Sona Mat Khareedo: सोना कितना सोना है
Sona Kyo Nahi Khareeden: भारत में सोने की बढ़ती मांग, रिकॉर्ड गोल्ड इम्पोर्ट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीद कम करने की अपील के आर्थिक असर को समझिए। जानिए भारतीयों के पास कितना सोना है और इससे अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।
Sona Mat Khareedo
Sona Kyo Nahi Khareeden: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए कुछ अपील की हैं। हालाँकि कोरोना काल व उसके पहले व बाद में भी प्रधानमंत्री कई अपीलें कर चुके हैं। जनता ने उनकी अपीलों पर गौर भी फरमाया है। प्रधानमंत्री ने जो चार पांच अपीलें एक साथ की हैं, उनमें एक अपील अगले एक साल तक सोना ख़रीदने से ख़ुद को दूर रखने की बात देश के नागरिकों से की है। ऐसे में यह जानना ज़रूरी हो जाता है कि आखिर सोने की खपत देश में कितनी है। एक साल तक सोना न ख़रीद कर देश के लोग भारतीय अर्थव्यवस्था का कितना और कैसे भला कर सकते हैं।
इम्पोर्ट पर निर्भरता
ग़ौरतलब है कि भारत हर साल लगभग 650 से 800 टन सोना खरीदता या खपत करता है। 2024 में सोने की मांग करीब 802.8 टन थी। 2025 में ऊँची कीमतों के कारण खपत लगभग 11 फीसदी घटकर करीब 700 टन के आसपास रही। लेकिन मूल्य के हिसाब से बाजार बढ़कर लगभग ₹7.51 लाख करोड़ हो गया। भारत में सोने का घरेलू उत्पादन बहुत कम है। खान मंत्रालय के अनुसार 2023-24 में प्राथमिक सोना केवल 1,552 किलो, यानी करीब 1.55 टन ही पैदा हुआ।
इसका अर्थ है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 99 फीसदी सोना आयात या पुराने सोने की रीसाइक्लिंग से पूरा करता है।2025-26 में भारत ने 721.03 टन सोना आयात किया। मात्रा में यह पिछले साल के 757.09 टन से कम था। लेकिन कीमतें बढ़ने से आयात बिल रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर हो गया। सोना देश के कुल आयात का 5 फीसदी से अधिक हिस्सा बन गया। इसका असर व्यापार घाटे व चालू खाते पर पड़ता है।
डर ने बढ़ाई डिमांड
सोने की कीमतें इसलिए तेजी से बढ़ीं क्योंकि दुनिया भर में अनिश्चितता, युद्ध व भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर और ब्याज दरों को लेकर आशंका, केंद्रीय बैंकों की भारी खरीद और निवेशकों की सुरक्षित संपत्ति की तलाश बढ़ी। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार 2025 में सोने की वैश्विक मांग 5,000 टन से ऊपर चली गई। कीमत ने 53 बार नए रिकॉर्ड बनाए। केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा। भारत में भी Q1 2026 में MCX सोने की औसत कीमत सालाना 81 फीसदी बढ़कर ₹1,51,108 प्रति 10 ग्राम तक पहुँच गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कम सोना खरीदने की अपील का सीधा आर्थिक अर्थ है, डॉलर बचाइए। उन्होंने 10 मई, 2026 को ईंधन बचाने, विदेश यात्रा कम करने और सोना न खरीदने टालने की अपील विदेशी मुद्रा बचाने के लिए की। क्योंकि भारत तेल और सोना दोनों पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करता है।
पब्लिक के पास कितना सोना?
