भारतीयों से पंगा ले आधी सत्ता गंवा बैठे ट्रंप! वीजा और टैरिफ बना 'जी का जंजाल', मिडटर्म चुनाव में बदला गणित

कार्नेगी सर्वे के मुताबिक, 62 फीसदी भारतीय-अमेरिकियों ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में सिर्फ 19 फीसदी लोग रहे।

Sachin Singh
Published on: 5 Nov 2026 7:54 PM IST (Updated on: 5 Nov 2026 7:55 PM IST)
भारतीयों से पंगा ले आधी सत्ता गंवा बैठे ट्रंप! वीजा और टैरिफ बना जी का जंजाल, मिडटर्म चुनाव में बदला गणित
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Donald Trump: अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को ऐसा झटका लगा है, जिसने अमेरिकी राजनीति की तस्वीर बदल दी है। संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स ने बढ़त हासिल कर ली है और रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा खत्म हो गया है। इस हार के पीछे महंगाई, ईरान युद्ध और ट्रंप की नीतियों को लेकर लोगों की नाराजगी बड़ी वजह मानी जा रही है। लेकिन इस चुनाव में एक और बात खास रही कि भारतीय-अमेरिकी वोटरों का बदलता रुख। जिस समुदाय के एक हिस्से ने 2024 में ट्रंप का समर्थन किया था, वहां अब डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में मजबूत झुकाव दिखाई दे रहा है।

भारतीय-अमेरिकियों के वोट ने क्यों खींचा सबका ध्यान?

अमेरिका की आबादी में भारतीय-अमेरिकियों की हिस्सेदारी करीब 1.5 फीसदी है, लेकिन चुनावी राजनीति में उनका असर उनकी संख्या से कहीं ज्यादा माना जाता है। इसकी वजह है उनकी मजबूत वोटिंग भागीदारी, आर्थिक स्थिति और कई अहम चुनावी राज्यों में मौजूदगी।

कार्नेगी एंडोमेंट और YouGov के अक्टूबर 2026 के सर्वे के मुताबिक, 62 फीसदी भारतीय-अमेरिकी नागरिकों ने अपने इलाके में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को वोट देने की इच्छा जताई, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में सिर्फ 19 फीसदी लोग थे। सीनेट चुनावों वाले राज्यों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को 63 फीसदी और रिपब्लिकन उम्मीदवारों को 21 फीसदी समर्थन मिला। यह सर्वे चुनाव से पहले किया गया था, इसलिए इसे वास्तविक मतदान के नतीजे के बजाय वोटरों के रुझान के तौर पर समझना चाहिए।

ट्रंप से क्यों दूर होने लगे भारतीय-अमेरिकी?

भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच ट्रंप को लेकर नाराजगी की कई वजहें सामने आई हैं। इनमें सबसे अहम मुद्दा H-1B वीजा पर सख्ती है। अमेरिका में टेक्नोलॉजी समेत कई क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों की बड़ी संख्या काम करती है। ऐसे में H-1B वीजा से जुड़े नियमों और फीस में बदलाव का सीधा असर इस समुदाय पर पड़ सकता है।

ट्रंप प्रशासन ने कुछ नए H-1B वीजा आवेदनों पर एक लाख डॉलर की फीस लगाने का कदम उठाया। कार्नेगी के सर्वे में करीब दो-तिहाई भारतीय-अमेरिकियों ने इस फीस का विरोध किया। इससे साफ है कि वीजा और नौकरी से जुड़े फैसले इस समुदाय के लिए कितने अहम हैं।

डिपोर्टेशन की तस्वीरों ने भी बढ़ाई नाराजगी

ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति भी भारतीय-अमेरिकियों के बीच चर्चा और चिंता का विषय बनी। अमेरिका से भारतीय नागरिकों को वापस भेजे जाने और कुछ लोगों को हथकड़ी तथा पैरों में बेड़ियां लगाकर विमान से भारत लाए जाने की तस्वीरों पर सवाल उठे।

