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BRICS Summit: 15 साल की उम्र में गांव भेजे गए थे शी जिनपिंग, ऐसे बने चीन के सबसे ताकतवर नेता
Xi Jinping Story: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बचपन संघर्षों से भरा रहा। 15 साल की उम्र में गांव भेजे गए, किसानों के साथ रहे और बाद में छिंगहुआ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चीन के सबसे ताकतवर नेता बने।
Xi Jinping Life Story: दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में दुनिया की नजर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर भी रहेगी। चीन के विदेश मंत्रालय ने उनके भारत दौरे की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। आज शी जिनपिंग चीन की सत्ता के सबसे ताकतवर चेहरों में हैं, लेकिन उनकी जिंदगी की शुरुआत ऐसी नहीं थी जैसी किसी राजनीतिक परिवार के बेटे की कल्पना की जाती है।
एक दौर ऐसा भी आया जब चीन के वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता के बेटे शी जिनपिंग को महज 15 साल की उम्र में बीजिंग से सैकड़ों किलोमीटर दूर गांव भेज दिया गया। वहां उन्हें किसानों के साथ रहना पड़ा, खेती का काम करना पड़ा और गुफानुमा घर में जिंदगी बितानी पड़ी। यही ग्रामीण जीवन आगे चलकर उनकी राजनीतिक सोच और व्यक्तित्व का अहम हिस्सा बना।
बड़े नेता के बेटे थे, लेकिन परिवार पर टूटा राजनीतिक संकट
शी जिनपिंग का जन्म जून 1953 में हुआ था। उनके पिता शी झोंगशुन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे और बाद में उप-प्रधानमंत्री भी बने।
इस राजनीतिक परिवार में जन्म लेने के कारण शी जिनपिंग का बचपन चीन के सत्ता प्रतिष्ठान के करीब बीता। लेकिन यह सुविधा लंबे समय तक नहीं रही।
1960 के दशक में उनके पिता राजनीतिक संघर्ष का शिकार हुए। इसके बाद परिवार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा। चीन की सांस्कृतिक क्रांति के दौरान शी परिवार को भी मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। यही वह समय था जब शी जिनपिंग की जिंदगी ने अचानक करवट ली।
15 साल की उम्र में बीजिंग से पहुंच गए गांव
1969 में करीब 15 साल की उम्र में शी जिनपिंग को शान्शी प्रांत के लियांगजियाहे गांव भेज दिया गया। यह उस दौर की नीति का हिस्सा था, जिसके तहत शहरों के युवाओं को ग्रामीण इलाकों में भेजा जाता था। बीजिंग की जिंदगी से बिल्कुल अलग यहां उन्हें ग्रामीण जीवन का सामना करना पड़ा।
शी जिनपिंग ने बाद में अपने इस दौर को अपने जीवन का बेहद महत्वपूर्ण अनुभव बताया। करीब सात साल तक वे लियांगजियाहे में रहे। किसानों के साथ काम किया और गांव की पार्टी शाखा में भी जिम्मेदारी संभाली।
गुफानुमा घर में रहते थे, किसानों के साथ करते थे काम
लियांगजियाहे में शी जिनपिंग जिस घर में रहते थे, उसे स्थानीय भाषा में ‘याओदोंग’ कहा जाता है। यह पहाड़ी इलाके में बना पारंपरिक गुफानुमा आवास था।
जिस व्यक्ति के पिता कभी चीन की सत्ता के ऊपरी गलियारों में थे, उनका बेटा अब ग्रामीण चीन में किसानों के बीच रह रहा था।
खेती, ग्रामीण जीवन और आम लोगों की मुश्किलों से उनका सीधा सामना हुआ। यही अनुभव बाद में शी जिनपिंग की सार्वजनिक छवि का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
गांव में ही शुरू हुई राजनीति की असली यात्रा
शी जिनपिंग ने जनवरी 1974 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता हासिल की। इसी दौर में उन्होंने लियांगजियाहे की पार्टी शाखा के सचिव के रूप में भी काम किया।
यानी जिस गांव में उन्हें कभी राजनीतिक परिस्थितियों के कारण भेजा गया था, वहीं से उनके औपचारिक राजनीतिक सफर की शुरुआत भी हुई। लेकिन अगला पड़ाव था चीन की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी।
छिंगहुआ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई, विषय था केमिकल इंजीनियरिंग
