शेख हसीना की होगी बांग्लादेश वापसी! सरकार बोली- पूरी सुरक्षा देंगे, फिर मानना होगा अदालत का फैसला

Sheikh Hasina Security: शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई है। बांग्लादेश सरकार ने पूरी सुरक्षा का भरोसा दिया और कहा कि वापसी के बाद कानूनी प्रक्रिया होगी, फैसला अदालत करेगी।

Aditya Kumar Verma
Published on: 12 Aug 2026 1:41 PM IST
Sheikh Hasina Security
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Sheikh Hasina Security: भारत (India) में निर्वासन के बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) ने वापस अपने देश लौटने की इच्छा जताई है। इसी बीच बांग्लादेश सरकार (Bangladesh Government) ने उनके वापस लौटने पर पूरी सुरक्षा देने का वादा किया है। सरकार ने साथ ही साफ किया है कि हसीना के भविष्य का फैसला अदालतें करेंगी और न्यायिक प्रक्रिया में आने वाले फैसले को सभी को मानना होगा।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सूचना और प्रसारण सलाहकार जाहिद उर रहमान (Zahid Ur Rahman) ने कहा कि हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर में अपने घर लौटेंगी। उन्होंने कहा कि जब हसीना वापस लौटेंगी तो उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी और सभी तरह के कानूनी और संवैधानिक अधिकारों (Legal and Constitutional Rights) के साथ न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। जाहिद ने कहा कि इसके बाद अदालत जो भी फैसला सुनाएगी, उसे सभी को स्वीकार करना होगा।

‘आरोपियों के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे’

जाहिद उर रहमान ने कहा कि 2024 के विद्रोह (2024 Uprising) के दौरान हसीना सरकार के खिलाफ सबसे गंभीर अपराधों के आरोपी लोगों के भी नागरिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि चाहे वह शाकिब अल हसन (Shakib Al Hasan) हों, जो अवामी लीग के पूर्व सांसद और बांग्लादेशी क्रिकेटर हैं, या खुद शेख हसीना, सभी के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।

जाहिद ने कहा कि बांग्लादेश में दोबारा शेख हसीना जैसा माफिया शासन (Mafia Rule) नहीं देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसा होने नहीं दिया जाएगा और देश में किसी तरह का फासीवादी माफिया शासन नहीं चलने दिया जाएगा। उन्होंने बांग्लादेश को एक लोकतांत्रिक देश बताया।

हसीना को बताया गया था ‘दोषी नरसंहारकर्ता’

नई दिल्ली (New Delhi) में 5 अगस्त को शेख हसीना ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस (Virtual Press Conference) की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें बांग्लादेश लौटने पर गिरफ्तार होने का डर नहीं है।

इसके बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय (Bangladesh Foreign Ministry) ने शेख हसीना के लिए ‘दोषी नरसंहारकर्ता’ यानी ‘कन्विक्टेड जेनोसाइडर’ (Convicted Genocider) शब्द का इस्तेमाल किया था।

हालांकि, इसके बाद विदेश मंत्री खलीलुर रहमान (Khalilur Rahman), जाहिद उर रहमान और सरकार के अन्य अधिकारियों व मंत्रियों ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस शब्द का इस्तेमाल करने से परहेज किया है।

रॉ चीफ पराग जैन के ढाका दौरे पर भी आया बयान

इसी बीच रॉ (RAW) चीफ पराग जैन (Parag Jain) के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के ढाका (Dhaka) दौरे को लेकर भी बांग्लादेश सरकार की ओर से प्रतिक्रिया दी गई है।

जाहिद उर रहमान ने कहा कि यह दौरा भारत और बांग्लादेश के बीच नियमित बातचीत (Regular Dialogue) का हिस्सा था। उन्होंने साथ ही कहा कि मौजूदा बांग्लादेश सरकार के तहत किसी भी भारतीय एजेंसी या संस्था को बांग्लादेश में उस तरह स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जैसी शेख हसीना के कार्यकाल में होती थी।

‘रॉ चीफ का दौरा बातचीत का हिस्सा’

जाहिद ने कहा कि पराग जैन का ढाका दौरा बांग्लादेश के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस (Directorate General of Forces Intelligence) के प्रमुख के हालिया भारत दौरे जैसा ही था।

उन्होंने कहा कि इस दौरे को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं कि रॉ चीफ चीन से आए थे। जाहिद ने कहा कि इसमें अटकल लगाने जैसी कोई बात नहीं है।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हो सकते हैं और उन मुद्दों पर बातचीत भी हो सकती है। इस तरह बांग्लादेश सरकार ने शेख हसीना की संभावित वापसी और भारत-बांग्लादेश के बीच सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क, दोनों मुद्दों पर अपना रुख सामने रखा है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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