तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, थर्राए लोग, जमीन से 173 किमी नीचे केंद्र

तिब्बत में 7.0 की तीव्रता वाला भूकंप आया है। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 173 किलोमीटर नीचे बताया जा रहा है।

Sachin Singh
Published on: 22 Oct 2026 8:42 PM IST (Updated on: 22 Oct 2026 8:55 PM IST)
तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, थर्राए लोग, जमीन से 173 किमी नीचे केंद्र
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Tibet Earthquake: तिब्बत में गुरुवार को 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। भूकंपीय आंकड़ों के मुताबिक, इसका केंद्र जमीन से करीब 173 किलोमीटर नीचे था। भूकंपीय आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को तिब्बत में आए भूकंप की तीव्रता 7.0 दर्ज की गई। इसका केंद्र जमीन से लगभग 173 किलोमीटर नीचे बताया गया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में भूकंप से हुई जनहानि या संपत्ति के नुकसान का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।

भूकंप के लिहाज से किसी घटना की तीव्रता के साथ-साथ उसकी गहराई भी अहम होती है। हालांकि, केवल तीव्रता और गहराई के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी इलाके में कितना नुकसान हुआ। इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों से मिलने वाली जानकारी और अधिकारियों के आकलन की जरूरत होती है।

फ्लैश फ्लड के बाद खतरनाक भूकंप

भूकंप की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब नेपाल और तिब्बत की सीमा के पास अगस्त में आई प्राकृतिक आपदा के बाद राहत, बचाव और खोज अभियान जारी हैं। उस आपदा में बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई घर, सड़कें और पुल बह गए थे। साथ ही, जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा था और हजारों लोग लापता हो गए थे। ऐसे हालात में तिब्बत में आए नए भूकंप ने एक बार फिर इस पहाड़ी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे की ओर ध्यान खींचा है।

नेपाल में पिछला भूकंप 8 सितंबर को आया

दी गई जानकारी के मुताबिक, नेपाल में इससे पहले 8 सितंबर को भूकंप आया था। तिब्बत में गुरुवार को आए भूकंप के बीच नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास के क्षेत्र पर भी ध्यान बना हुआ है। यह इलाका पहाड़ी भूभाग और प्राकृतिक जोखिमों के कारण पहले भी बड़ी आपदाओं का सामना कर चुका है।

26 अगस्त की आपदा के बाद अब भी जारी है राहत और बचाव का काम

तिब्बत में भूकंप ऐसे समय आया है, जब नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को हुई आपदा के बाद राहत और पुनर्वास से जुड़े काम जारी हैं। उस दिन बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आया था। इसके बाद अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बन गई थी।

तेज बहाव अपने साथ कई घर, सड़कें और पुल बहा ले गया। इससे इलाके में आवाजाही और संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई। आपदा की चपेट में जलविद्युत परियोजनाएं भी आईं, जिन्हें नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। इस घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए और उनकी तलाश के लिए अभियान चलाए गए।

पहाड़ी इलाकों में ऐसी आपदाओं के बाद राहत पहुंचाना और लापता लोगों की तलाश करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। दुर्गम रास्तों, क्षतिग्रस्त पुलों और खराब मौसम के कारण बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

ग्लेशियर पिघलने और बढ़ते तापमान को लेकर चिंता

इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को लेकर अधिकारियों और शोधकर्ताओं की चिंताएं भी बढ़ी हैं। खास तौर पर बदलते मौसम, ग्लेशियरों के पीछे हटने और तापमान में बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

चीनी शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण छिंगहाई-तिब्बत पठार में ग्लेशियरों का नुकसान तेज हो रहा है। उनके मुताबिक, ग्लेशियरों में बदलाव भविष्य में कुछ तरह की प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

ग्लेशियर पहाड़ी क्षेत्रों में पानी के भंडार की तरह काम करते हैं। जब उनमें तेजी से बदलाव होता है, तो आसपास के पर्यावरण और जल प्रवाह पर भी असर पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में बर्फ, चट्टानों और पानी के अचानक नीचे आने से बाढ़ या भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, किसी खास आपदा के पीछे कौन-से कारण जिम्मेदार थे, यह जानने के लिए अलग से वैज्ञानिक जांच जरूरी होती है।

ब्रह्मपुत्र समेत कई बड़ी नदियों का स्रोत है यह पठार

छिंगहाई-तिब्बत पठार केवल पहाड़ी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कई बड़ी नदियों के लिए भी बेहद अहम है। ब्रह्मपुत्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय नदियों का स्रोत इसी क्षेत्र से जुड़ा है। इन नदियों का पानी अलग-अलग देशों और इलाकों में रहने वाले लोगों की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।

ऐसे में ग्लेशियरों में बदलाव, तापमान में वृद्धि और जल प्रवाह में होने वाले परिवर्तन का असर केवल तिब्बत तक सीमित नहीं रह सकता। नीचे की ओर बसे समुदायों के लिए भी पर्यावरण में होने वाले बदलाव चिंता का विषय हैं। इसी वजह से इस क्षेत्र में ग्लेशियरों और जल संसाधनों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी माना जाता है।

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Sachin Singh is a media professional with 4 years of experience in the field of journalism and digital media. After completing his education at Jamia Millia Islamia Central University, he has worked with reputed media organizations such as Editor ji, ABP News and Doordarshan. Currently, Sachin Singh is working as a Content Writer with News Track, where he contributes to fast-paced digital news coverage and content creation. His areas of interest include politics, national and international affairs, and food. With experience across different formats of journalism, he focuses on producing informative, accurate, and engaging content for digital audiences.

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