1975 में शी जिनपिंग छिंगहुआ विश्वविद्यालय पहुंचे। यह चीन की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों में से एक है।
उन्होंने 1975 से 1979 के बीच रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग में पढ़ाई की। उनका विषय मूल कार्बनिक संश्लेषण था।
यह तथ्य दिलचस्प है क्योंकि आज दुनिया उन्हें चीन की अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और रणनीतिक फैसलों के लिए जानती है, लेकिन उनकी पहली उच्च शिक्षा राजनीति या कानून में नहीं, बल्कि केमिकल इंजीनियरिंग में हुई थी।
नौकरी के साथ फिर पढ़ाई की
छिंगहुआ से पढ़ाई पूरी करने के बाद शी जिनपिंग ने केंद्र सरकार और सेना से जुड़े प्रशासनिक ढांचे में काम किया। इसके बाद वे अलग-अलग प्रांतों में पार्टी और प्रशासन की जिम्मेदारियां संभालते हुए आगे बढ़ते गए।
लेकिन शिक्षा से उनका रिश्ता खत्म नहीं हुआ।
1998 से 2002 के बीच उन्होंने दोबारा छिंगहुआ विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। इस बार उनका क्षेत्र मार्क्सवादी सिद्धांत और वैचारिक एवं राजनीतिक शिक्षा था।
इसी अवधि में उन्होंने कानून में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। उनकी शोध ग्रामीण चीन में बाजार व्यवस्था के विकास से संबंधित थी।
यानी जिस नेता का बचपन ग्रामीण चीन के एक गांव में बीता था, उसकी उच्च शिक्षा की शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा रहा।
गांव के पार्टी सचिव से शंघाई तक
शी जिनपिंग का राजनीतिक सफर धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उन्होंने हेबेई, फुजियान और झेजियांग जैसे प्रांतों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
इसके बाद 2007 में उन्हें शंघाई का पार्टी सचिव बनाया गया। उसी साल वे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो स्थायी समिति में भी शामिल हुए।
यही वह दौर था जब यह साफ होने लगा कि शी जिनपिंग चीन की सत्ता के सबसे ऊपरी स्तर तक पहुंचने की दौड़ में हैं।
2012 में आया सबसे बड़ा मोड़
नवंबर 2012 में शी जिनपिंग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव चुने गए। साथ ही वे केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष भी बने।
मार्च 2013 में उन्होंने चीन के राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाली।
इसके बाद उन्होंने चीन की राजनीतिक व्यवस्था में अपनी पकड़ लगातार मजबूत की और देश के सबसे शक्तिशाली नेताओं में शामिल हो गए।
शी जिनपिंग की शिक्षा कितनी है?
शी जिनपिंग की शिक्षा का सफर दो अलग-अलग चरणों में दिखाई देता है।
1975-1979:
छिंगहुआ विश्वविद्यालय — रासायनिक अभियांत्रिकी, मूल कार्बनिक संश्लेषण
1998-2002:
छिंगहुआ विश्वविद्यालय — मार्क्सवादी सिद्धांत और वैचारिक एवं राजनीतिक शिक्षा का सेवारत स्नातकोत्तर कार्यक्रम
1998-2002:
कानून में डॉक्टरेट — ग्रामीण बाजार के विकास से संबंधित शोध
15 साल के गांव वाले लड़के से चीन के राष्ट्रपति तक
शी जिनपिंग की कहानी इसलिए दिलचस्प है क्योंकि इसमें चीन के आधुनिक राजनीतिक इतिहास के कई दौर एक साथ दिखाई देते हैं।
एक तरफ वे चीन के वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता के बेटे थे। दूसरी तरफ किशोरावस्था में उन्हें राजनीतिक उथल-पुथल के बीच गांव भेज दिया गया। वहां उन्होंने किसानों के साथ काम किया और करीब सात साल ग्रामीण जीवन बिताया।
फिर वे छिंगहुआ विश्वविद्यालय पहुंचे, केमिकल इंजीनियरिंग पढ़ी, सरकारी और पार्टी तंत्र में काम किया, दोबारा पढ़ाई की और कानून में डॉक्टरेट हासिल किया।
इसके बाद हेबेई से फुजियान, झेजियांग से शंघाई और फिर बीजिंग तक उनका राजनीतिक सफर पहुंचा।
आज वही शी जिनपिंग चीन की सत्ता के शीर्ष पर हैं और BRICS जैसे वैश्विक मंच पर चीन का प्रतिनिधित्व करते हैं।
लियांगजियाहे का वह गांव शायद उनके राजनीतिक सफर का पहला पड़ाव था, लेकिन चीन की सत्ता के शिखर तक पहुंचने की उनकी यात्रा ने उन्हें 21वीं सदी के सबसे प्रभावशाली वैश्विक नेताओं में शामिल कर दिया।


