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सीजफायर के बाद भी टला नहीं खतरा! इन ताकतवर मुस्लिम मुल्कों में हाई अलर्ट, अरब वर्ल्ड में महा-दहशत
US Iran Ceasefire: मध्य पूर्व में भले ही कागजों पर युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा हो चुकी हो, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
US Iran Ceasefire
US Iran Ceasefire: मध्य पूर्व में भले ही कागजों पर सीजफायर की घोषणा हो चुकी हो, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीजफायर का ऐलान किए जाने के कुछ ही घंटों बाद खाड़ी क्षेत्र में अचानक खतरे के सायरन बजने लगे। कुवैत, सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात और कतर जैसे देशों में एक साथ सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं, जिससे यह साफ संकेत मिला कि हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
कुवैत की सेना ने बयान जारी कर कहा कि उसका एयर डिफेंस सिस्टम लगातार दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में लगा हुआ है। वहीं बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी सायरन बजाकर नागरिकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। इस अचानक अलर्ट ने पूरे क्षेत्र में भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया। सऊदी अरब के सिविल डिफेंस विभाग ने भी अपने पूर्वी इलाकों और राजधानी रियाद में शुरुआती चेतावनी जारी की। इससे आम लोगों में चिंता और डर बढ़ गया। दूसरी ओर, यूनाइटेड अरब अमीरात ने पुष्टि की कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रूप से ईरान की ओर से आने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों को इंटरसेप्ट कर रहे हैं।
कतर ने स्थिति को और गंभीर बताते हुए अपने नागरिकों को घरों में ही रहने की सलाह दी और सुरक्षा खतरे को “हाई लेवल” घोषित कर दिया। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भले ही कूटनीतिक स्तर पर सीजफायर की बात हो रही है, लेकिन जमीन पर खतरा अभी भी बना हुआ है। इसी बीच इजरायल की सेना ने दावा किया है कि ईरान की ओर से मिसाइलें दागी गई हैं और उन्हें रोकने के लिए रक्षा प्रणाली सक्रिय है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से सुरक्षित और खुला नहीं होता, तब तक इस तरह के हमलों की आशंका बनी रहेगी।
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट इस पूरे संघर्ष का सबसे अहम केंद्र बन गया है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। यदि यह रास्ता बाधित होता है, तो इसका सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका और इजरायल अपने हमले रोक देते हैं, तो ईरान भी खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य कार्रवाई बंद कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आपसी समन्वय बना रहता है, तो अगले दो हफ्तों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट के जरिए सुरक्षित आवाजाही बहाल की जा सकती है।
हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के साथ बातचीत का मतलब यह नहीं है कि संघर्ष पूरी तरह खत्म हो गया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, जब तक 10 बिंदुओं वाली योजना पर पूरी सहमति नहीं बनती, तब तक इस संघर्ष को समाप्त नहीं माना जाएगा। इस बीच यह भी खबर है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता पाकिस्तान में हो सकती है। अगर यह बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो मौजूदा सीजफायर को आगे बढ़ाया जा सकता है। लेकिन मौजूदा तनावपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि यह कूटनीतिक प्रयास कितने सफल साबित होंगे।