भारत में औसतन एक आदमी के पास कितना सोना है इसका बिल्कुल सटीक सरकारी आँकड़ा नहीं है, क्योंकि घरों में रखा सोना रजिस्टर नहीं होता। लेकिन विभिन्न संस्थाओं, जैसे वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल, मॉर्गन स्टैनली, एसोचेम, अस्सोचेम और आर्थिक अध्ययनों के आधार पर अनुमान लगाए जाते हैं। सबसे अधिक स्वीकार किया जाने वाला अनुमान यह है कि भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास कुल मिलाकर लगभग 25,000 से 35,000 टन सोना है। अगर इसे भारत की लगभग 145 करोड़ आबादी से विभाजित करें, तो मोटे तौर पर प्रति व्यक्ति औसत निकलता है:
25,000 टन मानें तो लगभग 17 ग्राम प्रति व्यक्ति और यदि 35,000 टन मानें तो लगभग 24 ग्राम प्रति व्यक्ति सोना बैठता है। यानी मोटे तौर पर कहा जाता है कि भारत में औसतन हर व्यक्ति के हिस्से में 15–25 ग्राम सोना बैठता है।
लेकिन यह केवल गणितीय औसत है। वास्तविकता बहुत अलग है। भारत में सोने का वितरण अत्यंत असमान है। ग्रामीण और पारंपरिक परिवारों, खासकर महिलाओं के पास पीढ़ियों से जमा गहने अधिक होते हैं। कई गरीब परिवारों के पास बिल्कुल सोना नहीं होता। वहीं कुछ परिवारों के पास किलो में सोना होता है। दक्षिण भारत, गुजरात, राजस्थान, पंजाब और शहरी व्यापारी समुदायों में सोने की होल्डिंग सामान्यतः अधिक मानी जाती है।भारत की निजी सोना-होल्डिंग दुनिया में सबसे बड़ी मानी जाती है। कुछ हालिया आकलनों में भारतीय घरों के पास मौजूद सोने का मूल्य 3.8 ट्रिलियन डॉलर से 5 ट्रिलियन डॉलर तक बताया गया है।
बेशुमार घरेलू भंडार
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोना कई देशों के केंद्रीय बैंकों के कुल भंडार से भी अधिक माना जाता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास मार्च 2026 तक लगभग 880.5 टन सोना था। यह भारत के आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा है। दुनिया के देशों में भारत का स्थान सोने के सरकारी भंडार के मामले में लगभग 8वें नंबर पर माना जाता है। इस 880 टन में से लगभग 680 टन से अधिक सोना भारत में रिज़र्व बैंक के सुरक्षित वॉल्टों में रखा गया है। करीब 198 टन सोना विदेशों में, मुख्यतः बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फ़ॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट के पास रखा गया है। थोड़ा हिस्सा गोल्ड डिपॉज़िट के रूप में है।
दिलचस्प बात यह भी है कि रिज़र्व बैंक पिछले कुछ वर्षों से लगातार अपना सोना विदेशों से वापस भारत ला रहा है। केवल 2025-26 में ही लगभग 168 टन सोना वापस भारत लाया गया। बैंक ऐसा इसलिए कर रहा है क्योंकि दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव, प्रतिबंध, युद्ध और डॉलर-आधारित वित्तीय दबाव बढ़े हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कई देशों ने महसूस किया कि अपने सोने को अपने देश में रखना अधिक सुरक्षित है। अगर मौजूदा कीमतों से देखें तो रिज़र्व बैंक के इस सोने का मूल्य लगभग 115–130 अरब डॉलर (करीब 10–11 लाख करोड़ रुपये से अधिक) बैठता है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि RBI का यह सोना भारत के लोगों के पास मौजूद निजी सोने की तुलना में बहुत कम है। भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास अनुमानतः 25,000–35,000 टन सोना माना जाता है, यानी रिज़र्व बैंक के भंडार से कई गुना अधिक।
प्रधानमंत्री के एक साल कम सोना ख़रीदने की अपील पर अमल से देश को ये लाभ होंगे-आयात बिल घटेगा, डॉलर की मांग कम होगी, रुपये पर दबाव घटेगा, व्यापार घाटा और चालू खाते का घाटा नियंत्रित होगा, विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहेगा और संकट के समय सरकार के पास तेल, खाद, रक्षा व जरूरी आयात के लिए अधिक क्षमता बचेगी। सरल शब्दों में, सोना व्यक्तिगत सुरक्षा का साधन है, पर बहुत अधिक सोना खरीदना राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से डॉलर बाहर भेजता है। इसलिए प्रधानमंत्री की अपील आर्थिक अनुशासन और विदेशी मुद्रा बचत से जुड़ी है।