US China Tech War: अमेरिका का बड़ा कदम, 'चिप्स स्मगलिंग' रोकने के लिए नया कानून पारित

US China Tech War: अमेरिकी सीनेट ने ‘स्टॉप स्टीलिंग अवर चिप्स एक्ट’ पारित कर चीन में एडवांस्ड अमेरिकी सेमीकंडक्टरों की तस्करी रोकने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

Newstrack/IANS
Published on: 23 May 2026 10:12 AM IST
US Senate
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US China Tech War: अमेरिकी सीनेट ने एक द्विदलीय कानून पारित किया है, जिसका उद्देश्य चीन में एडवांस्ड अमेरिकी सेमीकंडक्टरों की तस्करी को रोकना है। अमेरिका में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि इन चिप्स का इस्तेमाल चीनी सेना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े कार्यों के लिए किया जा सकता है।

'स्टॉप स्टीलिंग अवर चिप्स एक्ट' नामक यह कानून रिपब्लिकन सीनेटर माइक राउंड्स ने पेश किया था, जबकि डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वार्नर ने इसका समर्थन किया। यह बिल ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी (बीआईएस) के भीतर एक व्हिसलब्लोअर प्रोत्साहन कार्यक्रम स्थापित करेगा, ताकि अवैध सेमीकंडक्टर निर्यात की रिपोर्टिंग को बढ़ावा दिया जा सके।

राउंड्स ने कहा, "मुझे खुशी है कि 'स्टॉप स्टीलिंग अवर चिप्स एक्ट' सीनेट से पारित हो गया है।" उन्होंने कहा, "अमेरिका ने अमेरिकी-निर्मित सेमीकंडक्टरों को गलत हाथों में जाने से रोकने के लिए बड़े कदम उठाए हैं, खासकर चीन के हाथों में। इसके बावजूद चीन इन चिप्स की अपने देश में तस्करी करता रहा है।"

राउंड्स ने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी गंभीर होती जा रही हैं। हमारा कानून बीआईएस की निर्यात नियंत्रण लागू करने की क्षमता को और मजबूत करेगा। इसके तहत अवैध गतिविधियों के बारे में विश्वसनीय जानकारी देने वाले व्हिसलब्लोअर को इनाम देकर उन्हें आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।"

यह कानून अब अंतिम मंजूरी के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा जा सकेगा। वार्नर ने सीनेट में हुए इस मतदान को अमेरिका के निर्यात नियंत्रण को और सख्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम बताया। वार्नर ने कहा, "आज सीनेट में 'स्टॉप स्टीलिंग अवर चिप्स एक्ट' का पारित होना, हमारे निर्यात नियंत्रण तंत्र को मजबूत करने और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"

उन्होंने आगे कहा, "चूंकि चीन अवैध नेटवर्क के जरिए अमेरिका की एडवांस्ड एआई तकनीक हासिल करने की कोशिश लगातार कर रहा है, इसलिए हमें इन उल्लंघनों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए और अधिक मजबूत उपायों की जरूरत है।"इस कानून के अनुसार, बीआईएस को कानून लागू होने के 120 दिनों के भीतर व्हिसलब्लोअर द्वारा जानकारी जमा करने के लिए एक सुरक्षित सार्वजनिक मंच तैयार करना होगा। यह बिल एक "एक्सपोर्ट कंप्लायंस अकाउंटेबिलिटी फंड" भी स्थापित करेगा, जिसे निर्यात नियंत्रण उल्लंघनों पर लगाए गए जुर्माने से प्राप्त राशि से वित्तपोषित किया जाएगा।

इस प्रस्ताव के तहत, जो व्हिसलब्लोअर ऐसी मौलिक जानकारी देंगे, जिसके आधार पर निर्यात नियंत्रण से जुड़े मामलों में सफल कार्रवाई हो सके, उन्हें जुर्माने से मिली कुल राशि का 10 से 30 प्रतिशत तक हिस्सा इनाम के तौर पर दिया जा सकता है। हालांकि, अपने सरकारी कर्तव्यों का पालन कर रहे संघीय कर्मचारियों और आतंकवाद या प्रतिबंधों की सूची से जुड़े व्यक्तियों को यह इनाम नहीं दिया जाएगा।

इस कानून में व्हिसलब्लोअर की पहचान गोपनीय रखने और उनके खिलाफ किसी भी तरह की बदले की भावना से की गई कार्रवाई से सुरक्षा देने की गारंटी भी शामिल है। नियोक्ताओं को उन कर्मचारियों को नौकरी से निकालने, परेशान करने या उनके साथ भेदभाव करने से रोका जाएगा, जो कानून के दायरे में रहते हुए निर्यात नियंत्रण उल्लंघनों की रिपोर्ट करते हैं।

इस बिल में यह भी कहा गया है कि जिन रिपोर्टों को विश्वसनीय माना जाएगा, उन पर 60 दिनों के भीतर औपचारिक जांच शुरू करना अनिवार्य होगा। जब तक जांच जारी रहेगी, व्हिसलब्लोअर को हर 30 दिनों में जांच की प्रगति से जुड़ी जानकारी (स्टेटस अपडेट) दी जाएगी।

राउंड्स के कार्यालय ने बताया कि रिपोर्टों में कम से कम आठ ऐसे चीनी तस्करी नेटवर्क की पहचान की गई है, जिनमें से प्रत्येक 100 मिलियन डॉलर से अधिक के लेन-देन में शामिल है। बयान में यह भी कहा गया कि कुछ प्रतिबंधित चिप्स उन चीनी संस्थाओं तक पहुंच गईं, जिन पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इनमें सैन्य अनुसंधान संस्थान और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।

हाल के वर्षों में अमेरिका ने एडवांस्ड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी पर निर्यात नियंत्रण और कड़े कर दिए हैं, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटिंग और सैन्य तकनीक को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। अमेरिकी अधिकारियों ने बार-बार यह तर्क दिया है कि अमेरिकी कंपनियों द्वारा डिजाइन की गई उन्नत चिप्स, यदि किसी तीसरे देश के नेटवर्क के जरिए चीन तक पहुंचती हैं, तो वे चीन की रक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत कर सकती हैं।

Vineeta Pandey

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