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Trump का ‘भारत वाला दांव’! अमेरिका में वोटर लिस्ट के SIR की क्यों उठी मांग, 2026 चुनाव से पहले क्या है मकसद?
Trump India SIR Model: आखिर ट्रंप को भारत जैसा एसआईआर क्यों चाहिए?
Trump India SIR Model
Trump India SIR Model: अमेरिका में 2026 के मिड-टर्म चुनाव (Midterm Elections 2026) से पहले वोटर लिस्ट (Voter List) और चुनावी व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। पिछले कुछ दिनों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारतीय चुनावी व्यवस्था की तारीफ कर रहे हैं। पहले उन्होंने भारत में इस्तेमाल होने वाली फोटो वाली पहचान यानी फोटो आईडी (Photo ID) की तारीफ की और अब अमेरिका में भारत जैसा एसआईआर (SIR) लागू करने की वकालत कर रहे हैं। ट्रंप ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट भी किया है।
आखिर ट्रंप को भारत जैसा एसआईआर क्यों चाहिए? अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के सत्यापन (Voter Verification) पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है। क्या अमेरिका में भी भारत की तरह वोटर लिस्ट का शुद्धीकरण (Voter List Purification) होगा। इन सवालों को ट्रंप के दावों और उनके सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए समझना जरूरी है।
भारत की तरह अमेरिका में भी वोटर लिस्ट के शुद्धीकरण की चर्चा
अमेरिका में वोटर लिस्ट की शुद्धता (Voter Roll Accuracy) को लेकर बहस तेज हो चुकी है। अलग-अलग जगहों पर इसे लेकर चर्चाएं और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या अमेरिका भी भारत की तरह चुनाव से पहले वोटिंग प्रक्रिया (Voting Process) को सत्यापित करेगा।
ट्रंप लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अमेरिका की वोटर लिस्ट में गैर-नागरिक मतदाताओं (Non-Citizen Voters) की पहचान की जाए। उनका दावा है कि वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता से जुड़े रिकॉर्ड की जांच में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता मिले हैं, जो अमेरिकी नागरिक नहीं हैं।
ट्रंप का दावा, 24 हजार से ज्यादा गैर-नागरिक मतदाता मिले
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 24 हजार से ज्यादा गैर-नागरिक मतदाताओं की पहचान की गई है। ट्रंप का तर्क है कि गैर-नागरिक मतदाता मुख्य रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) को वोट करते हैं। उनके मुताबिक इससे रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) और उसकी नीतियों पर असर पड़ता है।
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिड-टर्म चुनाव (US Midterm Election 2026) होना है। ऐसे में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की जांच और नागरिकता सत्यापन को लेकर ट्रंप की सक्रियता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
12 करोड़ 80 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड का किया गया विश्लेषण
ट्रंप ने अपने दावे को आंकड़ों के साथ पेश किया है। उनके सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार वर्ष 2020 के वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया गया। इस प्रक्रिया में करीब 12 करोड़ 80 लाख मतदाताओं (128 Million Voters) का शुरुआती विश्लेषण किया गया।
ट्रंप का दावा है कि इस शुरुआती जांच में 24 हजार गैर-नागरिक मतदाताओं की पहचान हुई है। इतना ही नहीं, उन्होंने संकेत दिया है कि अभी करीब 3 करोड़ 20 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच बाकी है। ट्रंप का कहना है कि इस जांच के बाद गैर-नागरिक मतदाताओं की संख्या और बढ़ सकती है।
ट्रंप ने ‘सेव अमेरिका एक्ट’ का भी किया जिक्र
डोनाल्ड ट्रंप इस पूरे मुद्दे को अमेरिका के हित (American Interests) से जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि हर हाल में ‘सेव अमेरिका एक्ट’ (Save America Act) को पास किया जाना चाहिए। ट्रंप ने वर्ष 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (US Presidential Election 2020) का भी जिक्र किया और कई गंभीर दावे किए।
ट्रंप का कहना है कि अगर 2020 के चुनाव में अवैध वोटों (Illegal Votes) और चुनावी गड़बड़ियों को हटा दिया जाता, तो वह चुनाव जीत जाते। हालांकि, इन दावों में कितना दम है, यह अलग बहस का विषय है। फिलहाल उनका पूरा फोकस वोटर लिस्ट की जांच, वोटर सत्यापन और चुनावी व्यवस्था को मजबूत करने पर है।
अमेरिका में भारत जैसा SIR क्यों बना बड़ा मुद्दा?
