Medical Education System: भारत में NEET, तो बाकी देशों में कैसे बनते हैं डॉक्टर?

Medical Education System: भारत, अमेरिका, UK, जर्मनी, पाकिस्तान और चीन में डॉक्टर बनने का तरीका अलग है। जानिए MBBS, MD और मेडिकल पढ़ाई का पूरा प्रोसेस।

Update:2026-05-17 13:08 IST

Medical Education System

Medical Education System: भारत में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले लाखों छात्र हर साल NEET परीक्षा की तैयारी करते हैं। यहां 12वीं के बाद मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेकर करीब 5.5 साल की MBBS पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर बना जा सकता है। लेकिन दुनिया के कई देशों में मेडिकल शिक्षा का सिस्टम भारत से बिल्कुल अलग है। कहीं MBBS की डिग्री ही नहीं होती, तो कहीं मेडिकल पढ़ाई शुरू करने से पहले ग्रेजुएशन करना जरूरी होता है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में डॉक्टर बनने का क्या प्रोसेस है और भारतीय छात्र किन देशों को तेजी से चुन रहे हैं।

भारत में कैसे बनते हैं डॉक्टर?

भारत में मेडिकल करियर की शुरुआत NEET यानी National Eligibility cum Entrance Test से होती है। 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी पढ़ने वाले छात्र NEET परीक्षा देते हैं। अच्छे अंक आने पर सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज में MBBS में एडमिशन मिलता है। MBBS कोर्स की अवधि 5.5 साल होती है, जिसमें एक साल की इंटर्नशिप भी शामिल रहती है। इसके बाद छात्र मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवाकर डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं। आगे विशेषज्ञ बनने के लिए MD या MS जैसी पोस्टग्रेजुएट डिग्री करनी पड़ती है।

अमेरिका और कनाडा

अमेरिका और कनाडा में डॉक्टर बनने की प्रक्रिया काफी लंबी और कठिन मानी जाती है। वहां छात्र सीधे स्कूल के बाद मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं ले सकते। सबसे पहले छात्रों को 4 साल की Undergraduate Degree पूरी करनी होती है, जिसे आमतौर पर Pre-Med कहा जाता है। इसके बाद MCAT (Medical College Admission Test) परीक्षा देनी होती है। यह परीक्षा काफी कठिन मानी जाती है और मेडिकल स्कूल में प्रवेश का मुख्य आधार भी होती है। MCAT पास करने के बाद छात्रों को 4 साल के MD (Doctor of Medicine) प्रोग्राम में दाखिला मिलता है। लेकिन यहां भी पढ़ाई खत्म होने के बाद तुरंत डॉक्टर के रूप में काम शुरू नहीं किया जा सकता।

इसके बाद 3 से 7 साल की Residency Training करनी होती है, जहां छात्र अपनी स्पेशलाइजेशन जैसे सर्जरी, कार्डियोलॉजी या पीडियाट्रिक्स में ट्रेनिंग लेते हैं। कुल मिलाकर अमेरिका में डॉक्टर बनने में करीब 11 से 15 साल तक लग सकते हैं।

यूनाइटेड किंगडम: भारत से मिलता-जुलता सिस्टम

ब्रिटेन का मेडिकल सिस्टम काफी हद तक भारत जैसा माना जाता है। यहां भी छात्र 12वीं के बाद मेडिकल पढ़ाई शुरू कर सकते हैं। एडमिशन के लिए UCAT या BMAT जैसी परीक्षाएं देनी होती हैं। इसके बाद 5 से 6 साल का मेडिकल कोर्स कराया जाता है, जिसे MBBS या MBChB कहा जाता है। डिग्री पूरी करने के बाद छात्रों को Foundation Programme करना पड़ता है, जिसमें FY1 और FY2 नाम के दो चरण शामिल होते हैं। यह एक तरह की पेड ट्रेनिंग होती है। इसे पूरा करने के बाद ही छात्रों को फुल मेडिकल रजिस्ट्रेशन मिलता है और वे स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस कर सकते हैं।

