अमित शाह के सामने दक्षिणी राज्यों की दो टूक, परिसीमन से NEET और कावेरी तक उठाए बड़े मुद्दे

अमित शाह की अध्यक्षता में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में परिसीमन, NEET, कावेरी जल विवाद, वित्तीय हिस्सेदारी और दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर बड़ी मांगें उठीं।

Update:2026-08-20 16:31 IST

Amit Shah Southern Zonal Council Meeting 2026: तमिलनाडु में गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद (Southern Zonal Council) की बैठक हुई। इस बैठक में परिसीमन, दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा, NEET परीक्षा, कावेरी जल बंटवारे और राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे। बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों की संख्या और राजनीतिक प्रभाव को सुरक्षित रखने के लिए औपचारिक प्रस्ताव पारित करने की मांग की। वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने प्रस्तावित परिसीमन के बाद दक्षिण भारत की राजनीतिक आवाज कमजोर होने की आशंका जताते हुए सुरक्षा उपायों की मांग की।

बैठक में दक्षिणी राज्यों के बीच नदी जल प्रबंधन, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, तटीय सुरक्षा, मादक पदार्थों की तस्करी और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया।

विजय ने उठाया परिसीमन और NEET का मुद्दा

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने परिसीमन और NEET को बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के राष्ट्रीय लक्ष्य को सफलतापूर्वक लागू किया है, उन्हें इसकी कीमत राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी के रूप में नहीं चुकानी चाहिए।

विजय ने कहा कि 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के आवंटन पर लगी रोक अब समाप्ति की ओर है। ऐसे में जनसंख्या के आधार पर होने वाले संभावित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की सामूहिक संसदीय ताकत कम होने की आशंका है।

उन्होंने केंद्र से स्पष्ट कानूनी आश्वासन की मांग की कि जनसंख्या स्थिरीकरण में सफलता हासिल करने वाले किसी भी राज्य के संसदीय प्रतिनिधित्व के प्रतिशत में कमी नहीं की जाएगी।

विजय ने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण, मानव विकास और आर्थिक विकास में देश के सामने मिसाल कायम की है। राष्ट्रीय नीतियों को सफलतापूर्वक लागू करने का परिणाम यह नहीं होना चाहिए कि इन राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व घट जाए।

उन्होंने कहा कि परिसीमन से दक्षिण की सामूहिक राजनीतिक आवाज कमजोर नहीं होनी चाहिए और संघीय ढांचे के संतुलन की रक्षा जरूरी है।

NEET से तमिलनाडु को छूट की मांग

विजय ने तमिलनाडु को NEET से छूट देने की मांग भी दोहराई। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राज्य कोटे के तहत MBBS, BDS और AYUSH पाठ्यक्रमों में प्रवेश कक्षा 12 के अंकों के आधार पर किया जाए।

तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि NEET ग्रामीण इलाकों और सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए नुकसानदेह है। विजय ने कहा कि राज्य की स्कूली शिक्षा आधारित प्रवेश व्यवस्था मेडिकल शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने में मदद करती है।

डीके शिवकुमार बोले- आर्थिक ताकत के साथ राजनीतिक आवाज भी जरूरी

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने परिसीमन को बैठक के सबसे अहम राजनीतिक मुद्दों में शामिल किया। उन्होंने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए प्रस्ताव पारित करने की मांग की।

शिवकुमार ने केंद्र से आग्रह किया कि अगले 25 वर्षों तक परिसीमन के लिए 1971 की जनगणना को आधार बनाए रखा जाए। उन्होंने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को बरकरार रखने और इसी संख्या के भीतर महिलाओं के आरक्षण को लागू करने का सुझाव दिया।

शिवकुमार ने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या स्थिरीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा किया है। इस सफलता के कारण उनकी राजनीतिक आवाज छोटी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दक्षिण का आर्थिक वजन उसकी राजनीतिक आवाज के अनुरूप होना चाहिए।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने यह भी मांग की कि दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व न तो संख्या के लिहाज से और न ही कुल हिस्सेदारी के लिहाज से कम होना चाहिए।

कर्नाटक ने वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की

शिवकुमार ने कर्नाटक की कर हिस्सेदारी को 3.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत हिस्सेदारी में कमी से राज्य को छह वर्षों में करीब 65,000 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है।

उन्होंने 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत कर्नाटक के लिए 5,495 करोड़ रुपये के विशेष अनुदान और 6,000 करोड़ रुपये के राज्य-विशिष्ट अनुदान जारी करने की भी मांग की।

इसके अलावा कर्नाटक ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए केंद्र से अधिक सहयोग की मांग की।

कावेरी और मेकेदाटु पर भी चर्चा

नदी जल विवाद के मुद्दे पर शिवकुमार ने जल बंटवारे के बजाय जल सहयोग की नीति अपनाने की बात कही। उन्होंने समानता, पारदर्शिता और सहयोग के आधार पर नदी जल प्रबंधन की मांग की।

उन्होंने विवादित मेकेदाटु बांध परियोजना के लिए समर्थन मांगा, जिसका तमिलनाडु लंबे समय से विरोध करता रहा है।

शिवकुमार ने दावा किया कि मेकेदाटु परियोजना से तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों को भी लाभ मिल सकता है। उन्होंने तमिलनाडु से परियोजना पर सहयोग करने की अपील की।

