'मैं हाफिज सईद का गुलाम...', सामने आया पाक के पूर्व मंत्री का VIDEO, भारत को भी दी धमकी

Sheikh Rashid Video: पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री शेख राशिद का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह हाफिज सईद को लेकर अपनी निष्ठा जताते हुए खुद को उसका गुलाम बताते और भारत को धमकी देते नजर आ रहे हैं।

Aditya Kumar Verma
Published on: 13 Aug 2026 8:54 AM IST (Updated on: 13 Aug 2026 8:58 AM IST)
Sheikh Rashid Video
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Image Source- Social Media

Sheikh Rashid Video: पाकिस्तान (Pakistan) के पूर्व गृह मंत्री शेख राशिद अहमद का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह एक कार्यक्रम के मंच पर लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) से जुड़े लोगों के साथ बैठे नजर आ रहे हैं। इसी दौरान शेख राशिद अहमद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद (Hafiz Saeed) को लेकर अपनी निष्ठा जताते हुए खुद को उसका गुलाम बताते सुनाई दे रहे हैं।

‘मैं तो हाफिज सईद साहब का गुलाम हूं’

सामने आए वीडियो में शेख राशिद अहमद कहते सुनाई दे रहे हैं, "मैं तो हाफिज सईद साहब का गुलाम हूं।" वह यह भी दावा करते नजर आ रहे हैं कि उनके फोन से हाफिज सईद का नंबर मिलने के बाद अमेरिका (America) ने उन्हें वहां से निकाल दिया था।

इसके बाद शेख राशिद ने भारत (India) को लेकर धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया। वीडियो में वह भारत के खिलाफ कार्रवाई की बात करते हुए नजर आ रहे हैं।

‘न चिड़िया चहकेंगी, न मंदिर में घंटियां बजेंगी’

शेख राशिद ने कथित तौर पर कहा, "न चिड़िया चहकेंगी हिंदुस्तान में, न बिरला जी के मंदिर में घंटियां बजेंगी।" इसके आगे उन्होंने भारत के खिलाफ कार्रवाई की बात करते हुए कहा कि अगर हिंदुस्तान ने पाकिस्तान (Pakistan) की ओर देखा तो अल्लाह उसे नेस्तनाबूद कर देगा।

वीडियो में शेख राशिद यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि वे "पाकिस्तान के साथ और हाफिज सईद साहब के साथ" हैं। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में आतंकवादी संगठनों और मुख्यधारा के नेताओं के कथित रिश्तों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मंच पर कौन-कौन आया नजर?

सामने आए वीडियो में शेख राशिद अहमद के साथ पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (Pakistan Markazi Muslim League) के अध्यक्ष खालिद मसूद संधू (Khalid Masood Sandhu) भी दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा कारी मोहम्मद याकूब शेख (Qari Muhammad Yaqoob Sheikh) की मौजूदगी का भी दावा किया जा रहा है।

हालांकि, सामने आए इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया था, इसकी स्पष्ट जानकारी भी सामने नहीं आई है। इसलिए वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम और बयानों की तारीख को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है।

कौन है हाफिज सईद?

हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) का संस्थापक है और मुंबई 26/11 आतंकी हमलों (Mumbai 26/11 Terror Attacks) के प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल रहा है। अमेरिका ने भी लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी संगठन घोषित किया है।

हाफिज सईद को पाकिस्तान में आतंकी फंडिंग (Terror Funding) से जुड़े मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है। वह लंबे समय से भारत और अमेरिका की जांच एजेंसियों तथा सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर रहा है।

पहले भी लश्कर से संबंधों को लेकर विवाद

शेख राशिद अहमद इससे पहले भी हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंधों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। साल 2012 में अमेरिका में उनके खिलाफ हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंधों को लेकर पूछताछ भी हुई थी।

हालांकि, शेख राशिद ने उस समय अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया था। अब सामने आए इस ताजा वीडियो में हाफिज सईद को लेकर उनके कथित बयान ने पुराने विवादों को फिर से चर्चा में ला दिया है।

वीडियो सामने आने के बाद फिर उठे सवाल

शेख राशिद अहमद के इस कथित वीडियो ने पाकिस्तान की राजनीति (Pakistan Politics) में आतंकवादी संगठनों और मुख्यधारा के राजनीतिक नेताओं के बीच कथित रिश्तों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर हाफिज सईद को लेकर शेख राशिद की कथित निष्ठा और भारत के खिलाफ दिए गए धमकी भरे बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि सामने आए वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है और इसके रिकॉर्ड होने की तारीख की भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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