आपके दिए आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में 3,567 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया। वहीं, 1 जनवरी से 22 जुलाई 2026 के बीच 1,273 और भारतीयों को वापस भेजा गया। इस तरह के मामलों ने अमेरिका में रहने वाले भारतीय परिवारों और प्रवासियों के बीच चिंता बढ़ाई।

भारत-अमेरिका रिश्तों और पाकिस्तान को लेकर भी नाराजगी

ट्रंप से भारतीय-अमेरिकियों की दूरी की एक वजह भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर उनकी नीतियों पर असंतोष भी है। कार्नेगी के नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के सर्वे में 55 फीसदी लोगों ने भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को संभालने के ट्रंप के तरीके को नापसंद किया था। सिर्फ 20 फीसदी लोगों ने इसे पसंद किया, जबकि 25 फीसदी ने कोई राय नहीं दी।

इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर के साथ ट्रंप की मुलाकातों को लेकर भी भारतीय समुदाय के कुछ लोगों में नाराजगी बताई गई। भारत से जुड़े मुद्दों पर ट्रंप के रुख और पाकिस्तान के साथ उनके संपर्कों ने इस असंतोष को और बढ़ाया।

नस्लवाद और भेदभाव की चिंता भी बढ़ी

भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच नस्लीय भेदभाव को लेकर भी चिंता सामने आई है। आपके दिए विवरण के मुताबिक, सितंबर 2026 में अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक सिख व्यक्ति को निशाना बनाती हुई तस्वीर साझा की थी। इसके कैप्शन को नस्लवादी बताते हुए आलोचना हुई और बाद में पोस्ट हटा दी गई।

इसके अलावा भारतीय मूल के लोगों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई। आपके दिए आंकड़ों में FBI के 2025 के हेट क्राइम डेटा का हवाला देते हुए बताया गया है कि सिखों के खिलाफ अपराधों में 24.6 फीसदी और हिंदुओं के खिलाफ अपराधों में 12 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

सिर्फ वोट नहीं, आर्थिक और सामाजिक ताकत भी

भारतीय-अमेरिकी समुदाय का प्रभाव सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं है। इस समुदाय के लोग टेक्नोलॉजी, मेडिकल, फाइनेंस और बिजनेस जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में काम करते हैं। चुनावी चंदा जुटाने और राजनीतिक अभियानों में आर्थिक योगदान देने की क्षमता भी उन्हें अहम बनाती है।

कैलिफोर्निया, टेक्सास, न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों में भारतीय-अमेरिकियों की बड़ी आबादी है। वहीं जॉर्जिया, मिशिगन, पेंसिल्वेनिया और नॉर्थ कैरोलिना जैसे राज्यों में भी उनकी मौजूदगी बढ़ रही है। ऐसे राज्यों में करीबी मुकाबलों के दौरान उनका वोट कई सीटों पर अहम भूमिका निभा सकता है।

ट्रंप के लिए आगे की राह आसान नहीं

मिडटर्म चुनावों में हार के बाद ट्रंप को अब संसद में डेमोक्रेट्स के मजबूत विरोध का सामना करना पड़ेगा। महंगाई, ईरान युद्ध और इमिग्रेशन जैसे मुद्दों पर उनकी नीतियों को लेकर सवाल और तेज हो सकते हैं। भारतीय-अमेरिकियों के बीच भी रिपब्लिकन समर्थन में आई कमी उनके लिए एक राजनीतिक संकेत है।

हालांकि, किसी एक समुदाय के वोटिंग रुझान को पूरे चुनावी नतीजे की वजह नहीं माना जा सकता। लेकिन कार्नेगी सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के बीच ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को लेकर समर्थन पहले जैसा नहीं रहा। यह बदलाव आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति और भारत-अमेरिका संबंधों, दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।

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Sachin Singh is a media professional with 4 years of experience in the field of journalism and digital media. After completing his education at Jamia Millia Islamia Central University, he has worked with reputed media organizations such as Editor ji, ABP News and Doordarshan. Currently, Sachin Singh is working as a Content Writer with News Track, where he contributes to fast-paced digital news coverage and content creation. His areas of interest include politics, national and international affairs, and food. With experience across different formats of journalism, he focuses on producing informative, accurate, and engaging content for digital audiences.

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