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जिनपिंग को 2 या 3 बार आया हार्ट अटैक! पूर्व तिब्बती नेता के दावे से मचा हड़कंप, अब आखिर कौन होगा उत्तराधिकारी?
पूर्व तिब्बती निर्वासित सरकार के प्रमुख लोबसांग सांगे ने दावा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को कम से कम दो बार हार्ट अटैक आया है और यह संख्या तीन भी हो सकती है।
Xi Jinping Health: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सेहत को लेकर एक नए दावे ने दुनिया की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। पूर्व तिब्बती निर्वासित सरकार के प्रमुख लोबसांग सांगे ने दावा किया है कि शी जिनपिंग को कम से कम दो बार हार्ट अटैक आ चुका है और यह संख्या तीन भी हो सकती है। सांगे का कहना है कि उन्हें यह जानकारी चीन के एक वरिष्ठ पूर्व अधिकारी से मिली थी, जिनसे उनकी एक घंटे से ज्यादा समय तक बातचीत हुई थी।
लोबसांग सांगे ने यह दावा ANI पॉडकास्ट में किया। बातचीत के दौरान उन्होंने न सिर्फ जिनपिंग की सेहत को लेकर सवाल उठाए, बल्कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में उनकी पकड़, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाए जाने और चीन में सत्ता के उत्तराधिकारी को लेकर बढ़ती चिंता पर भी बात की। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिनपिंग को हार्ट अटैक आने के दावे की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। न ही इस दावे के समर्थन में कोई मेडिकल रिकॉर्ड या आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट सामने रखी गई है। इसलिए इसे फिलहाल एक अनाम सूत्र के हवाले से किया गया दावा ही माना जा सकता है।
जिनपिंग की सेहत पर सांगे ने क्या कहा?
लोबसांग सांगे ने शी जिनपिंग के हालिया सार्वजनिक कार्यक्रमों और उनके हाव-भाव का जिक्र करते हुए कहा कि चीन के एक वरिष्ठ पूर्व अधिकारी ने उन्हें बताया था कि जिनपिंग को दो बार हार्ट अटैक आ चुका है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि शायद जिनपिंग को तीसरा हार्ट अटैक भी आया हो। सांगे ने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति काफी दबाव में हैं और इसका असर उनकी सेहत और फैसले लेने की क्षमता पर पड़ सकता है। उन्होंने जिनपिंग के चेहरे और उनके चलने के अंदाज में बदलाव का भी जिक्र किया।
इतना ही नहीं, सांगे ने जिनपिंग के लिए ‘मेंटल फॉग’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया और इसे चीन के सैन्य नेतृत्व में हो रही बड़ी हलचल से जोड़ने की कोशिश की। हालांकि, इन दावों को लेकर भी कोई स्वतंत्र मेडिकल या आधिकारिक पुष्टि नहीं है। यानी जिनपिंग की सेहत को लेकर इस समय जो बातें सामने आई हैं, वे किसी मेडिकल रिपोर्ट पर आधारित नहीं हैं, बल्कि सांगे के उस दावे पर आधारित हैं जिसमें उन्होंने एक अज्ञात पूर्व चीनी अधिकारी का हवाला दिया है।
जिनपिंग के उत्तराधिकारी को लेकर भी बड़ा सवाल
सांगे की बातचीत का एक अहम हिस्सा चीन में शी जिनपिंग के संभावित उत्तराधिकारी को लेकर था। उन्होंने इसे ‘Emperor's dilemma’ यानी ‘सम्राट की दुविधा’ बताया। सांगे के मुताबिक, किसी बेहद ताकतवर नेता के सामने एक बड़ी समस्या होती है। अगर वह समय रहते अपने उत्तराधिकारी का नाम घोषित कर देता है, तो वह व्यक्ति धीरे-धीरे इतना ताकतवर हो सकता है कि आगे चलकर मौजूदा नेता के लिए चुनौती बन जाए।
दूसरी तरफ, अगर नेता उत्तराधिकारी का नाम घोषित नहीं करता है तो उसके पद छोड़ने के बाद सत्ता को लेकर अनिश्चितता और संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी तर्क के आधार पर सांगे का कहना है कि शी जिनपिंग शायद सार्वजनिक तौर पर किसी उत्तराधिकारी का नाम घोषित करने से बच सकते हैं।
चीन में उत्तराधिकारी की चर्चा क्यों अहम?
शी जिनपिंग चीन की राजनीति में बेहद मजबूत स्थिति में हैं। ऐसे में उनके बाद सत्ता किसके हाथ में जाएगी, यह सवाल चीन की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सांगे का कहना है कि अगर जिनपिंग किसी एक व्यक्ति को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हैं, तो वह नेता पार्टी के भीतर अपना प्रभाव बढ़ा सकता है। इससे भविष्य में सत्ता का संतुलन बदल सकता है।
लेकिन अगर उत्तराधिकारी का नाम सामने नहीं आता है तो भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन के समय सत्ता के लिए खींचतान की स्थिति पैदा होने का खतरा रहेगा। इसी वजह से सांगे ने जिनपिंग की स्थिति को ‘Emperor's dilemma’ से जोड़ते हुए चीन के भविष्य के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।
क्या वाकई बीमार हैं शी जिनपिंग?
शी जिनपिंग की सेहत को लेकर इस तरह की चर्चाएं पहले भी सोशल मीडिया पर सामने आती रही हैं। खासकर तब, जब वह कुछ समय के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों से कम दिखाई देते हैं। लेकिन हालिया गतिविधियां इस मामले में एक अलग तस्वीर भी पेश करती हैं। चीनी आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, जिनपिंग 3 सितंबर को किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में शामिल होने और मिस्र की राजकीय यात्रा के बाद बीजिंग लौटे।
इससे यह साबित नहीं होता कि जिनपिंग पूरी तरह स्वस्थ हैं, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि वह उच्च स्तर की सार्वजनिक और कूटनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। इसलिए उनके दो या तीन बार हार्ट अटैक आने के दावे को फिलहाल पक्की मेडिकल जानकारी के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता। जब तक कोई मेडिकल रिकॉर्ड, आधिकारिक बयान या स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आती, तब तक यह एक अपुष्ट दावा ही रहेगा।
कौन हैं लोबसांग सांगे?
लोबसांग सांगे 2011 से 2021 तक सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन यानी तिब्बती निर्वासित प्रशासन के निर्वाचित सियॉन्ग यानी राजनीतिक प्रमुख रहे हैं। सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन का मुख्यालय भारत के धर्मशाला में है और यह निर्वासन में रहने वाले तिब्बतियों का प्रतिनिधित्व करता है।
वर्तमान में सांगे हार्वर्ड लॉ स्कूल के ईस्ट एशियन लीगल स्टडीज कार्यक्रम में सीनियर विजिटिंग फेलो हैं। सांगे की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी उनके हालिया बयान को समझने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह लंबे समय से तिब्बत को लेकर चीन की नीतियों के आलोचक रहे हैं।


