TRENDING TAGS :
India US Trade: भारत-अमेरिका व्यापार संबंध होंगे और मजबूत, सीआईआई समिट में बोले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर
India US Trade: सीआईआई बिजनेस समिट 2026 में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई। वहीं शक्तिकांत दास ने भारत की आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर दिया।
India US Trade (Image Credit-Social Media)
India US Trade: सीआईआई के सालाना बिजनेस समिट 2026 को संबोधित करते हुए भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों की बढ़ती मजबूती पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि हम भारतीय कंपनियों को अमेरिका में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि सरकार और उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत बनाया जा सके।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, ''सीआईआई के सालाना बिजनेस समिट 2026 में बोलते हुए मजा आया। मैंने भारत-अमेरिका के आर्थिक रिश्तों की बढ़ती मजबूती पर जोर दिया। हम ट्रेड के मौके बढ़ाने, रेगुलेटरी रुकावटों को कम करने और भारतीय बिजनेस को दोनों देशों के फायदे के लिए यूनाइटेड स्टेट्स में इन्वेस्ट करने के लिए बढ़ावा देने के लिए कमिटेड हैं। साथ मिलकर, हम सरकार और बिजनेस के बीच इस जरूरी पुल को और मजबूत कर सकते हैं।''
इससे पहले 'सीआईआई एनुअल बिजनेस समिट 2026' को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत की मजबूती का आधार मजबूत आर्थिक स्थिरता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद सरकार की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग व्यवस्था स्थिर बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि जैव ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन केंद्र सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे। उन्होंने कहा कि भारत बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती को और मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।
उन्होंने कहा, "कॉरपोरेट कंपनियों की बैलेंस शीट अब पहले की तुलना में काफी मजबूत है, जिससे नए निवेश को समर्थन मिलेगा।" साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार सुधारों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस मामले में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है।
हालांकि, दास ने चेतावनी दी कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर भारी लागत का बोझ डालती रहेंगी।


