A फॉर Apple नहीं… G फॉर गन, J फॉर जिहाद! तालिबान बच्चों को सिखा रहा ‘आतंक का अल्फाबेट’, खुलासे ने हिल उठा पूरा विश्व

Taliban children brainwashing: हाल ही में तालिबान को लेकर एक झकझोर देने वाला बड़ा खुलासा हुआ है। एक शख्स की कहानी सामने आई है जो गृहयुद्ध के वक़्त से लेकर साल 2001 तक अफगानिस्तान में रहा और उसने तालिबान को उभरते हुए देखा।

Priya Singh Bisen
Published on: 8 Dec 2025 3:10 PM IST (Updated on: 8 Dec 2025 3:10 PM IST)
Taliban children brainwashing
X

Taliban children brainwashing (PHOTO: SOCIAL MEDIA)

Taliban children brainwashing: अफगानिस्तान में तालिबान की मानसिकता और उसकी शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बेहद चौंका देने वाला खुलासा सामने आया है। जहां दुनियाभर के बच्चे स्कूलों में A फॉर Apple, B फॉर Ball पढ़ते हैं, वहीं तालिबान के कब्जे वाले क्षेत्रों में बच्चों को A फॉर अहमद, G फॉर Gun और J फॉर Jihad पढ़ाया जा रहा है। इस indoctrination का उद्देश्य है - कम उम्र में ही बच्चों को 'कट्टरपंथ' और 'हिंसा' की राह पर धकेल देना...।

यह खुलासा 'इंडिपेंडेंट' की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आया है, जिसमें 'मैवंद बनेयी' नाम के एक व्यक्ति ने अपनी कहानी साझा की है। कभी तालिबान के लिए आत्मघाती हमलावर बनने को तैयार किए गए मैवंद आज ब्रिटेन में NHS की एक फिजियोथेरेपी क्लिनिक में कार्यरत हैं। उनके हाथ, जिन्होंने कभी AK-47 थामी थी, अब लोगों को दर्द से बहुत राहत देते हैं।

बचपन से शुरू हो जाता है 'ब्रेनवॉश'!

मैवंद के मुताबिक, जब वे पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में मौजूद एक इस्लामी मदरसे में पढ़ाई किया करते थे, तब उन्हें पहली बार अंग्रेजी भाषा इस रूप में पढ़ाई गई:

- A for Ahmed (अहमद)

- G for Gun (गन)

- J for Jihad (जिहाद)

ऐसे ही शब्द उनके लिए शिक्षा की शुरुआत थे। न किताबों से दोस्ती, विज्ञान, खेल या भविष्य था... थी तो बस लड़ाई, धर्म और युद्ध की मानसिकता।

मदरसे नहीं, आतंक की फैक्ट्री

सोवियत कब्जे के वक़्त, अफगानिस्तान में युद्ध, विनाश और राजनीतिक अस्थिरता ने हजारों बच्चों को अनाथ, बेघर और बेसहारा बना दिया। इसी माहौल में तालिबान की विचारधारा ने जड़ें जमाईं। मैवंद ने बताया “हमारे लिए शहीद होना सबसे बड़ा गौरव था। आत्मघाती हमलावरों को ‘हीरो’ की तरह पढ़ाया जाता था।”

ऐसा कहा जाता है कि साल 1980 के दशक में जहां अफगानिस्तान में तकरीबन 700 मदरसे थे, वहीं सोवियत सेना की वापसी के बाद इनकी संख्या बढ़कर तकरीबन 35 हज़ार तक पहुंच गई। आज अफगानिस्तान में लगभग 70 लाख बच्चे मदरसों में पढ़ रहे हैं, जिनमें से कई भविष्य में तालिबान का हिस्सा बन सकते हैं।

तालिबान का उदय

सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने वाले मुजाहिदीन, जो कभी अमेरिका और पश्चिमी देशों के सहयोग से पनपे थे, बाद में आपसी सत्ता संघर्ष में उलझ कर गए। उसी अराजकता में तालिबान उभरा, जिसकी अगुवाई मुल्ला उमर कर रहे थे। तालिबान का अर्थ है - छात्र, लेकिन इन छात्रों को शिक्षा नहीं, बल्कि हथियार, नफरत और युद्ध सिखाया गया।

ओसामा बिन लादेन और आतंक की पाइपलाइन

मैवंद उस शरणार्थी कैंप में रहते थे जहां कभी ओसामा बिन लादेन अल-कायदा के लिए आतंकियों की भर्ती करता था। कई बच्चों को बताया जाता था “यदि तुम लड़ते हुए मारे गए तो 'स्वर्ग' मिलेगा।” ऐसी कहानियों ने बचपन में ही उनके दिमाग पर गहरी छाप छोड़ दी।

जीवन बदलने वाली शिक्षा

लेकिन मैवंद की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कई संघर्षों और सवालों के बाद उनके पिता ने उन्हें एक सेकुलर स्कूल में भेजा। वहां शिक्षा और वास्तविक दुनिया ने उनकी सोच को बदलना शुरू किया। धीरे-धीरे वह सच्चाई समझने लगे कि जिहाद, गन और मौत किसी समाज का भविष्य कभी नहीं हो सकते। आखिरकार साल 2001 में वे ब्रिटेन पहुंच गए और वहीं से उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई।

आज का अफगानिस्तान क्या है ?

देखा जाए तो... आज भी तालिबान के कब्जे वाले अफगानिस्तान में लाखों बच्चे कट्टर मानसिकता के बोझ तले अपनी असल पहचान खोते जा रहे हैं। शिक्षा वहां आज भी 'ज्ञान का प्रकाश' नहीं बल्कि 'उग्रवाद का बीज' बोने का साधन है। रिपोर्ट्स के अनुसार, आगामी सालों में यही बच्चे तालिबान की अगली पीढ़ी बन सकते हैं।

बता दे, दुनिया तकनीक, विज्ञान और शांति की ओर अग्रसर हैं, वहीं तालिबान जैसे संगठन शिक्षा का इस्तेमाल बच्चों को हथियार बनाने के लिए कर रहे हैं।यदि शिक्षा आतंक का ज़रिया बन जाए, तो पूरे विश्व में सबसे बड़ा खतरा यह नहीं होगा कि क्या पढ़ाया जा रहा है, बल्कि यह होगा कि क्या सिखाया जा रहा है।

Priya Singh Bisen
ABOUT THE AUTHOR

Priya Singh Bisen

Content Writer Mail ID - Priyasinghbisen96@gmail.comPriyasinghbisen96@gmail.com

Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

Next Story