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US Green Card Fees Hike 2026: अमेरिका में ग्रीन कार्ड लेना होगा महंगा! ट्रंप के नए प्रस्ताव से भारतीयों की बढ़ेगी मुश्किल
US Green Card Fees Hike 2026: ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी नागरिकता आवेदन शुल्क में 75-80% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। इससे भारतीय छात्रों, H-1B वीजा धारकों और ग्रीन कार्ड आवेदकों पर असर पड़ सकता है।
US Green Card Fees Hike 2026
US Green Card Fees Hike 2026: चका-चौंध भरी जीवन शैली, बेहतरीन शिक्षा, नौकरी जैसी खूबियों के चलते अमेरिका हमेशा से ही लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा है। अगर आप भी अमेरिका में बसने, वहां नौकरी करने या भविष्य में अमेरिकी नागरिक बनने का सपना देख रहे हैं, तो आने वाले समय में यह सपना पहले से ज्यादा महंगा पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी नागरिकता के आवेदन शुल्क में करीब 75 से 80 फीसदी तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। हालांकि यह नियम अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन यदि इसे मंजूरी मिलती है तो इसका सीधा असर लाखों भारतीयों पर पड़ेगा। अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के अलावा वहां पढ़ाई और नौकरी की योजना बना रहे छात्रों व पेशेवरों के लिए भी यह फैसला आर्थिक चुनौती बन सकता है।
नागरिकता आवेदन की फीस में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security) ने नागरिकता के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म N-400 की आवेदन फीस 760 डॉलर से बढ़ाकर 1,330 डॉलर करने का प्रस्ताव दिया है। यानी करीब 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी। वहीं ऑनलाइन आवेदन करने वालों की फीस 710 डॉलर से बढ़ाकर 1,280 डॉलर करने का प्रस्ताव है। जो लगभग 80 प्रतिशत अधिक है। हालांकि संघीय गरीबी मानक के 400 प्रतिशत से कम आय वाले परिवारों के लिए 380 डॉलर की मौजूदा फीस बरकरार रखने की बात कही गई है, लेकिन शुल्क में मिलने वाली छूट और फीस माफी जैसी सुविधाएं खत्म करने का भी सुझाव दिया गया है।
यह प्रस्ताव अभी सार्वजनिक टिप्पणी (Public Comment) के चरण में है। कम से कम 60 दिन तक लोगों की राय लेने के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है।
भारतीयों पर क्यों पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2026 तक अमेरिका में करीब 67 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इनमें लगभग 37.7 लाख भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक और 23.1 लाख अनिवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं।
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां से बड़ी संख्या में लोग रोजगार, उच्च शिक्षा और स्थायी निवास के लिए अमेरिका जाते हैं। ऐसे में नागरिकता प्रक्रिया महंगी होने का सीधा असर भारतीय समुदाय पर पड़ना तय माना जा रहा है।
पहले की तुलना में घट रही ग्रीन कार्ड पाने वाले भारतीयों की संख्या
बीते कुछ वर्षों में भारतीयों को मिलने वाले ग्रीन कार्ड की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
वर्ष| भारतीयों को मिले ग्रीन कार्ड
2022| 1,27,010
2023| 78,070
2024| 66,800
इन आंकड़ों से साफ है कि तीन वर्षों में भारतीयों को जारी किए गए ग्रीन कार्ड में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई है। यदि आवेदन प्रक्रिया और महंगी होती है, तो इसका असर भविष्य के आवेदनों पर भी दिखाई दे सकता है।
H-1B वीजा पर भी पहले हो चुकी है कोशिश
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में विदेशी पेशेवरों के लिए नियम सख्त करने की कोशिश की हो।
सितंबर 2025 में H-1B वीजा आवेदन शुल्क को करीब 2,000 डॉलर से बढ़ाकर 1 लाख डॉलर करने का प्रस्ताव रखा गया था। यह शुल्क उन कंपनियों पर लागू होना था, जो विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करती हैं। जबकि बोस्टन की एक संघीय अदालत ने इस प्रस्ताव को गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया था। अब नागरिकता आवेदन शुल्क बढ़ाने का नया प्रस्ताव उसी सख्ती की अगली कड़ी माना जा रहा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विदेश मामलों के जानकार प्रो. धनंजय त्रिपाठी का मानना है कि यह केवल राजस्व बढ़ाने का मामला नहीं है। उनके अनुसार भारतीय पेशेवर वैध दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया के तहत अमेरिका जाते हैं, इसलिए इसे अवैध प्रवासन से जोड़ना उचित नहीं है। उनका कहना है कि इस तरह के कदमों का उद्देश्य विदेशी, खासकर भारतीय कुशल पेशेवरों की संख्या सीमित करना हो सकता है।
छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स के सामने बढ़ेगी चुनौती
अमेरिका भारतीय छात्रों की पहली पसंद रहा है। हर साल हजारों छात्र वहां उच्च शिक्षा और रिसर्च के लिए जाते हैं। कई छात्रों को स्कॉलरशिप भी मिलती है, लेकिन आवेदन और इमिग्रेशन प्रक्रिया महंगी होने से आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और रिसर्च सेक्टर में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों पर भी इसका असर पड़ सकता है। कई कंपनियां कर्मचारियों को शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग या उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजती हैं। बढ़ती लागत के कारण कंपनियां ऐसे कार्यक्रमों में कटौती कर सकती हैं।
क्या अमेरिका का आकर्षण कम हो रहा है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षा, रिसर्च और करियर के लिहाज से अमेरिका अब भी दुनिया का सबसे मजबूत केंद्र है। वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर, विश्वविद्यालय और रिसर्च सुविधाएं आज भी बेहतरीन मानी जाती हैं।
लेकिन लगातार सख्त होती इमिग्रेशन नीतियां और बढ़ती लागत कई छात्रों और पेशेवरों को कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी और यूरोप के अन्य देशों की ओर आकर्षित कर सकती हैं। यदि यह रुझान बढ़ता है तो अमेरिका को दुनिया की प्रतिभाओं को आकर्षित करने में भविष्य में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। शुरुआती दौर में यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे लागू होने से पहले सार्वजनिक टिप्पणियों तथा अंतिम सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। लेकिन यदि इसे मंजूरी मिल जाती है तो अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की राह पहले की तुलना में काफी महंगी हो जाएगी। इसका असर सिर्फ अमेरिका में रह रहे भारतीयों पर ही नहीं, बल्कि वहां पढ़ाई, नौकरी और भविष्य बनाने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं पर भी देखने को मिल सकता है।


