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शुरू हो चुका है तीसरा विश्व युद्ध? जानें वो 3 शर्तें जो दुनिया को 'महाविनाश' में झोंक देती हैं
World War 3 Criteria: ईरान-इजरायल युद्ध और खामेनेई की मौत के बाद क्या शुरू होगा तीसरा विश्व युद्ध? जानें वर्ल्ड वॉर घोषित होने की 3 बड़ी शर्तें और सुपरपावर्स की भूमिका।
World War 3 Criteria: मिडिल ईस्ट से आ रही खबरों ने पूरी दुनिया की सांसें रोक दी हैं। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों ने ईरान के परमाणु ठिकानों को मलबे में तब्दील कर दिया है। इसी बीच ईरान की सरकारी मीडिया ने आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि उनके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अब इस दुनिया में नहीं रहे। इस खबर के बाद ईरान ने प्रतिशोध की आग में दुबई, बहरीन, कुवैत और कतर पर मिसाइलों की बौछार कर दी है। दूसरी ओर, रूस-यूक्रेन युद्ध अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है। इन विनाशकारी घटनाओं ने हर इंसान के मन में एक ही खौफनाक सवाल पैदा कर दिया है— क्या हम तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की दहलीज पर खड़े हैं? आखिर कब कोई क्षेत्रीय संघर्ष आधिकारिक तौर पर 'विश्व युद्ध' बन जाता है? आइए समझते हैं इसके पीछे का गणित।
देशों की संख्या नहीं
आम धारणा के विपरीत, किसी भी युद्ध को 'वर्ल्ड वॉर' घोषित करने के लिए शामिल देशों की कोई तय संख्या कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। इंटरनेशनल कानून में इसकी कोई लिखित परिभाषा नहीं है; यह शब्द ऐतिहासिक और रणनीतिक है। इतिहासकार बताते हैं कि अगर किसी लड़ाई में दुनिया की महाशक्तियां शामिल हों और युद्ध की लपटें कई महाद्वीपों तक फैल जाएं, तो उसे विश्व युद्ध कहा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि दर्जनों देश आपस में लड़ रहे हों लेकिन वे एक ही भौगोलिक सीमा (जैसे सिर्फ यूरोप) के भीतर हों, तो वह क्षेत्रीय युद्ध ही कहलाएगा। इसके उलट, यदि केवल 5-10 शक्तिशाली देश अलग-अलग महाद्वीपों और समुद्री रास्तों पर लड़ने लगें, तो उसे ग्लोबल वॉर माना जा सकता है।
महाशक्तियों की सीधी भिड़ंत और सैन्य गठबंधनों का रोल
विश्व युद्ध की सबसे बड़ी और अनिवार्य शर्त है- सुपरपावर्स की सीधी भागीदारी। जब अमेरिका, रूस, चीन जैसी परमाणु संपन्न ताकतें और NATO या 'एक्सिस' जैसे मिलिट्री गठबंधन सीधे आमने-सामने आ जाते हैं, तब युद्ध वैश्विक हो जाता है। पहले और दूसरे विश्व युद्ध में यही हुआ था; ताकतवर देश अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए मैदान में उतरे और छोटे स्थानीय झगड़े महाविनाश में बदल गए। आज ईरान और इजरायल के बीच की लड़ाई में अगर अमेरिका, रूस और चीन सीधे तौर पर अपनी पूरी सैन्य शक्ति झोंक देते हैं, तो यह तीसरे विश्व युद्ध का अलार्म होगा।
दुनिया का गुटों में बंटना और समुद्री रास्तों पर कब्जा
विश्व युद्ध का एक और बड़ा पैमाना है दुनिया का दो स्पष्ट गुटों में बंट जाना, जैसा कि दूसरे विश्व युद्ध में 'एलाइड पावर्स' और 'एक्सिस पावर्स' के बीच हुआ था। जब देश अपने रणनीतिक हितों के लिए गुटबाजी करते हैं, तो स्थानीय टकराव ग्लोबल बन जाते हैं। इसके साथ ही, युद्ध का दायरा जमीन से निकलकर समुद्री रास्तों और हवाई क्षेत्रों तक फैलना चाहिए। पहले विश्व युद्ध में 30 से ज्यादा देश शामिल थे, जबकि दूसरे में यह संख्या 50 पार कर गई थी और करीब 10 करोड़ सैनिक युद्ध में लगे थे। वर्तमान में विशेषज्ञ ईरान संकट को 'क्षेत्रीय युद्ध' की श्रेणी में रख रहे हैं, लेकिन अगर इसमें रूस और चीन की सीधी एंट्री होती है, तो दुनिया को 'तीसरे विश्व युद्ध' की आधिकारिक घोषणा सुनने में देर नहीं लगेगी।


