Organ Transplant Crisis In India: भारत में अंग प्रत्यारोपण का संकट, किडनी की केवल 7.2% जरूरत हो पा रही पूरी
Organ Transplant Crisis In India: अध्ययन के मुताबिक लिवर, फेफड़े और हृदय प्रत्यारोपण की जरूरत भी पूरी नहीं हो पा रही है, 2040 तक अंग विफलता के मामलों में बढ़ोतरी की चेतावनी।
भारत में अंग प्रत्यारोपण का संकट, किडनी की केवल 7.2% जरूरत हो पा रही पूरी (Photo- Social Media)
Organ Transplant Crisis In India: भारत में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplantation) की आवश्यकता और वास्तविक उपलब्धता के बीच का अंतर भयावह स्तर पर पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ-ईस्ट एशिया' (The Lancet Regional Health Southeast Asia) के अगस्त 2026 अंक में प्रकाशित एक ताजा शोध के अनुसार, देश में प्रत्यारोपण की कुल अनुमानित जरूरत की तुलना में किडनी के मामले में मात्र 7.2 प्रतिशत मरीजों को ही नया अंग मिल पाता है।
अन्य महत्वपूर्ण अंगों की स्थिति और भी विकट है। रिपोर्ट के अनुसार, लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत का महज 1.5%, फेफड़ों (Lungs) का 1.2% और हृदय (Heart) का सिर्फ 0.2% हिस्सा ही पूरा हो पाता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि देश में किडनी के करीब 93%, लिवर के 98%, फेफड़ों के 98.8% और हृदय रोग से पीड़ित 99.8% जरूरतमंद मरीज समय पर अंग न मिल पाने के कारण बिना प्रत्यारोपण के ही जिंदगी और मौत से संघर्ष करने को विवश हैं।
अध्ययन के शोधकर्ता और डेटा का आधार
यह महत्वपूर्ण शोध प्रमुख चिकित्सा शोधकर्ताओं—हरि शंकर मेश्राम, विवेक कुटे, मनीष बालवानी और सौरभ पुरी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है।
शोधकर्ताओं ने भारत में प्रत्यारोपण की वर्तमान स्थिति और वर्ष 2040 तक के भविष्य के अनुमानों का विस्तृत विश्लेषण करने के लिए कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय डेटा स्रोतों का उपयोग किया है:
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD 2021): बीमारियों के प्रसार और ऑर्गन फेलियर के मामलों का आकलन।
भारत की जनसंख्या अनुमान: जनसांख्यिकीय बदलाव और भविष्य में मरीजों की बढ़ती संख्या।
ग्लोबल ऑब्जर्वेटरी ऑन डोनेशन एंड ट्रांसप्लांटेशन (GODT): वैश्विक स्तर पर अंगदान की दर और भारत की तुलनात्मक स्थिति।
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO): भारत सरकार के राष्ट्रीय डेटाबेस से पंजीकृत और वास्तविक रूप से संपन्न प्रत्यारोपणों के आंकड़े।
अंग प्रत्यारोपण में भारी अंतर के मुख्य कारण
1. कैडेवर ऑर्गन डोनेशन (ब्रेन डेड डोनर्स) की बेहद धीमी दर:
भारत में अंगदान की दर दुनिया के विकसित देशों (जैसे स्पेन या अमेरिका) की तुलना में बहुत कम (प्रति 10 लाख आबादी पर 1 से भी कम) है।
देश में होने वाले अधिकांश किडनी या लिवर ट्रांसप्लांट जीवित पारिवारिक दाताओं (Living Donors) पर निर्भर हैं, जबकि ब्रेन डेड व्यक्तियों से अंगदान को लेकर जागरूकता की भारी कमी है।
1. आधारभूत ढांचे और सुपर-स्पेशियलिटी केंद्रों का अभाव:
जटिल प्रत्यारोपण सर्जरी की सुविधा मुख्य रूप से बड़े महानगरों और महंगे निजी अस्पतालों तक ही सीमित है। टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे की भारी कमी है।
1. इलाज की भारी लागत:
ट्रांसप्लांट सर्जरी और उसके बाद जीवनभर चलने वाली इम्यूनोसप्रेसेंट (एंटी-रिजेक्शन) दवाओं का भारी खर्च आम और मध्यमवर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर है।
1. सामाजिक भ्रांतियां और अंगदान रजिस्ट्री का अभाव:
ब्रेन डेथ की स्थिति में परिजनों की सहमति न मिलना और समय पर अंगों को एक शहर से दूसरे शहर तक ले जाने (ग्रीन कॉरिडोर) के नेटवर्क का सीमित होना।
2040 की चेतावनी और आगे की राह
अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि डायबिटीज, हाइपरटेंशन, फैटी लिवर और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के तेजी से बढ़ने के कारण वर्ष 2040 तक एंड-स्टेज ऑर्गन फेलियर के मरीजों की संख्या में कई गुना उछाल आएगा। यदि समय रहते अंगदान के प्रति राष्ट्रीय स्तर पर जन-जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, सरकारी अस्पतालों में ट्रांसप्लांट यूनिट्स का विस्तार नहीं हुआ और नीतिगत स्तर पर सुधार नहीं किए गए, तो यह अंतर भविष्य में और भी अधिक भयावह रूप ले सकता है।