Swine Flu ने बढ़ाई टेंशन! वायरल फीवर और H1N1 के लक्षणों में ऐसे करें पहचान
Swine Flu Symptoms: स्वाइन फ्लू, सामान्य फ्लू और सर्दी-जुकाम तीनों ही रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, एच1एन1 इन्फ्लुएंजा ए वायरस का एक स्ट्रेन है और कुछ लोगों में इसका संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
Swine Flu Symptoms
Swine Flu Symptoms: मौसम बदलने के साथ अस्पतालों और डॉक्टरों के क्लीनिक में बुखार, खांसी और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में लोग फ्लू (Flu) और वायरल फीवर (Viral Fever) जैसे लक्षण महसूस कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बुखार सामान्य वायरल इंफेक्शन (Viral Infection) है या स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 (H1N1 Swine Flu) की चपेट में आने की शुरुआत।
स्वाइन फ्लू, सामान्य फ्लू और सर्दी-जुकाम तीनों ही रेस्पिरेटरी सिस्टम (Respiratory System) को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, एच1एन1 इन्फ्लुएंजा ए वायरस (Influenza A Virus) का एक स्ट्रेन है और कुछ लोगों में इसका संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़े फ्लू और वायरल के मामले
लोकलसर्कल्स (LocalCircles) की ओर से 23 अगस्त को जारी सर्वे के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में सर्वे में शामिल करीब 54 फीसदी घरों में कम से कम एक सदस्य को फ्लू या वायरल बुखार जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं। ऐसे माहौल में यह समझना जरूरी है कि स्वाइन फ्लू और सामान्य वायरल संक्रमण के लक्षणों में क्या अंतर हो सकता है।
केवल लक्षणों से स्वाइन फ्लू की पहचान आसान नहीं
दिल्ली के एक निजी अस्पताल के डॉक्टर के मुताबिक, सिर्फ लक्षण देखकर यह तय करना हमेशा आसान नहीं होता कि बुखार एच1एन1 के कारण से है या किसी दूसरे वायरल संक्रमण के कारण। फ्लू (Flu) में लक्षण अक्सर अचानक शुरू होते हैं। तेज बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द और बहुत ज्यादा थकान महसूस हो सकती है।
वहीं सामान्य सर्दी-जुकाम (Common Cold) में नाक बहना, छींक आना और गले में खराश जैसे लक्षण ज्यादा प्रमुख हो सकते हैं।
एक्सपर्ट के मुताबिक, सामान्य फ्लू, इन्फ्लुएंजा (Influenza) और स्वाइन फ्लू की शुरुआत में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता। शुरुआती लक्षणों में बुखार, खांसी, मांसपेशियों में दर्द, नाक से पानी आना, सिरदर्द और शरीर में दर्द शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में त्वचा पर चकत्ते भी दिखाई दे सकते हैं।
कब स्वाइन फ्लू गंभीर हो सकता है ?
स्वाइन फ्लू (Swine Flu) में समस्या तब गंभीर हो सकती है जब संक्रमण के कारण कॉम्प्लिकेशन (Complication) विकसित होने लगें। ऐसी स्थिति में निमोनिया (Pneumonia) हो सकता है और सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है।
सांस फूलना, सीने में दर्द, 104 डिग्री तक तेज बुखार और दवाइयों से बुखार का नियंत्रित न होना गंभीर संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा आंखों में लालिमा या कंजंक्टिवाइटिस (Conjunctivitis), पेशाब कम होना, सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ना, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव और हार्ट रेट (Heart Rate) का अनियमित होना भी कॉम्प्लिकेटेड इन्फ्लुएंजा इलनेस (Complicated Influenza Illness) के संकेत हो सकते हैं।
स्वाइन फ्लू और सामान्य वायरल में क्या अंतर
स्वाइन फ्लू या इन्फ्लुएंजा (Influenza) में लक्षण अक्सर अचानक शुरू होते हैं। तेज बुखार कई दिनों तक रह सकता है और शरीर व मांसपेशियों में दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है। मरीज को काफी ज्यादा थकान और कमजोरी हो सकती है। सिर में दर्द हल्का या तेज हो सकता है और सूखी खांसी (Dry Cough) आम हो सकती है।
इसी के साथ गले में खराश, नाक बंद होना या नाक बहना भी हो सकता है। गंभीर स्थिति में निमोनिया या सांस से जुड़ी परेशानी हो सकती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर फ्लू की जांच और एंटीवायरल दवा (Antiviral Medicine) की सलाह दे सकते हैं।
इसके मुकाबले सामान्य सर्दी-जुकाम या हल्के वायरल संक्रमण (Mild Viral Infection) में लक्षण धीरे-धीरे शुरू हो सकते हैं। बुखार हल्का हो सकता है या बिल्कुल नहीं भी हो सकता। बदन दर्द और कमजोरी आमतौर पर हल्की होती है और थकान भी अपेक्षाकृत कम रहती है। सिरदर्द हो सकता है, लेकिन अक्सर हल्का होता है। छींक, नाक बहना, नाक बंद होना और गले में खराश जैसे लक्षण ज्यादा आम होते हैं। ज्यादातर मामलों में संक्रमण हल्का रहता है और कुछ दिनों में सुधार होने लगता है।
पक्की पहचान के लिए जांच जरूरी
सबसे जरूरी बात यह है कि केवल तेज बुखार, खांसी या कमजोरी देखकर एच1एन1 की पुष्टि नहीं की जा सकती। हर तेज बुखार स्वाइन फ्लू नहीं होता और हर एच1एन1 संक्रमण में एक जैसे लक्षण भी नहीं दिखाई देते।
डॉक्टर मरीज के लक्षण और उसकी स्थिति देखकर जांच की सलाह दे सकते हैं। एच1एन1 और सामान्य इन्फ्लुएंजा इलनेस (Influenza Illness) में अंतर करने के लिए जरूरत पड़ने पर नैजोफ्रेंजियल स्वैब (Nasopharyngeal Swab) लिया जाता है। इससे संक्रमण की पहचान करने में मदद मिलती है।
पहले से बीमारी होने पर ज्यादा सतर्कता जरूरी
जिन मरीजों को पहले से डायबिटीज (Diabetes), हार्ट से जुड़ी बीमारी (Heart Disease) या कैंसर (Cancer) जैसी बीमारी है, या जो कीमोथेरेपी (Chemotherapy) ले रहे हैं, उनमें सामान्य इन्फ्लुएंजा भी गंभीर रूप ले सकता है। गर्भवती महिलाओं में भी फ्लू के गंभीर होने का खतरा हो सकता है। ऐसी स्थिति में मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है और गंभीर मामलों में जान का खतरा भी हो सकता है।
बचाव के लिए वैक्सीनेशन अहम
स्वाइन फ्लू और सामान्य फ्लू से बचाव में वैक्सीनेशन (Vaccination) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आजकल लगाया जाने वाला सामान्य फ्लू वैक्सीन या फ्लू शॉट (Flu Shot) दोनों तरह के वायरस से बचाव में मदद कर सकता है।
अगर बुखार लगातार बना हुआ है, हालत बिगड़ रही है, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो रही है, सांस लेने में परेशानी है या सीने में दर्द हो रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। यानी घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लक्षणों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। सही जांच और डॉक्टर की सलाह से ही यह पता लगाया जा सकता है कि संक्रमण सामान्य वायरल है, फ्लू है या एच1एन1 स्वाइन फ्लू।