जर्मनी: कम फीस लेकिन कठिन तैयारी

जर्मनी (Germany Doctor Process) दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां मेडिकल शिक्षा लगभग मुफ्त मानी जाती है। यही वजह है कि यह विदेशी छात्रों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। हालांकि यहां एडमिशन लेना आसान नहीं होता। सबसे बड़ी शर्त जर्मन भाषा है। मेडिकल पढ़ाई जर्मन भाषा में होती है, इसलिए छात्रों को C1 लेवल तक भाषा सीखनी पड़ती है। यहां कोई एक राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा नहीं होती। 12वीं के अंकों और TMS टेस्ट के आधार पर चयन किया जाता है। मेडिकल पढ़ाई करीब 6 साल 3 महीने तक चलती है, जिसमें प्री-क्लीनिकल, क्लीनिकल और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग शामिल होती है। डिग्री पूरी करने के बाद मेडिकल लाइसेंस पाने के लिए कठिन State Examinations पास करने पड़ते हैं।

पाकिस्तान और चीन में डॉक्टर बनने का क्या है तरीका?

पाकिस्तान और चीन दोनों देशों में मेडिकल शिक्षा का सिस्टम अलग-अलग तरीके से काम करता है। पाकिस्तान का मेडिकल ढांचा काफी हद तक भारत जैसा है, जबकि चीन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए आसान और लोकप्रिय विकल्प बन चुका है।

पाकिस्तान में भारत जैसा MDCAT सिस्टम

पाकिस्तान में मेडिकल शिक्षा को Pakistan Medical and Dental Council (PMDC) नियंत्रित करता है। यहां 12वीं (FSc Pre-Medical) के बाद छात्रों को MDCAT यानी Medical and Dental College Admission Test पास करना होता है, जो भारत के NEET जैसा एंट्रेंस एग्जाम है।

परीक्षा पास करने के बाद छात्रों को 5 साल के MBBS कोर्स में दाखिला मिलता है। पढ़ाई पूरी होने के बाद 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है, जिसे “हाउस जॉब” कहा जाता है। इसके बाद ही स्थायी मेडिकल लाइसेंस मिलता है। पाकिस्तान में डॉक्टर बनने में लगभग 6 साल लगते हैं।

चीन है विदेशी छात्रों के लिए लोकप्रिय विकल्प

चीन में विदेशी छात्रों के लिए इंग्लिश मीडियम MBBS की सुविधा उपलब्ध है। यहां एडमिशन मुख्य रूप से 12वीं के अंकों और इंटरव्यू के आधार पर मिलता है। हालांकि भारतीय छात्रों के लिए NEET क्वालिफाई करना जरूरी होता है। कोर्स की अवधि 6 साल की होती है, जिसमें 5 साल पढ़ाई और 1 साल इंटर्नशिप शामिल है। साथ ही छात्रों को चीनी भाषा सीखने के लिए HSK परीक्षा भी पास करनी पड़ती है, ताकि वे मरीजों से आसानी से संवाद कर सकें।

भारतीय छात्रों के बीच कौन से देश लोकप्रिय हो रहे हैं?

पिछले कुछ वर्षों में रूस, नेपाल, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, जॉर्जिया और फिलीपींस भारतीय छात्रों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। इन देशों में मेडिकल पढ़ाई अपेक्षाकृत कम खर्च में पूरी हो जाती है। रूस में MBBS का कुल खर्च लगभग 25 से 40 लाख रुपये तक हो सकता है। वहीं कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान में सालाना खर्च 5 से 7 लाख रुपये के बीच माना जाता है। जॉर्जिया और फिलीपींस अंग्रेजी माध्यम और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से लोकप्रिय हो रहे हैं।

विदेश में मेडिकल पढ़ाई चुनने से पहले क्या ध्यान रखें?

विदेश में मेडिकल पढ़ाई का फैसला लेते समय सिर्फ कम फीस देखना सही नहीं होता। छात्रों को यह जरूर जांचना चाहिए कि संबंधित यूनिवर्सिटी भारत के National Medical Commission के नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त है या नहीं।इसके अलावा भाषा, मौसम, रहने की सुविधा, खाने-पीने की व्यवस्था और कुल खर्च की जानकारी पहले से लेना जरूरी है। भारत लौटकर प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी लाइसेंसिंग परीक्षा और नियमों को समझना भी बेहद महत्वपूर्ण है।

Tags:    

Similar News