केरल ने मुल्लापेरियार पर दिया पानी का भरोसा

केरल की ओर से भी बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। मुल्लापेरियार बांध विवाद पर केरल ने तमिलनाडु को आश्वासन दिया कि यदि तमिलनाडु नए बांध के प्रस्ताव पर सहमत होता है तो नए बांध से मिलने वाला पूरा पानी तमिलनाडु को दिया जाएगा।

केरल ने परियोजना की लागत वहन करने की पेशकश भी की और कहा कि बांध की डिजाइन, निर्माण तथा स्थान को लेकर तमिलनाडु अपनी बात रख सकता है।

केरल ने बंदरगाहों और रेल कनेक्टिविटी के विकास के साथ तटीय सुरक्षा और अंतरराज्यीय सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की मांग की।

राज्य ने खनन कानून में प्रस्तावित संशोधन का विरोध करते हुए कहा कि खनिज संसाधनों वाले राज्यों के वित्तीय अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए।

महिलाओं के आरक्षण पर केरल का रुख

केरल ने संसद में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने का समर्थन किया, लेकिन इसके लिए संसद की कुल सीटों की संख्या बढ़ाने के बजाय मौजूदा सीटों के भीतर ही व्यवस्था करने की वकालत की।

केरल ने आयुष्मान भारत PM-JAY को लेकर भी केंद्र के सामने अपनी चिंताएं रखीं। राज्य के मुताबिक पिछले नीति वर्ष में उसने योजना के तहत करीब 1,493 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण से उसे लगभग 151 करोड़ रुपये मिले। केरल का कहना है कि योजना की करीब 90 प्रतिशत लागत राज्य को खुद वहन करनी पड़ रही है।

तटीय कटाव और रात में ट्रैफिक का मुद्दा

केरल ने तटीय कटाव को राज्य-विशिष्ट आपदा घोषित किए जाने का हवाला देते हुए तटीय सुरक्षा और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए आपदा प्रबंधन एवं राहत फंड के इस्तेमाल की अनुमति मांगी।

राज्य ने केरल को कर्नाटक और तमिलनाडु से जोड़ने वाले वन क्षेत्रों के राजमार्गों पर रात के समय लगाए जाने वाले व्यापक ट्रैफिक प्रतिबंधों पर भी आपत्ति जताई। केरल ने वन्यजीव संरक्षण और लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन के लिए वैज्ञानिक आधार पर संवेदनशील समय तय करने तथा नियंत्रित काफिले की व्यवस्था का सुझाव दिया।

चंद्रबाबू नायडू बोले- दक्षिण बन सकता है 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने दक्षिणी राज्यों के बीच आर्थिक और बुनियादी ढांचे के स्तर पर ज्यादा सहयोग की जरूरत बताई।

नायडू ने कहा कि दक्षिणी राज्य मिलकर भारत की GDP में करीब 31 प्रतिशत योगदान देते हैं और 2047 तक दक्षिण को 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की क्षमता रखते हैं।

उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच लंबित मुद्दों को विश्वास और सहयोग के जरिए हल करने की बात कही।

गोदावरी-कावेरी लिंक पर जोर

नायडू ने गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना को आगे बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने 500 TMC से अधिक पानी को गोदावरी से कावेरी की ओर स्थानांतरित करने की योजना का जिक्र करते हुए इसे तमिलनाडु की दीर्घकालिक जल जरूरतों का समाधान बताया।

उन्होंने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच नदी जल प्रबंधन को लेकर बेहतर समन्वय की मांग की।

नायडू ने गंगा-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना के लिए दीर्घकालिक राष्ट्रीय योजना बनाने और नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए समयबद्ध DPR तथा मंजूरियां सुनिश्चित करने का भी प्रस्ताव दिया।

बुलेट ट्रेन और साझा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का प्रस्ताव

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा। उन्होंने इसे कुप्पम के रास्ते ले जाने का सुझाव दिया।

उन्होंने अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाली एकीकृत परिवहन व्यवस्था विकसित करने की मांग की।

इसके अलावा दक्षिणी राज्यों में साझा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और ड्राई पोर्ट विकसित करने तथा दक्षिणी पावर ग्रिड को राष्ट्रीय ग्रिड के साथ और मजबूत तरीके से जोड़ने की बात कही।

तेलंगाना ने दक्षिणी राज्यों में बेहतर समन्वय पर दिया जोर

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने दक्षिणी राज्यों के बीच साझा मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि तेलंगाना मजबूत भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए राज्यों के बीच समन्वय मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

बैठक का बड़ा संदेश क्या रहा?

अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दक्षिणी राज्यों ने अलग-अलग मुद्दे उठाए, लेकिन परिसीमन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व ऐसा मुद्दा रहा जिसने कई राज्यों को एक साझा मंच पर ला दिया।

दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण, आर्थिक विकास और मानव विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में परिसीमन के बाद उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम होना उनके लिए गंभीर चिंता का विषय है।

वहीं कावेरी, मुल्लापेरियार और गोदावरी-कावेरी लिंक जैसे जल मुद्दों ने दक्षिणी राज्यों के बीच सहयोग और विवाद, दोनों को सामने रखा।

कुल मिलाकर बैठक में दक्षिण की ओर से यह संदेश स्पष्ट रहा कि आर्थिक योगदान के साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व, वित्तीय हिस्सेदारी, बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय नीति निर्माण में राज्यों की आवाज भी मजबूत रहनी चाहिए।

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