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भारत पर फिर बौखलाए ट्रंप! हिंदुस्तान पर 100% टैरिफ की तैयारी...अमेरिकी संसद में बिल पर मंथन
Trump 100 Percent Tariff on India: अमेरिका में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले लिंडसे ग्राहम बिल में भारत पर 100% टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है। जानिए ट्रंप को मिली शक्तियां, स्टेनी होयर का संशोधन और भारत-अमेरिका व्यापार पर इसका असर।
Trump 100 Percent Tariff on India: अमेरिका में रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े ऐतिहासिक विधेयक को लेकर वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मची हुई है। अमेरिकी संसद का निचला सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' इस विधेयक पर अंतिम मुहर लगाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन इस बीच पेश किए गए नए संशोधनों ने वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस विधेयक के पारित होने से भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक साझीदारों पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम अमेरिकी टैरिफ (आयात शुल्क) लगने का गंभीर खतरा लगातार मंडरा रहा है।
क्या है 'लिंडसे ओ ग्राहम रूस प्रतिबंध अधिनियम'?
अमरीकी सीनेट ने पिछले महीने भारी बहुमत (86-11) से 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट' को पारित किया था। इस बिल का मुख्य उद्देश्य रूस के शीर्ष नेतृत्व, उसके ऊर्जा क्षेत्र और उन जहाजों के 'शैडो फ़लीट' पर कड़े प्रतिबंध लगाना है, जो तेल की आपूर्ति पर लगे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को चकमा देने में मास्को की मदद करते हैं। वाशिंगटन का मानना है कि रूस का कच्चा तेल व्यापार सीधे तौर पर यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध की फंडिंग कर रहा है। इसी के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वे रूस से तेल खरीदने वाले शीर्ष देशों पर 100 फीसदी तक का टैरिफ थोप सकें।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में संशोधनों का दौर
सीनेट द्वारा पास किए गए मूल बिल में किसी देश का सीधा नाम नहीं था, बल्कि तेल और गैस आयात करने वाले दुनिया के पांच सबसे बड़े देशों का उल्लेख था। हालांकि, हाउस रूल्स कमेटी द्वारा सार्वजनिक किए गए नए संशोधनों में डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जो सीधे तौर पर भारत को निशाना बनाता है। स्टेनी होयर के संशोधन में भारत के साथ-साथ चीन, तुर्की, अज़रबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज करने की सिफारिश की गई है, जिससे इन देशों पर 100% शुल्क लगाया जा सके।
विपक्ष का विरोध
एक तरफ जहां भारत जैसे देशों को नामजद करने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति को अप्रत्याशित टैरिफ अधिकार देने का कड़ा विरोध भी शुरू हो गया है। डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स, जो राष्ट्रपति ट्रंप को व्यापक टैरिफ अधिकार देने के सख्त खिलाफ हैं, उन्होंने धारा 113 को पूरी तरह से रद्द करने के लिए एक संशोधन पेश किया है। यही धारा राष्ट्रपति को रूस के व्यापारिक सहयोगियों पर द्वितीयक टैरिफ (सेकंडरी टैरिफ) लगाने की असीमित शक्ति देती है। मीक्स ने इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में प्रतिबंधों से 90 दिनों की छूट देने और यूक्रेन को 15 अरब डॉलर का रक्षा ऋण देने से जुड़े संशोधन भी रखे हैं।
समय की कमी और 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव का दबाव
3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी संसद के पास इस कानून को पारित कराने के लिए केवल चार कार्य दिवस का समय बचा है। यदि यह विधेयक बिना किसी बड़े बदलाव के प्रतिनिधि सभा से पास होकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है, तो भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में बड़ा मोड़ आ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी संसद पर टिकी हैं कि क्या भारत को इस 100% टैरिफ के खतरे से राहत मिलेगी या ट्रंप प्रशासन को व्यापारिक दबाव बनाने का एक नया हथियार मिल जाएगा।


