Fuel Export Duty Hike 2026: ईंधन बाजार में बड़ा बदलाव, डीजल और ATF पर बढ़ी ड्यूटी; जानिए किसे होगा फायदा

Fuel Export Duty Hike 2026: सरकार ने डीजल पर ₹14 और ATF पर ₹12.5 प्रति लीटर ड्यूटी बढ़ाई, जानिए क्या पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ेगा असर।

Update:2026-06-16 15:21 IST

Fuel Export Duty Hike 2026

Fuel Export Duty Hike 2026: केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। इस बार सरकार ने डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) की दिन में बढ़ोतरी कर दी है। 16 जून 2026 से लागू इस फैसले के तहत डीजल के निर्यात पर 14 रुपये प्रति लीटर और ATF के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क देना होगा। हालांकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस फैसले का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा? आइए विस्तार से समझते हैं।

डीजल और ATF पर कितना बढ़ा शुल्क?

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लागू होगी। वहीं, एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर SAED वसूला जाएगा। पेट्रोल के निर्यात पर पहले से लागू 1.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

सरकार ने यह नई दरें 16 जून 2026 से प्रभावी कर दी हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

आखिर क्यों बढ़ाई गई एक्सपोर्ट ड्यूटी?

सरकार ने पहली बार 27 मार्च 2026 को डीजल, पेट्रोल और ATF के निर्यात पर विशेष शुल्क लगाया था। इसके पीछे मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतें थीं।

जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के दाम तेजी से बढ़ते हैं, तब भारतीय रिफाइनरियों को घरेलू बाजार की तुलना में निर्यात करना अधिक लाभदायक लगने लगता है। इससे देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे और घरेलू बाजार में किसी तरह की कमी या कृत्रिम संकट पैदा न हो। एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर सरकार रिफाइनरियों को घरेलू बाजार को प्राथमिकता देने का संकेत दे रही है।

हर 15 दिन में होती है समीक्षा

पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी स्थायी नहीं होती। केंद्र सरकार इसकी समीक्षा हर 15 दिन में करती है। दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के औसत भाव तथा रिफाइनिंग मार्जिन को देखते हुए तय की जाती हैं।

इससे पहले 1 जून 2026 को भी सरकार ने इन दरों की समीक्षा की थी। अब नए आंकड़ों और वैश्विक कीमतों के आधार पर शुल्क में बदलाव किया गया है।

क्या पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?

इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ जाएंगी।

जबकि यह शुल्क केवल निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होता है। देश के भीतर पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए फिलहाल आम उपभोक्ताओं को मिलने वाले ईंधन के दामों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।

एयरलाइन सेक्टर पर क्या होगा असर?

ATF विमानन कंपनियों के लिए सबसे बड़ा परिचालन खर्च होता है। हालांकि नई ड्यूटी केवल निर्यात किए जाने वाले ATF पर लागू है। घरेलू एयरलाइंस को मिलने वाले ATF की कीमतें सीधे इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगी। लेकिन यदि वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो विमानन उद्योग पर लागत का दबाव बना रह सकता है। ऐसे में एयरलाइंस भविष्य में किरायों को लेकर अलग रणनीति अपना सकती हैं।

रिफाइनरी कंपनियों के लिए क्या मायने?

देश की बड़ी रिफाइनिंग कंपनियां जैसे कि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और निजी क्षेत्र की कुछ रिफाइनरियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करती हैं। बढ़ी हुई एक्सपोर्ट ड्यूटी से उनके निर्यात मुनाफे पर कुछ असर पड़ सकता है।

हालांकि सरकार का मानना है कि घरेलू ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन उपलब्धता को प्राथमिकता देना ज्यादा जरूरी है। यही वजह है कि वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार निर्यात शुल्क को समय-समय पर समायोजित किया जाता है।

सरकार के इस फैसले से फिलहाल आम उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह कदम मुख्य रूप से देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और रिफाइनरियों को घरेलू बाजार की जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए उठाया गया है।

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