताया और कहा कि सरकार उन्हें वापस लाना चाहती है।
हालांकि, हसीना की वापसी और उनके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर बांग्लादेश सरकार के अलग-अलग बयानों में 'निष्पक्ष सुनवाई' और 'मौत की सजा लागू होने' दोनों बातें सामने आई हैं। जुलाई में जाहेद ने कहा था कि अगर हसीना वापस आती हैं तो सरकार उन्हें अदालत में अपना बचाव करने का मौका देगी और वह दुनिया के किसी भी बेहतरीन वकील को अपने बचाव में ला सकती हैं।
यानी मौजूदा बयानबाजी में एक तरफ ढाका हसीना को वापस लाने के लिए दबाव बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार न्यायिक प्रक्रिया का हवाला दे रही है।
भारत का रुख क्या है?
नई दिल्ली ने अब तक हसीना को बांग्लादेश को सौंपने पर कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जुलाई में कहा था कि बांग्लादेश की प्रत्यर्पण मांग भारत को मिल चुकी है और उस पर लागू कानूनी प्रावधानों तथा न्यायिक प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्यर्पण का मामला कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है। इसलिए ढाका की ओर से लगातार बढ़ता राजनीतिक दबाव अपने आप में यह तय नहीं करता कि नई दिल्ली हसीना को बांग्लादेश भेजेगी।
5 अगस्त 2024 को भारत पहुंची थीं हसीना
शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हुए आंदोलन के बीच सत्ता से बेदखल होने के बाद भारत पहुंची थीं। इसके बाद बांग्लादेश में उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए और ढाका ने नई दिल्ली से उनके प्रत्यर्पण की मांग की।
हसीना के भारत में रहने का मुद्दा अब सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री की कानूनी स्थिति तक सीमित नहीं है। यह भारत-बांग्लादेश संबंधों का संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दा बन चुका है।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर क्या असर?
हसीना के शासनकाल में भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, कनेक्टिविटी और पूर्वोत्तर भारत के लिए ट्रांजिट जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ा था। सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव के बीच हसीना का प्रत्यर्पण एक बड़ा विवादित मुद्दा बन गया है।
अब ढाका खुलकर कह रहा है कि वह हसीना की स्वैच्छिक वापसी का इंतजार नहीं करेगा। दूसरी ओर, भारत ने प्रत्यर्पण मामले को कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन बताया है। ऐसे में आने वाले दिनों में शेख हसीना का मामला दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी कूटनीतिक परीक्षा बन सकता है।