भारत में चुनावों से पहले एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) के दौरान फर्जी वोटर, वोटर लिस्ट की जांच, वोटों का सत्यापन और वोटर लिस्ट के शुद्धीकरण जैसे शब्द चर्चा में रहते हैं। अब अमेरिका में भी इसी तरह की शब्दावली सुनाई दे रही है।
ट्रंप फर्जी वोटर (Fake Voters) और वोट में गड़बड़ी (Voting Irregularities) जैसे मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं। उनका कहना है कि नए कानून के जरिए चुनावी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। भारत में भी चुनावों के दौरान वोट चोरी और वोटर लिस्ट की शुद्धता को लेकर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। अमेरिका में ट्रंप भी वोटों के सत्यापन (Vote Verification) और वोटर लिस्ट की शुद्धता पर जोर दे रहे हैं।
इसी वजह से अमेरिका में भारत जैसे एसआईआर की चर्चा तेज हो गई है। ट्रंप की बयानबाजी में फोटो आईडी, फर्जी वोटर, वोटर सत्यापन, वोटों का शुद्धीकरण और गैर-नागरिक मतदाताओं जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
भारत की चुनावी व्यवस्था की तारीफ कर चुके हैं ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप पहले ही भारत की चुनावी व्यवस्था (Indian Electoral System) की तारीफ कर चुके हैं। वह भारत में इस्तेमाल होने वाले फोटो आईडी कार्ड (Photo ID Card) का जिक्र कर चुके हैं। इतना ही नहीं, ट्रंप भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) का नाम लेकर भारतीय चुनाव व्यवस्था की तारीफ भी कर चुके हैं।
अब अमेरिका में वोटर लिस्ट के सत्यापन को लेकर उनकी सक्रियता को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। ट्रंप भारत की तरह अमेरिका में भी ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, जिसमें मतदाता की पहचान और नागरिकता का सत्यापन किया जा सके।
गैर-नागरिक मतदाताओं के आंकड़ों से समझिए ट्रंप की चिंता
व्हाइट हाउस (White House) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में अलग-अलग देशों में जन्मे ऐसे लोगों की संख्या बताई गई है, जिनके बारे में गैर-नागरिक मतदाता होने का दावा किया गया है। इनमें मेक्सिकन मूल के करीब 3800 वोटर बताए गए हैं।
वहीं कनाडाई मूल के करीब 950 वोटर बताए गए हैं। फिलिपींस और जमैका मूल के करीब 900 वोटर, जर्मन मूल के करीब 700, ब्रिटिश मूल के करीब 650, क्यूबन मूल के करीब 450, वियतनामी मूल के करीब 400, हैती मूल के करीब 400 और दक्षिण कोरियाई मूल के करीब 350 वोटर बताए गए हैं।
ट्रंप के दावे के मुताबिक इसके अलावा करीब 14500 ऐसे वोटर हैं, जिनका जन्म दूसरे देशों में हुआ है, लेकिन अमेरिका में उन्हें वोटिंग का अधिकार है और वे मतदान करते हैं।
मिड-टर्म चुनाव से पहले क्यों अहम है यह मुद्दा?
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिड-टर्म चुनाव होना है। ऐसे में वोटर लिस्ट की शुद्धता और गैर-नागरिक मतदाताओं की पहचान का मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद अहम हो गया है। ट्रंप इसे चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता (Election Integrity) और अमेरिका के हित से जोड़ रहे हैं।
यही कारण है कि भारत में चर्चा में रहे एसआईआर मॉडल से अमेरिका की मौजूदा बहस की तुलना की जा रही है। ट्रंप की कोशिश वोटर लिस्ट की जांच, मतदाताओं की पहचान और नागरिकता के सत्यापन को चुनावी बहस के केंद्र में लाने की है। मिड-टर्म चुनाव से पहले यह मुद्दा कितना बड़ा राजनीतिक असर पैदा करता है, यह आने वाले समय में साफ होगा।


