TMC के 20 बागियों बड़ी फजीहत! पार्टी छोड़ने पर SC ने थमाया नोटिस, दलबदल कानून से बढ़ी टेंशन

TMC rebel MPs Disqualification Notice: टीएमसी के 20 बागी सांसदों को सुप्रीम कोर्ट ने दलबदल मामले में नोटिस जारी किया है। अभिषेक बनर्जी की याचिका पर CJI सूर्यकांत की पीठ ने जवाब मांगा है, जिससे सांसदों की अयोग्यता का खतरा बढ़ गया है।

Update:2026-08-25 14:28 IST

TMC rebel MPs Disqualification Notice:पश्चिम बंगाल की सियासी फिजाओं में उस वक्त भूचाल आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 दिग्गज सांसदों ने एक साथ बगावत का झंडा बुलंद करते हुए पार्टी का दामन छोड़ दिया। टीएमसी की करारी शिकस्त के बाद अचानक पार्टी का साथ छोड़कर त्रिपुरा आधारित नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का हाथ थामने वाले इन बागी नेताओं को अब देश की सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए दल बदलने वाले सभी 20 सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

CJI सूर्यकांत की बेंच का सख्त आदेश

टीएमसी के शीर्ष नेता अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने यह बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने सभी बागी सांसदों को निर्देश दिया है कि वे अपनी अयोग्यता से जुड़े इस गंभीर मामले पर जल्द से जल्द अदालत के समक्ष अपना आधिकारिक पक्ष और जवाब दाखिल करें। हालांकि, बनर्जी द्वारा लोकसभा अध्यक्ष के दफ्तर और लोकसभा महासचिव को भी नोटिस भेजने की मांग को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पहले ही अदालत में उपस्थित हो चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट में गरमाया दलबदल का मुद्दा

देश की सबसे बड़ी अदालत में राजनीतिक बगावत और अयोग्यता से जुड़ा यह कोई अकेला मामला नहीं है। ठीक इसी प्रकार की एक अन्य याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बेंच में गहन सुनवाई चल रही है। शिवसेना (UBT) ने भी अपने 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद सर्वोच्च न्यायालय का द्वार खटखटाया था। वर्तमान में जस्टिस पीए नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ इस बेहद संवेदनशील याचिका पर सुनवाई कर रही है।

अयोग्यता पर देरी को चुनौती

अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका के माध्यम से बागी सांसदों के खिलाफ शुरू की गई दलबदल विरोधी प्रक्रिया में हो रही देरी पर गहरा ऐतराज जताया है। उन्होंने संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत लोकसभा अध्यक्ष को इन याचिकाओं का त्वरित निपटारा करने का स्पष्ट निर्देश देने की गुहार लगाई है। खबरों के मुताबिक, बनर्जी ने 27 जुलाई को लिखित स्मरण पत्र भेजने के बाद 12 अगस्त को खुद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर इस मामले को जल्द सुलझाने का आग्रह किया था।

दलबदल कानून के चक्रव्यूह में फंसे 20 बागी सांसद

तृणमूल कांग्रेस का साफ तौर पर तर्क है कि इन सभी नेताओं ने टीएमसी के आधिकारिक चुनाव चिह्न पर जनता का जनादेश हासिल किया था। ऐसे में किसी दूसरे नए संगठन (NCPI) से हाथ मिलाना या विलय का दावा करना, अपनी मूल पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से त्यागने के समान है। लिहाजा, इन सभी सांसदों पर संविधान का सख्त दलबदल कानून लागू होना चाहिए और इन्हें तुरंत अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।

अयोग्यता की तलवार तले लटके बागी नेताओं की पूरी सूची

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद जिन 20 बागी चेहरों की सांसें अटकी हुई हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं:

काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर सायनी घोष, खलीलुर्रहमान, अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान, मिताली बैग, डॉ. शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक।

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