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Trump को बड़ा झटका! 25 अमेरिकी राज्यों ने नए टैरिफ के खिलाफ कोर्ट में ठोका मुकदमा
अमेरिका में 25 डेमोक्रेटिक राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। राज्यों का आरोप है कि ट्रंप ने कानूनी अधिकारों से आगे बढ़कर आयात शुल्क लगाए हैं।
Donald Trump Tariffs Row (PC: Reuters)
Donald Trump Tariffs Row: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर टैरिफ नीति को लेकर बड़ा झटका लगा है। ट्रम्प प्रशासन को अपने देश के ही राज्यों से कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। 25 डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर करते हुए आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति ने नए आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने में अपनी कानूनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है।
25 राज्यों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
सोमवार को यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर इस मुकदमे में जुलाई में लागू किए गए नए डबल डिजिट टैरिफ को चुनौती दी गई है। ये शुल्क 60 व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाए गए थे। ट्रंप प्रशासन का आरोप था कि ये देश जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया नया टैरिफ
ये नए टैरिफ उस समय लागू किए गए जब ट्रंप के पहले लगाए गए अस्थायी टैरिफ की समयसीमा समाप्त हो गई। इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में ट्रंप के चर्चित "लिबरेशन डे टैरिफ" को रद्द कर दिया था और कहा था कि राष्ट्रपति ने जिस कानून का इस्तेमाल किया, वह इस तरह के व्यापक टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता।
न्यूयॉर्क अटॉर्नी जनरल का बड़ा आरोप
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हार के बाद ट्रंप प्रशासन अब एक नए बहाने से फिर से अमेरिकी परिवारों और कारोबारों पर गैरकानूनी तरीके से टैक्स थोपने की कोशिश कर रहा है।
उनका कहना है कि यह कदम अदालत के फैसले की भावना के खिलाफ है और इसका सीधा असर उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर पड़ेगा।
व्हाइट हाउस ने किया बचाव
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने मुकदमे का बचाव करते हुए कहा कि ये टैरिफ पूरी तरह कानूनी हैं और अमेरिकी श्रमिकों तथा कारोबारों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई देश जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक नहीं लगाता, तो इससे अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचता है और ऐसी स्थिति में कार्रवाई करना उचित है।
ट्रंप का दावा- टैरिफ से लौटेगी मैन्युफैक्चरिंग
ट्रंप लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि ऊंचे आयात शुल्क अमेरिका में विनिर्माण (Manufacturing) को दोबारा मजबूत करेंगे और विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम होगी।
इसी रणनीति के तहत उन्होंने पहले 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का इस्तेमाल करते हुए लगभग सभी देशों से आने वाले आयात पर भारी टैरिफ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका का लगातार बढ़ता व्यापार घाटा राष्ट्रीय आपातकाल जैसी स्थिति है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही खारिज कर दी थी दलील
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि IEEPA राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। अदालत के फैसले के बाद प्रशासन को उन आयातकों के लिए रिफंड प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी जिन्होंने पहले टैरिफ का भुगतान किया था।
इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने अस्थायी 10% वैश्विक टैरिफ लागू किए, लेकिन उनकी अवधि 24 जुलाई की मध्यरात्रि को समाप्त हो गई।
अब किस कानून के तहत लगाए गए नए टैरिफ?
इस बार ट्रंप प्रशासन ने Trade Act, 1974 की Section 301 का सहारा लिया। यह प्रावधान उन देशों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति देता है जो अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापारिक नीतियां अपनाते हैं।
जुलाई में लगाए गए नए टैरिफ अमेरिका के 99 प्रतिशत से अधिक आयात को प्रभावित करते हैं।
राज्यों का तर्क:
मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का कहना है कि प्रशासन ने Forced Labour का मुद्दा केवल एक बहाना बनाया है ताकि अदालत द्वारा पहले अवैध घोषित किए जा चुके टैरिफ को नए रूप में दोबारा लागू किया जा सके।
उनका यह भी तर्क है कि व्यापक आयात शुल्क लगाने से दुनिया में जबरन श्रम जैसी वास्तविक समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसका बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ेगा।


