अखिलेश बनेंगे 'हिंदुओं' की पसंद, शिवपाल संभालेंगे मुस्लिम मोर्चा! UP चुनाव में BJP को मिलकर घेरेंगे चाचा-भतीजे

Akhilesh-Shivpal Yadav UP Election 2027: यूपी चुनाव 2027 से पहले अखिलेश यादव और शिवपाल यादव की रणनीति ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। अखिलेश यादव जहां हिंदू वोटरों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं शिवपाल यादव रामपुर-संभल जैसे इलाकों में मुस्लिम वोट बैंक को साधने में जुटे हैं।

Update:2026-08-13 19:26 IST

Akhilesh-Shivpal Yadav UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई माना जा रहा है। लगातार दो बार मिली हार के बाद पार्टी लंबे समय से सत्ता से दूर है। हालांकि, लोकसभा चुनावों के हालिया नतीजों ने पार्टी कार्यकर्ताओं के भीतर जीत की नई उम्मीद जगा दी है। बीजेपी के मजबूत किले को ध्वस्त करने के लिए अब अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव की जोड़ी ने एक बिल्कुल नई और अभेद्य रणनीति तैयार की है। जहां एक तरफ अखिलेश यादव हिंदू वोटों को आकर्षित करने में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ शिवपाल सिंह यादव ने पार्टी के कोर मुस्लिम वोट बैंक को बिखरने से बचाने का जिम्मा संभाल लिया है।

रामपुर और संभल के दौरे से बड़ा सियासी संदेश

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का इलाका समाजवादी पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक माना जाता है। इसी सिलसिले में सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने पिछले दिनों संभल और रामपुर का विस्तृत तूफानी दौरा किया। रामपुर में आजम खान के परिवार के साथ हुए प्रशासनिक और कानूनी घटनाक्रमों के बाद स्थानीय मुस्लिम समाज में व्याप्त निराशा को दूर करना पार्टी के लिए एक मुख्य उद्देश्य था। शिवपाल यादव ने न सिर्फ स्थानीय नेताओं, धर्मगुरुओं और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया, बल्कि रामपुर जेल में बंद वरिष्ठ नेता आजम खान से भी लगभग एक घंटे तक खास मुलाकात की। जेल से बाहर आने के बाद वे सीधे आजम खान के आवास पहुंचे और उनके परिजनों का हौसला बढ़ाया।

'आजम खान को बनाएंगे गृह मंत्री', शिवपाल का बड़ा ऐलान

रामपुर में मीडिया और समर्थकों से बातचीत करते हुए शिवपाल यादव ने बड़ा राजनीतिक दांव खेला। उन्होंने खुले मंच से कहा कि 2027 में उत्तर प्रदेश के भीतर समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही आजम खान को राज्य का गृह मंत्री बनाया जाएगा। शिवपाल ने भावुक होते हुए आरोप लगाया कि इतने बड़े कद्दावर नेता के साथ जेल के अंदर अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। उन्हें न तो समय पर दवाइयां दी जा रही हैं और न ही जरूरी कपड़े। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि सपा की सरकार आते ही फर्जी मुकदमे दर्ज करने वाले अधिकारियों का हिसाब किया जाएगा और आजम खान तथा संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क पर दर्ज सभी केस वापस लिए जाएंगे।

'पीडीए' और 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के बीच संतुलन साधने का प्रयास

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि समाजवादी पार्टी इस समय बेहद सोच-समझकर दोहरे मोर्चे पर काम कर रही है। अखिलेश यादव एक ओर मंदिरों के दर्शन, धार्मिक आयोजनों में भागीदारी और समावेशी बयानों के जरिए बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे की काट ढूंढ रहे हैं। उनका उद्देश्य पार्टी पर लगने वाले 'मुस्लिम तुष्टिकरण' के आरोपों को धोना और गैर-यादव ओबीसी तथा सवर्ण मतदाताओं का समर्थन हासिल करना है। हालांकि, अखिलेश के इस रुख से कहीं मुस्लिम मतदाता उपेक्षित महसूस न करें या ओवैसी जैसे नेताओं की ओर रुख न कर लें, इसीलिए शिवपाल यादव खुद धरातल पर उतरकर मुस्लिम समाज को यह भरोसा दिला रहे हैं कि पार्टी हर स्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

20 फीसदी मुस्लिम मतदाता क्यों हैं सबसे अहम?

उत्तर प्रदेश की कुल राजनीति में लगभग 4 करोड़ मुस्लिम आबादी है, जो कुल मतदाताओं का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा बनाती है। राज्य की कुल 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 143 सीटें ऐसी हैं जहां अल्पसंख्यक समाज निर्णायक स्थिति में रहता है। रामपुर, संभल, अमरोहा और बिजनौर जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी 30 से 49 प्रतिशत तक है। अकेले पश्चिमी यूपी और तराई इलाकों की लगभग 70 से अधिक सीटों पर यह वर्ग चुनाव परिणाम तय करने की ताकत रखता है। यही कारण है कि सपा किसी भी कीमत पर इस पारंपरिक वोट बैंक में सेंधमारी नहीं होने देना चाहती।

2027 की सियासी राह और चाचा-भतीजे की दोहरी ताकत

उत्तर प्रदेश में केवल एक वर्ग या समुदाय के बल पर लखनऊ की गद्दी हासिल करना संभव नहीं है। इसलिए, अखिलेश यादव अपनी सर्वग्राही छवि का विस्तार कर रहे हैं, तो वहीं शिवपाल यादव अपने पुराने सांगठनिक नेटवर्क और व्यक्तिगत संबंधों का इस्तेमाल कर धरातल के मजबूत जनाधार को बांधने में जुटे हैं। चाचा और भतीजे की यह जुगलबंदी पार्टी को राजनीतिक रूप से नया जीवन देने में जुटी है। संभल से लेकर रामपुर तक शिवपाल यादव की यह सक्रियता यह साबित करती है कि 2027 के महासंग्राम के लिए समाजवादी पार्टी अपनी पूरी ताकत झोंकने को पूरी तरह तैयार है।

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